क्रांतिधरा पर मोहन भागवत बोले- हर समुदाय को RSS से जुड़ने की जरूरत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्रांतिधरा मेरठ में रविवार को विशाल 'राष्ट्रोदय' समागम को संबोधित करते हुए आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हर हिंदू मेरा अपना भाई है। भागवत ने कहा समाज के उत्थान के लिए और उसके विकास के लिए हर समुदाय के लोगों को स्वयंसेवक बनने की जरूरत है।
मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन में आयोजित संघ के आज तक के सबसे बड़े स्वयंसेवक समागम ‘राष्ट्रोदय’ में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए डा. भागवत ने कहा कि एक भाषा और एक पूजा पद्धति होने से देश विकास नहीं कर सकता। बल्कि विविधता को एकता के सूत्र में पिरोकर ही देश आगे बढ़ सकता है। ऐसे में सबको जोड़ने, ऊपर उठाने, संतुलन बनाने वाले इस हिंदू धर्म को एकजुटता के साथ आगे बढ़ाना है। लेकिन हमें सतर्क भी रहना है, क्योंकि विघटनकारी ताकतों की नजर हम पर है। ऐसे में हमें इन ताकतों को दरकिनार कर अपनी एकजुटता को मजबूत करते हुए राष्ट्र को विश्वगुरु बनाने की तरफ अग्रसर होना है।
रास्ता केवल भारत के पास
उन्होंने कहा कि संपूर्ण दुनिया प्रयोग कर चुकी है। इन प्रयोगों ने सिर्फ सुविधाएं तो दी। लेकिन सुख, शांति नहीं दी। आज विश्व सोचता है कि इसका रास्ता सिर्फ भारत के पास है, जो मनुष्य को श्रेष्ठ की तरफ बढ़ाने वाला रास्ता देता है। यह प्रयास देश के सब लोगों को मिलकर करना है।
पढ़ें : RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने 35 मिनट के संबोधन में इस संदेश पर दिया जोर, तस्वीरें
राष्ट्रोदय का मतलब उत्थान
डॉ. भागवत ने कहा कि इस कार्यक्रम का नाम राष्ट्रोदय रखा गया है। लेकिन यहां पर राष्ट्र के उदय से नहीं बल्कि उत्थान से हमारा मतलब है। क्योंकि उदय और अस्त होते रहते हैं। रोम अस्तित्व में आया, अपनी शक्ति के कारण, यूनान अस्तित्व में आया सुंदरता के कारण और फ्रांस अस्तित्व में आया कलह के कारण। लेकिन सभी का अस्त हो गया। इनके प्रयोजन पूरे हुए और अस्त हो गया। लेकिन हमारा प्रयोजन वह है जिससे जीवन चलता है। यही कारण है कि हमारा राष्ट्र अमर है और अमर रहेगा। उन्होंने कहा कि सूर्य कभी अस्त नहीं होता, सिर्फ पृथ्वी चक्कर लगाते हुए उसकी तरफ से मुंह मोड़ लेती है, जबकि सूर्य स्थिर रहता है। ऐसे ही हमारा राष्ट्र स्थिर है। इसलिए उदय या अस्त का प्रश्न ही नहीं है। हमें राष्ट्र उन्मुख की तरफ बढ़ना है।
हम करते हैं उस संस्कृति का अनुसरण
सरसंघ चालक ने कहा कि अलग-अलग पूजा, खानपान, भाषा, वेशभूषा है। ये दिखता अलग है। लेकिन अंदर का सत्य एक है। विविधता सिर्फ परिस्थिति के अनुसार बदलती है। पूर्ण सामर्थ को महसूस कर एकता की बात करो। हम सब मिलकर विविधता का उत्साह मनाते हैं। भोग का पीछा कर जीवन बिताना पशु जीवन है। उन्होंने राम के जीवन के कई उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति ऐसी है जो राम के आठ हजार साल पुराने काल से चली आ रही है। हम आज भी उसका अनुसरण कर रहे हैं।
हिंदुत्व और कट्टर, सही है
हिंदुत्व को कुछ लोग कट्टर कहते हैं, यह सही है। क्योंकि हमारी उदारता, अहिंसा का कट्टरपन यह हिंदुत्व है, जो धर्म नहीं बल्कि हमारी संस्कृति है। दुनिया का व्यावहारिक नियम है कि अच्छी बातें तब मानती हैं, जब उसके पीछे कोई शक्ति हो और डंडा हो। देवता भी दुर्बल की बलि लेते हैं और उसका सम्मान नहीं करते। इसलिए दुर्बल मत बनों। मनुष्य वह है जो दुर्बल की सेवा करे। बल का उपयोग दुर्बल की रक्षा करने में करें। यही धर्म हम सबका है, यही हम कहते हैं। इसलिए दुनिया जिसे हिंदू धर्म कहती है, वह यही है। उन्होंने हनुमान को शक्ति याद दिलाने की कथा सुनाते हुए कहा कि हमें अपनी शक्ति पहचाननी होगी। संपूर्ण दुनिया को समय-समय पर धर्म देने वाला हमारा देश है। ऐसा कौन सा काम है जो हम नहीं कर सकते हैं। इसलिए गर्व से कहो कि हम हिंदू हैं और हिंदू हैं तो हम एक हैं। हम कट्टर होंगे तो विविधताओं का समन्वय बेहतर कर सकेंगे। हम हिंदुओं को एक करेंगे, यह हमारा देश है और हम कहीं नहीं जा सकते हैं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/