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पूंछ में बलिदान...डेढ़ साल पहले अग्निवीर सैनिक पद पर भर्ती हुआ था ललित

Sat, 26 Jul 2025 01:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:57 AM IST
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Sacrifice in the tail...Lalit was recruited as an Agniveer soldier one and a half years ago
बलास्ट हादसा....ललित फाइल फोटो। - फोटो : mrt
जानी खुर्द (मेरठ)। बारूदी सुरंग में धमाके के हादसे में जानी ब्लॉक के गांव पस्तरा निवासी अग्निवीर सैनिक ललित कुमार के बलिदान से पूरे गांव में शोक है। अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए डेढ़ साल पहले ही ललित अग्निवीर सैनिक पद पर भर्ती हुआ था। सबसे छोटा होने के बावजूद वही परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था। वह भाइयों और बहनों को पढ़ना चाहता था। इसके बाद भाइयों की शादी करना चाहता था। उसके बलिदान से परिवार का हर सपना टूट गया। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने का लोग पहुंचते रहे। हर कोई अब ललित के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहा है।
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मेरठ जिले के अंतिम छोर के गांव पस्तरा निवासी राजपाल का सबसे छोटा बेटा ललित कुमार (20) शुक्रवार दोपहर जम्मू के पुंछ में बारूदी सुरंग फटने से बलिदान हो गया। उसकी जम्मू के पुंछ में पहली पोस्टिंग थी। राजपाल के तीन पुत्रों और एक पुत्री में ललित कुमार चौथे नंबर का सबसे छोटा था। परिजनों ने बताया कि दोपहर दो बजे उसकी रेजिमेंट से मोबाइल कॉल आई थी। इसमें बताया गया कि लैंड माइंस फटने से ललित घायल हो गया। उसकी हालत खराब है। पिता राजपाल के अनुसार सेना के अधिकारियों ने बताया कि नायब सूबेदार हरिराम, हवलदार गजेंद्र सिंह और सैनिक ललित कुमार अपनी चौकी के पास नियमित गश्त कर रहे थे। इसी दौरान हादसा हुआ।
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घटना में नायब सूबेदार हरिराम, हवलदार गजेंद्र सिंह और ललित कुमार घायल हो गए। बाद में बताया गया कि उपचार के दौरान ललित का बलिदान हो गया। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। हर कोई एक-दूसरे से लिपटकर बिलख पड़ा। पिता राजपाल मजदूरी करते हैं। ललित कुमार से बड़े उसके दो भाई कुलदीप और नितिन और एक बहन काजल है। वे अभी अविवाहित हैं। नितिन पढ़ रहा है। ललित बहन के बाद दोनों भाइयों की भी शादी जल्द कराना चाहता था। बेटे के बलिदान होने पर मां सरोज गश खाकर गिरकर अचेत हो गई। होश आने पर बेटे को याद कर बिलख पड़ी। मां और बहन को बिलखते देख कर औरों की आंखें नम हो गई।
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नौ जुलाई को ही छुट्टी से ड्यूटी पर गया था
ललित कुमार 17 दिन पहले ही नौ जुलाई को 15 दिन की छुट्टी काटकर ड्यूटी पर गया था। परिवार के हर सदस्य ने बड़ी खुशी से विदाई दी थी। परिजन उसे मेरठ ट्रेन तक छोड़ने आए थे। ललित ने कहा था कि कई काम करने हैं, इसलिए वह जल्दी ही फिर छुट्टी लेकर गांव आएगा, मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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