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श्राद्ध : श्राद्ध में अन्न, वस्त्र दान करने से पितरों को स्वर्ग में मिलती है शांति
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माछरा(मेरठ)। दो सिंतंबर बुधवार से उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पड़ने से पितृ श्राद्ध शुरू हो रहे हैं। जिसमें पितरों के श्राद्ध कम से सुख शांति की प्राप्ति होती है ।
पूर्णिमा के दिन से पितृ पक्ष शुरू होगा जोकि 15 दिनों तक चलेगा। पंडित आनंद शर्मा के मुताबिक पूर्वजों की पंचांग के अनुसार मृत्यु दिन को ही श्राद्ध करना चाहिए। जिसमें अन्न, वस्त्र का दान देने से पितृ स्वर्ग में शांति प्राप्त करते हैं। पितरों को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले श्राद्ध को शास्त्रों में पितृ यज्ञ कहा गया है।
श्राद्ध की विधि
जिस दिन श्राद्ध तिथि हो। उस दिन सूर्योदय से लेकर दिन में 12 बजकर 25 मिनट की अवधि के मध्य ही श्राद्ध करें। सुबह उठकर स्नान करे और पितृ स्थान को गाय के गोबर से लेपकर गंगाजल से पवित्र करे घर की महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन तैयार करें। पितृ के निमित्त अग्नि, गाय का दूध, दही, घी व खीर का अर्पण करे। ब्राह्मण संकल्प करके गाय, कुत्ते, कौवा और ब्राह्मण को दक्षिणा देकर विदा करें।
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दान की सामग्री
जौ, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी, नमक का दान करे। शास्त्र विधि से श्राद्ध करने से सकल मनोरथ पूर्ण होते हैं और परिवार, व्यवसाय और आजीविका में उन्नति होती है। कार्य, व्यापार, शिक्षा अथवा वंश वृद्धि में आ रही रुकावटे दूर होती हैं। शास्त्रों में भी तिल को देव अन्न कहा गया है। काले तिल से श्राद्ध करने का विधान है।
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पूर्णिमा के दिन से पितृ पक्ष शुरू होगा जोकि 15 दिनों तक चलेगा। पंडित आनंद शर्मा के मुताबिक पूर्वजों की पंचांग के अनुसार मृत्यु दिन को ही श्राद्ध करना चाहिए। जिसमें अन्न, वस्त्र का दान देने से पितृ स्वर्ग में शांति प्राप्त करते हैं। पितरों को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले श्राद्ध को शास्त्रों में पितृ यज्ञ कहा गया है।
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श्राद्ध की विधि
जिस दिन श्राद्ध तिथि हो। उस दिन सूर्योदय से लेकर दिन में 12 बजकर 25 मिनट की अवधि के मध्य ही श्राद्ध करें। सुबह उठकर स्नान करे और पितृ स्थान को गाय के गोबर से लेपकर गंगाजल से पवित्र करे घर की महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन तैयार करें। पितृ के निमित्त अग्नि, गाय का दूध, दही, घी व खीर का अर्पण करे। ब्राह्मण संकल्प करके गाय, कुत्ते, कौवा और ब्राह्मण को दक्षिणा देकर विदा करें।
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दान की सामग्री
जौ, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी, नमक का दान करे। शास्त्र विधि से श्राद्ध करने से सकल मनोरथ पूर्ण होते हैं और परिवार, व्यवसाय और आजीविका में उन्नति होती है। कार्य, व्यापार, शिक्षा अथवा वंश वृद्धि में आ रही रुकावटे दूर होती हैं। शास्त्रों में भी तिल को देव अन्न कहा गया है। काले तिल से श्राद्ध करने का विधान है।