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देवबंदी उलमा बोले- दारुल उलूम में आतंकवाद है तो क्यों नहीं कराते जांच

Sat, 01 Dec 2018 09:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sat, 01 Dec 2018 09:47 PM IST
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Saharanpur, Deobandi Ulama said why the government does not investigate Darul Uloom
देवबंद

शंखनाद सभा में विहिप के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन के इस्लामी तालीम के मरकज दारुल उलूम पर टिप्पणी करने को लेकर देवबंदी उलमा ने पलटवार किया है। उलमा का कहना है कि तमाम जांच एजेंसियां और सरकारें उनके पास हैं। दारुल उलूम में आतंकवाद है या नहीं, आरोप लगाने वाले इसकी जांच क्यों नहीं कराते। 

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फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि दारुल उलूम या फिर जहां जहां भी दीनी तालीम के मरकज हैं वहां जो पढ़ाया जाता है वो सूरज की तरह साफ है। यह तमाम इदारे इंसानियत का कारखाना हैं और यहां से अमन का पैगाम दिया जाता है। उन्होंने कहा कि दारुल उलूम और अन्य मदारिसों ने देश की आजादी में जो किरदार अदा किया वो किसी से छिपा नहीं है। अनर्गल बयान देने वाले पहले देवबंद और मदरसों की तारीख को ध्यान से पढ़ें। 
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मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि जब इन लोगों को मालूम है कि दारुल उलूम और दीनी मदारिसों में आतंकवाद है तो फिर यह लोग अपनी सरकारों और तमाम एजेंसियों से जांच कराकर इसका खात्मा क्यों नहीं कराते। कहा कि इन लोगों का असल मकसद दो फिरकों के बीच नफरत का माहौल पैदा कर सियासी लाभ उठाना है।

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मुफ्ती अरशद ने कहा कि हम बड़े ही प्यार से उनसे यह कहते हैं कि वो यहां (दारुल उलूम) आए दो चार दिन रुके और यहां दी जानी वाली शिक्षा के बारे में जानकारी हासिल करें और उसे अपनी आंखों से देखें। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ ने कहा कि देवबंद के हर खास और आम इन दोनों ने मिलकर हमेशा देशहित, देश की तरक्की, उसकी एकता और अखंडता के लिए प्राथमिकता के आधार पर देश सेवा की है। विकट परिस्थितियां चाहे वो 1947 हो या फिर 1857 में आजादी के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध जंग लड़ी जा रही थी तब भी देवबंद की पूरी अवाम ने मिलकर देश के लिए एकता का परिचय दिया। साथ ही यह पैगाम दिया कि भारत का हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और तमाम धर्म और जाति के लोग हैं एक हैं। 

उन्होंने कहा कि अगर कोई नापाक इरादों से देवबंद से कोई ऐसा पैगाम देना चाहेगा जिसकी मिसाल अंग्रेजी हुकूमत से दी जा सके तो उसके इन इरादों को देश विशेषकर देवबंद की जनता कामयाब नहीं होने देगी। देवबंद में दारुल उलूम का वजूद और श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी सिद्धपीठ पर लगने वाला ऐतिहासिक मेला इसका जीता जागता सबूत है। साथ ही कहा कि वो लोग जो सत्ता में बैठे हैं डिजिटल इंडिया, मेकिंग इंडिया, स्किल इंडिया और स्टारअप इंडिया के नारे देकर सत्ता में आए और अब विफलता को छुपाने के लिए इस तरह के मुद्दे लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। ताकि जनता उनसे सवाल न पूछ बैठे।

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