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Meerut News: छह बाल श्रमिकों को अवमुक्त कराया, 218 को चिह्नित किया
Wed, 12 Jun 2024 02:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 12 Jun 2024 02:55 AM IST
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सहारनपुर। बाल श्रम निषेध दिवस से पहले श्रम विभाग ने बाल श्रम कराने वालों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। एक ओर जहां छह बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है, वहीं 218 बाल श्रमिकों को चिह्नित किया गया है। इनको अवमुक्त कराने के लिए कोर्ट में आगे की कार्यवाही कर दी गई है।
बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए वर्ष 2023-24 में बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम-1986 यथासंशोधित अधिनियम, 2016 के तहत श्रम विभाग द्वारा जनपद सहारनपुर में खतरनाक श्रेणी में काम करने वाले छह बालकों को अवमुक्त कराया गया है। उक्त बालकों से श्रम कराने वाले दुकानदारों पर प्रति बच्चे के हिसाब से 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही कोर्ट के स्तर से भी कार्रवाई हो रही है। इसके अलावा गैर खतरनाक श्रेणी के 218 किशोरों को चिह्नित कर उनका मामला सीजेएम कोर्ट में भेजा गया है। जहां से उनको अवमुक्त कराने की कार्यवाही की जाएगी।
उधर, श्रम विभाग द्वारा मंगलवार को जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। कुल सात किशोर श्रमिकों को चिह्नित करते हुए उनको जागरूक किया गया। उप श्रम आयुक्त अनुपमा गौतम ने बताया कि बाल श्रम रोकने के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। इसी का नतीजा है जो बाल श्रमिकों को अवमुक्त कराया गया।
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खतरनाक और गैर खतरनाक श्रेणी
14 वर्ष से कम आयु के बालकों या बालिकाओं से यदि काम कराया जा रहा है तो उसे खतरनाक श्रेणी माना जाता है। 14 से 18 वर्ष के बालक या बालिकाओं से यदि काम कराया जाता है तो यह गैर खतरनाक श्रेणी में आता है। बाल श्रम कराने वालों पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना लगाने का अधिकार श्रम विभाग को है, जबकि उससे ऊपर अधिकतम 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार कोर्ट को है।
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बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए वर्ष 2023-24 में बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम-1986 यथासंशोधित अधिनियम, 2016 के तहत श्रम विभाग द्वारा जनपद सहारनपुर में खतरनाक श्रेणी में काम करने वाले छह बालकों को अवमुक्त कराया गया है। उक्त बालकों से श्रम कराने वाले दुकानदारों पर प्रति बच्चे के हिसाब से 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही कोर्ट के स्तर से भी कार्रवाई हो रही है। इसके अलावा गैर खतरनाक श्रेणी के 218 किशोरों को चिह्नित कर उनका मामला सीजेएम कोर्ट में भेजा गया है। जहां से उनको अवमुक्त कराने की कार्यवाही की जाएगी।
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उधर, श्रम विभाग द्वारा मंगलवार को जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। कुल सात किशोर श्रमिकों को चिह्नित करते हुए उनको जागरूक किया गया। उप श्रम आयुक्त अनुपमा गौतम ने बताया कि बाल श्रम रोकने के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। इसी का नतीजा है जो बाल श्रमिकों को अवमुक्त कराया गया।
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खतरनाक और गैर खतरनाक श्रेणी
14 वर्ष से कम आयु के बालकों या बालिकाओं से यदि काम कराया जा रहा है तो उसे खतरनाक श्रेणी माना जाता है। 14 से 18 वर्ष के बालक या बालिकाओं से यदि काम कराया जाता है तो यह गैर खतरनाक श्रेणी में आता है। बाल श्रम कराने वालों पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना लगाने का अधिकार श्रम विभाग को है, जबकि उससे ऊपर अधिकतम 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार कोर्ट को है।