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हस्तिनापुर में आस्था को ठेस: प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर में प्राचीन शिवलिंग से छेड़छाड़ लोगों में रोष

Tue, 09 Mar 2021 11:39 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 09 Mar 2021 11:39 AM IST
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seven thousand year old Shivaling established by Yudhishthira secretly removed in Hastinapur
हस्तिनापुर में शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
मेरठ से सटे हस्तिनापुर में मंगलवार सुबह उस वक्त लोगों की आस्था को ठेस पहुंची जब हस्तिनापुर के एक मंदिर में युधिष्ठिर द्वारा स्थापित लाखों लोगों की श्रद्धा से जुड़े शिवलिंग को गुपचुप ढंग से हटाकर नया शिवलिंग स्थपित कर दिया गया। मामले की जानकारी लगते ही लोगों में रोष पनप गया। लोग इक्ट्ठा होकर मौके पर पहुंच गए और  हंगामा किया। वहीं सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी है।
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जानकारी के अनुसार हस्तिनापुर महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी में लगभग सात हजार वर्ष पुराने द्वापर युग के साक्षी युधिष्ठिर द्वारा स्थापित लाखों लोगों की आस्था से जुड़े शिवलिंग को मंदिर की देखरेख करने वाले  महंत ने अपने गुरु की आज्ञा अनुसार गुपचुप तरीके से हटाकर प्राचीन पांडवों द्वारा स्थापित शिवलिंग के ऊपर दूसरे शिवलिंग को स्थापित कर दिया।
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मंगलवार सुबह जैसे ही श्रद्धालु हर रोज की तरह मंदिर परिसर में जलाभिषेक के लिए पहुंचे तो मंदिर का नजारा देख उनके होश उड़ गए क्योंकि उन्हें वहां पर वह प्राचीन शिवलिंग नजर नहीं आया जहां पर वह हर रोज पूजा अर्चना करते थे। मामले की जानकारी थाना पुलिस को दी गई मौके पर पहुंची थाना पुलिस ने मंदिर के महंत से जानकारी की तो मंदिर के महंत ने बताया कि उनके गुरु की आज्ञा अनुसार प्राचीन शिवलिंग के ऊपर ही नया शिवलिंग स्थापित किया गया है।
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थाना पुलिस ने तुरंत महंत को नए शिवलिंग को हटाकर पुराने शिवलिंग को पूर्व की भांति करने की बात कही जिस पर महंत ने तुरंत वह नया शिवलिंग हटा लिया और प्राचीन शिवलिंग की पूजा अर्चना शुरू की जिसकी भनक ना तो पर्यटन विभाग के अधिकारियों को लगी तो नहीं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को जबकि यह मंदिर अति प्राचीन होने के कारण पर्यटन विभाग की देखरेख में है। वहीं पास ही में पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी नींद में सोते रहे।

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प्राचीन पांडव टीला पुरातत्व विभाग के अधीन है, जहां पर पुरातत्व विभाग का कार्यालय बना हुआ है और नियम के अनुसार पुरातत्व विभाग के उल्टा खेड़ा पांडव टीले से 100 मीटर की दूरी पर कोई भी निर्माण करना कानूनी रूप से अवैध है।

परंतु यह पांडव टीला उल्टा खेड़ा से 20 मीटर की दूरी पर है जहां पर यह शिवलिंग स्थापित किया गया। वही मामले की सूचना से कस्बा और क्षेत्र के लोगों में रोष फैल गया मौके पर पहुंचे कई लोगों ने इसका विरोध किया और थाना पुलिस से उचित कार्यवाही की मांग की। जब इस संबंध में पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया और पर्यटन विभाग अधिकारी का नंबर ही बंद मिला।

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