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सहारनपुर के बेटे ने माउंट एल्ब्रस पर लहराया तिरंगा, जानिए खास बातें...

Tue, 03 Oct 2017 06:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Tue, 03 Oct 2017 06:13 PM IST
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Saharanpur son waved a tricolor on Mount Elbrus, some special things...
माउंट एल्ब्रस पर तिरंगा लहराता जोगेंद्रपाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

सहारनपुर जिले के जोगेंद्रपाल ने इस बार यूरोप की सबसे ऊंची माउंट एल्ब्रस चोटी पर तिरंगा फहराया है। जान जोखिम में डालकर जोगेंद्र ने करीब 5642 मीटर ऊंची चोटी को फतेह किया। जोगेंद्र का सपना सभी महाद्वीपों में स्थित सातों चोटियों पर तिरंगा फहराना है।  

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माउंट एल्ब्रस चोटी को फतेह करने के बाद जोगेंद्र सोमवार को अमर उजाला के कार्यालय पहुंचे। जोगेंद्र ने बताया कि उन्होंने माउंट एल्ब्रस पर 24 सितंबर को चढ़ाई शुरू की थी। चोटी तक पहुंचने में उन्हें सात दिन लगे। यानी वह 30 सितंबर की पूर्वाह्न 11 बजे चोटी पर पहुंचे। माउंट एल्ब्रस की ऊंचाई 5642 मीटर और 18 हजार 510 फुट है। उनकी चढ़ाई के दौरान तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस था, जो किसी का भी खून जमा सकता है, जिससे मौत भी हो सकती है।

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कुछ कर गुजरने की जिद ने उसे दिलाई सफलता

Saharanpur son waved a tricolor on Mount Elbrus, some special things...
माउंट एल्ब्रस चोटी

इसके अलावा 50 किलोमीटर से अधिक रफ्तार से शीत लहर चल रही थी, जिसके थपेड़े उन्हें चढ़ने से रोक रहे थे, मगर कुछ कर गुजरने की जिद ने उसे सफलता दिलाई। टीम में कुल आठ लोग थे, जिनमें जापान, इजरायल और भारत के लोग शामिल थे, जिनमें दो लोग भारतीय थे एक जोगेंद्र और दूसरा युवक उड़ीसा से था। चढ़ाई पूरी करने के बाद सहारनपुर लौटने पर जोगेंद्र का जोरदार स्वागत किया गया। इससे पहले वह अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट लिकिमंजारो को फतेह कर चुका है। जोगेंद्र ने पर्वतारोही की ट्रेनिंग हिमाचल प्रदेश स्थित अटल बिहारी वाजपेई इंस्टीट्यूट से ली है। 

आर्थिक सहायता की अपील  
जोगेंद्रपाल गरीब परिवार से है। जिसके दो भाई मजदूर हैं। वह पेट भरने के लिए पेंटिंग का काम करता है। वह प्रशासन के साथ ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आर्थिक मदद की गुहार लगा चुका है, मगर कोई मदद नहीं मिली है। उसने बताया कि अभी तक ट्रेनिंग और चोटियों पर चढ़ने का खर्च चंदे में मिले पैसों से उठा रहा है।

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