बड़ा झटका: यूक्रेन में जंग से खेल, दवा और टायर कारोबार पर संकट, 20 फीसदी तक गिरा कारोबार
कोरोना से लगातार प्रभावित चल रहा निर्यात अब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मची उथल-पुथल का शिकार हो गया है।
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बैंकों का हवाला देते हुए चैंबर मेंबर्स ने भी निर्यातकों को भुगतान संबंधी जोखिम के प्रति सतर्क किया है। आईआईए और वेस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स के काउंसिल सदस्य राजेंद्र सिंह ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश से सालाना औसतन 50 करोड़ से अधिक का कारोबार रूस और यूक्रेन के साथ होता है। अब माल होल्ड पर है।
कुछ उद्यमियों की भुगतान भी रुक गया है। मुरादनगर वीके टायर के संचालक संजय खुराना ने बताया कि वह रूस और यूक्रेन दोनों देशों के साथ व्यापार करते हैं। युद्ध के कारण निर्यात सीधा सीधा प्रभावित हुआ है।
इंडियन हर्बस एंड स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड के एक्सपोर्ट हेड आरए मैनन ने बताया कि पहले कोविड के चलते एक्सपोर्ट काफी प्रभावित रहा है। अब रूस और यूक्रेन युद्ध भी एक्सपोर्ट को प्रभावित कर रहा है।
क्रेडिट लेटर का भी संकट
उद्यमियों की मानें यूक्रेन और रूस में लेटर ऑफ क्रेडिट या साख पत्र को लेकर भी समस्या आएगी। आईआईए के काउंसिल मेंबर राजेंद्र सिंह ने बताया अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करने में लेटर ऑफ क्रेडिट का प्रयोग होता है। बैंक इस साख पत्र को जारी करता है। बैंकों ने रूस और बेलारूस में भुगतान संबंधी एडवाइजरी जारी की है। नाटो देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का भी कुछ विदेशी बैंकों पर असर पड़ सकता है।
कंटेनर की उपलब्धता भी बड़ी समस्या
अभी इंग्लैंड से लौटा हूं। यूरोपियन देशों के एक्सपोर्ट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। हमारे स्पोर्ट्स उद्योग में रूस और यूक्रेन युद्ध से 2 से 3 प्रतिशत का प्रभाव पड़ा है। कंटेनर की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है। -राकेश कोहली, स्टैग इंटरनेशनल, मेरठ।
यूक्रेन से भुगतान रुका
निर्यातकों के सामने बड़ी समस्या है। यूक्रेन में कुछ पेमेंट भी रुकी हुई है। अमेरिका और नाटो देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया है। इसका भी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री पर प्रभाव पड़ेगा। -सचिन उपाध्याय, भल्ला इंटरनेशनल।
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संकट: निर्यात पर असर से ट्रांसपोटरों को हो रहा घाटा
कोरोना से लगातार प्रभावित चल रहा ट्रांसपोर्ट कोरोबार अब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मची उथल-पुथल का शिकार हो गया है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कोरोना के चलते पिछले दो साल से कारोबार बीस फीसदी तक घट गया है। इसके चलते कर्मचारियों को वेतन देने और गाड़ियों की किस्त देने में भी दिक्कत हो रही है।
अब यूक्रेन-रूस युद्ध से भी संकट बढ़ गया है। मालभाड़े से रोजाना होने वाली करीब पांच करोड़ रुपये की आय घटकर चार करोड़ तक पहुंच गई है। मेरठ से खेल का सामान, कैंची, कपड़ा, बैंड-बाजा, ट्रांसफार्मर आदि देश के बड़े महानगरों मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, अहमदाबाद, जम्मू और कश्मीर, शिमला, हैदराबाद, बंगलुरु, जोधपुर, चंड़ीगढ़, लुधियाना आदि सड़क मार्ग द्वारा भेजा जाता है।
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा ने बताया कि कोरोना के समय से ही ट्रांसपोर्ट कारोबार को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। शर्मा ने बताया कि पहले मेरठ से हर रोज करीब पांच हजार गाड़ी देश भर के राज्यों में मेरठ से सामान लेकर जाती है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार को करीब पांच करोड़ रुपये रोजाना की आमदनी होती थी। लेकिन कोरोना के समय से ही ट्रांसपोर्ट कारोबार की कमर टूटी पड़ी है।
अब यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद पूरे विश्व में मची उथल-पुथल का भी असर झेलना पड़ेगा। एक करोड़ रुपये रोजाना की कमी आने ट्रांसपोर्टर को अपने स्टाफ को वेतन देने और ट्रकों की किस्त देने में भारी दिक्कत आ रही है। गौरव शर्मा ने बताया कि सरकार ने कोरोना काल में बंद रही गाड़ियों पर टैक्स की राहत भी नहीं दी। जिन ट्रांसपोर्टरों ने टैक्स जमा नहीं किया था उन पर पेनाल्टी लगाई जा रही है।