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कलयुग का श्रवण है मेरठ का राहुल, दादा-दादी  को कंधे पर बैठाकर कराया तीर्थ

Tue, 24 Jul 2018 10:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 24 Jul 2018 10:55 AM IST
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Shravana : Boy having grandparents on his shoulder completed his journey from Haridwar to Meerut
कलयुग का श्रवण मेरठ का राहुल - फोटो : अमर उजाला
आधुनिकता की चकाचौंध के बाद भी समाज में ऐसी युवा भी हैं जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों के लिए संवेदनशील है। कलियुग के श्रवण मेरठ के रहने वाले राहुल कुमार अपने दादा-दादी को लेकर धार्मिक यात्रा पर निकले हैं। मजेदार बात यह है कि हरकी पैड़ी पर गंगाजल भरने के बाद उन्होंने अपने दादा-दादी को कांवड़ पर बिठाकर पैदल ही अपने घर के लिए निकले हैं। 
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मेरठ के कंकरखेड़ा के जंगेठी गांव निवासी राहुल कुमार 19 जुलाई को अपने दादा छोटेलाल (90) दादी कश्मीरी (80) पिता कमल सिंह और तीन मामा (अमित, जॉनी और सोनवीर) के साथ बस से ऋषिकेश आए। 20 जुलाई को उन्होंने अपने दादा-दादी को नीलकंठ महादेव के दर्शन कराने के बाद हरिद्वार लौट आए। 21 जुलाई को हरिद्वार में चंडी देवी और मंसा देवी के दर्शन कराए।
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रविवार की सुबह दादा दादी को गंगा में पावन डुबकी लगवाकर गंगाजल भरा। इसके बाद राहुल ने दादा-दादी को कांवड़ पर बैठाया और हरकी पैड़ी से मेरठ तक के पैदल सफर की शुरुआत की। राहुल की इस यात्रा में उसके पिता और तीनों मामा पैदल ही चल रहे हैं। चिलचिलाती धूप और तपती सड़कें उनके कदमों को नहीं रुक पाई। 
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सभी को मिले ऐसा बेटा 
राहुल के दादा और दादी का कहना है कि भगवान राहुल जैसा बेटा सभी मां बाप को दे। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा 9 अगस्त को मेरठ के औघड़ नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद समाप्त होगी।  


लोगों की सोच बदलना चाहते हैं राहुल 
मेरठ में एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिीशियन राहुल कुमार का कहना है कि युवा पीढ़ी की धारणा अपने बुजुर्गों को लेकर ठीक नहीं होती। शादी के बाद अधिकांश लोग अपने मां-बाप को अकेले छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि वह युवा पीढ़ी की सोच बदलना चाहते हैं। इसीलिए इस तरह की यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने बताया कि वह पूरे संसार को बताना चाहते हैं कि बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं।
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