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वंदेमातरम और भारत माता की जय बोलने पर वार-पलटवार, देवबंदी उलमा ने कही ये बड़ी बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 30 Jan 2019 09:43 PM IST
देवबंद
देवबंद - फोटो : अमर उजाला
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वंदेमातरम और भारत माता की जय बोलने को लेकर उलमा की राय का विरोध जताने वाले लखनऊ के अधिवक्ता डॉ. सैय्यद रिजवान को लेकर देवबंदी उलमा ने पलटवार करते हुए कहा कि वकील होने के नाते उन्हें इस्लामी और मजहबी मामलात में राय देने का कोई हक नहीं है। उलमा का यह भी कहना है कि जो लोग इस्लाम के विरुद्ध बात करते हैं वो इस्लाम से खारिज हो जाते हैं। 



फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि डॉक्टर सैय्यद रिजवान को इस्लामी तालीमात के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए जो लोग उनके करीब हैं और उनसे भलीभांति परिचित हैं उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह उनसे मुलाकात करें और उनको इस्लामी तालीम से रुबरु कराएं।


उन्होंने कहा कि एक वकील होने के चलते उनको इस्लाम और मजहब के बारे में राय देने का कोई हक नहीं है। ऑल इंडिया दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा का कहना है कि इस पर कोई नारेबाजी करे या सियासत करे मुसलमानों के लिए जो चीज जायज नहीं है वो कभी जायज हो भी नहीं सकती। वंदेमातरम पर दारुल उलूम का फतवा और उलमा की राय एकदम दुरुस्त है।

बता दें कि लखनऊ के अधिवक्ता डा. सैय्यद रिजवान ने पूर्व में भारत माता की जय और वंदेमातरम को लेकर उलमा की राय का 11 हजार बार भारत माता की जय और वंदेमातरम बोलकर विरोध किया है। साथ ही कहा कि ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि मुस्लिम समाज में यह संदेश जाए कि इस तरह के फतवों और उलमा की राय की कोई अहमियत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दोनों चीजों को जाति या मजहब से जोड़ना गलत है।

कहां मस्जिद बने कहां मंदिर सुप्रीम कोर्ट तय करेगा: फारुकी 
सुन्नी वक्फ बोर्ड को निर्मोही अखाड़े की विद्याकुंड की जमीन पर मस्जिद बनाने की पेशकश किए जाने पर मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि यह पेशकश अदालती नहीं है। जब मसला अदालत में विचाराधीन है तो अदालत जो फैसला करेगी वो ही माना जाएगा। उन्होंने कहा कि हुकूमत ने भी इस तरह की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है उस पर भी अदालत ही सोचेगी और फैसला करेगी। कहां मस्जिद बनेगी और कहां मंदिर बनेगा इसका फैसले अदालत करेगी। जहां तक बाहर बैठकर इस मसले को सुलझाने का सवाल है तो यह रास्ता खुला हुआ है और इस पर कई बार कोशिशें भी हो चुकी हैं।

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