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ध्वस्तीकरण का मतलब केवल आगे का हिस्सा हटाना नहीं : सुप्रीम कोर्ट

Fri, 10 Apr 2026 02:55 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:55 AM IST
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Shopkeepers have to demolish 859 unauthorized construction
शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को अब अपनी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के रूप में किए गए 859 अवैध निर्माण को स्वयं ही हटाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण नहीं हटाया गया तो प्रशासन बुलडोजर चलाकर इसे ध्वस्त करेगा और इस कार्रवाई पर आने वाला समस्त खर्च भी संबंधित दुकानदारों से ही वसूला जाएगा। इस आदेश के बाद से पूरे बाजार में हताशा और मायूसी का माहौल है।
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सुप्रीम कोर्ट ने आवास एवं विकास परिषद को आदेश दिए हैं कि निर्माणकर्ताओं को 10 से 15 दिन का अंतिम नोटिस दिया जाए। अदालत ने साफ किया कि ध्वस्तीकरण का मतलब केवल आगे का हिस्सा हटाना नहीं है बल्कि इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह (सेटबैक) में हुए अवैध निर्माण को भी पूरी तरह खत्म करना होगा। इन संपत्तियों को वापस उनके मूल आवासीय रूप में लाना अनिवार्य होगा। प्रशासन को पूरी प्रक्रिया दो महीने में संपन्न करने के निर्देश दिए गए हैं।
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आरटीआई कार्यकर्ता की याचिका पर आया सख्त आदेश
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने 17 दिसंबर 2024 को हुई सुनवाई में आवासीय भवन में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनने के मामले में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। अक्तूबर 2025 में आवास विकास की टीम ने भवन संख्या 661/6 में अवैध कॉम्प्लेक्स का ध्वस्तीकरण कर दिया था लेकिन अन्य पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आदेश का पूरी तरह से अनुपालन न होने पर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने अवमानना याचिका दायर की थी। इस मामले में आवास एवं विकास परिषद पहले ही 45 अधिकारियों और 21 व्यापारियों के खिलाफ थाना नौचंदी में एफआईआर दर्ज करा चुकी है। 27 जनवरी को सुनवाई के बाद कोर्ट ने 6 सप्ताह के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट रखी गई जिस पर कोर्ट ने कड़ा रुख बरकरार रखा।
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कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब परिषद सभी 859 निर्माणकर्ताओं को स्वयं ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी करेगी। यदि 15 दिन की अवधि में दुकानदारों ने स्वयं कदम नहीं उठाया, तो प्रशासनिक बुलडोजर चलेगा और उसकी रिकवरी भी मालिकों से की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की गई है। - लोकेश खुराना, आरटीआई कार्यकर्ता
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