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शिक्षा के उजियारे से मिटाना चाहती थी गरीबी का अंधेरा, खुद हो गई गुम
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मृतका छात्रा मनीषा पाल का फाइल फोटो
दौराला। तंग गली, कच्चा टूटा मकान और इस मकान में मूलभूत सुविधाओं के बिना नौ सदस्य रह रहे थे। छात्रा मनीषा पाल शिक्षिका बनकर शिक्षा के उजियारे से अपने परिवार की गरीबी का अंधेरा मिटाना चाहती थी। उसके इस सपने को पूरा करने के लिए पिता इंद्रपाल दिन रात मजदूरी कर रहे थे, लेकिन शुक्रवार को हुए सड़क हादसे में मनीषा की मौत के कारण परिवार का टूट गया।
पिता इंद्रपाल ने बताया कि वह पत्नी पूनम, पिता ओमप्रकाश, माता कमलेश और पांच बच्चों नेहा, श्रुति, मनीषा, बेटा गौरव, बेटी लक्की के साथ कच्चे मकान में जीवन यापन कर रहा है। गरीबी का दंश और बच्चों को पढ़ा लिखाकर कामयाब बनाने का जुनून लेकर इंद्रपाल दिन रात मेहनत करते हैं। उनके पास अपनी कोई भूमि नहीं है, वह कस्बे के किसानों के खेतों में मजदूरी करता था। इंद्रपाल ने बताया कि घर में कोई मूलभूत सुविधा नहीं है, लेकिन उसके बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण बड़ी बेटी नेहा की पढ़ाई छूट गई।
बेटी मनीषा और श्रुति आरजी कॉलेज में एक साथ बीए की पढ़ाई कर रहीं थीं। बताया कि शुक्रवार को भी दोनों घर से एक साथ कॉलेज के लिए निकली थीं। ताऊ ऋषिपाल ने बताया कि मनीषा की मौत से हर कोई गमजदा है। शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव घर लाया गया। देर शाम उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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दो घंटे तक इंद्रपाल को ढूंढते रहे परिजन
दौराला। मनीषा की मौत की जानकारी मिलने पर परिजनों में मातम पसर गया। मां पूनम व बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इंद्रपाल किसी किसान के खेत में ईख बांधने गए हुए थे। इसकी परिजनों को जानकारी नहीं थी। मनीषा की मौत के बाद परिजन उसे एक खेत से दूसरे खेत में ढूंढते रहे। लगभग दो घंटे बाद जाकर इंद्रपाल उन्हें मिले। इसके बाद ताऊ की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
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पिता इंद्रपाल ने बताया कि वह पत्नी पूनम, पिता ओमप्रकाश, माता कमलेश और पांच बच्चों नेहा, श्रुति, मनीषा, बेटा गौरव, बेटी लक्की के साथ कच्चे मकान में जीवन यापन कर रहा है। गरीबी का दंश और बच्चों को पढ़ा लिखाकर कामयाब बनाने का जुनून लेकर इंद्रपाल दिन रात मेहनत करते हैं। उनके पास अपनी कोई भूमि नहीं है, वह कस्बे के किसानों के खेतों में मजदूरी करता था। इंद्रपाल ने बताया कि घर में कोई मूलभूत सुविधा नहीं है, लेकिन उसके बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण बड़ी बेटी नेहा की पढ़ाई छूट गई।
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बेटी मनीषा और श्रुति आरजी कॉलेज में एक साथ बीए की पढ़ाई कर रहीं थीं। बताया कि शुक्रवार को भी दोनों घर से एक साथ कॉलेज के लिए निकली थीं। ताऊ ऋषिपाल ने बताया कि मनीषा की मौत से हर कोई गमजदा है। शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव घर लाया गया। देर शाम उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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दो घंटे तक इंद्रपाल को ढूंढते रहे परिजन
दौराला। मनीषा की मौत की जानकारी मिलने पर परिजनों में मातम पसर गया। मां पूनम व बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इंद्रपाल किसी किसान के खेत में ईख बांधने गए हुए थे। इसकी परिजनों को जानकारी नहीं थी। मनीषा की मौत के बाद परिजन उसे एक खेत से दूसरे खेत में ढूंढते रहे। लगभग दो घंटे बाद जाकर इंद्रपाल उन्हें मिले। इसके बाद ताऊ की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई।