दो बच्चों की हत्या: पुलिस की कार्रवाई और मुठभेड़ पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की थी एनकाउंटर की मांग
सरधना में मासूम रिहान और उवैश की तांत्रिक हत्या के बाद पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ में घायल कर गिरफ्तार किया, मगर अब ग्रामीणों और परिजनों ने सवाल उठाए हैं कि क्या यह कार्रवाई पुलिस की छवि बचाने का प्रयास है?
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मेरठ के सरधना में नवाबगढ़ी गांव में मासूम रिहान और उवैश की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। तांत्रिक असद की क्रूरता के खुलासे के बाद जहां लोगों में गुस्सा है, वहीं पुलिस की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। रिहान के लापता होने के समय से ही परिजन तांत्रिक असद पर संदेह जता रहे थे, मगर पुलिस ने तब कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अब जबकि आरोपी पुलिस मुठभेड़ में घायल होकर गिरफ्तार हो चुका है, ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह मुठभेड़ पुलिस की लापरवाही को ढकने का प्रयास है?
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ग्रामीणों ने की थी एंकाउंटर की मांग
गांव में रिहान और उवैश के परिजनों के साथ-साथ ग्रामीणों ने खुलकर आरोपी असद के ‘एंकाउंटर’ की मांग की थी। आरोप था कि असद न सिर्फ एक सीरियल किलर की मानसिकता रखता है, बल्कि उसे बचाने की कोशिश पहले पुलिस के कुछ अफसरों ने भी की थी।
क्या यह पुलिस की छवि बचाने की कोशिश है?
हालांकि पुलिस इस मुठभेड़ को एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया बता रही है, जहां आरोपी ने जानलेवा हमला किया और पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। लेकिन पहले रिहान की गुमशुदगी की रिपोर्ट पर कोतवाल द्वारा नजरअंदाजी, तांत्रिक असद से पूछताछ से बचना, और परिजनों को थाने से भगाने जैसे आरोपों को लेकर अब भी लोगों में आक्रोश है।
मुठभेड़ के बाद पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। एसपी देहात राकेश मिश्रा ने बयान दिया कि तांत्रिक असद के अलावा उसके पिता इकरामुद्दीन और भाई जुबैर से भी पूछताछ की जा रही है। ये जांच सिर्फ हत्याओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह देखा जाएगा कि असद को पहले किसने संरक्षण दिया, और क्या इस कांड में कोई और व्यक्ति भी शामिल था।
गांव में सन्नाटा और डर का माहौल
नवाबगढ़ी गांव अभी भी सदमे में है। दो परिवारों के इकलौते बेटे अब इस दुनिया में नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, तो आज ये दोनों बच्चे जीवित होते।
रिहान और उवैश के परिजनों ने कहा कि हमने तो पहले ही कहा था कि असद खतरनाक आदमी है, लेकिन पुलिस ने हमारी बात नहीं सुनी। अब मुठभेड़ दिखा रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर हमारी बात सुनी होती, तो ये हालात ही नहीं बनते।