सामुदायिक किचन में मिले सड़े आलू, सुपरवाइजर निलंबित, सूचना पर पहुंचे अधिकारी, सीडीओ ने टीम गठित कर दिए जांच के आदेश
डीएम अनिल ढींगरा ने जांच के निर्देश दिए थे।
लॉकडाउन के चलते एमडीए अधिकारियों ने गुरुवार से गंगानगर में एमडीए के सामुदायिक हॉल में गरीबों के लिए खाना बनवाने का काम शुरू कराया था। यहां रोज एक हजार से ज्यादा लोगों का खाना बनाकर क्षेत्र में बांटा जा रहा है। दोपहर दो बजे एमडीए वीसी राजेश पांडे, एसडीएम संजीव श्रीवास्तव, पीडी भानू प्रताप, एडीएम सिटी अजय तिवारी, एमडीए सचिव प्रवीण अग्रवाल ने कम्युनिटी
हॉल पहुंचकर खाने की जांच की। खाने सैंपल जांच के लिए भेजे।
बाद में पहुंची सीडीओ ईशा दुहन ने जांचकर ठेकेदार से पूछताछ की। ठेकेदार ने बताया कि आलू की बोरी में कुछ सड़े आलू निकले थे, लेकिन खाने में केवल सही आलू प्रयोग किए गए हैं। वहीं, ठेकेदार ने अधिकारियों के आने की सूचना मिलते ही खराब आलुओं को बोरे में भरकर बाहर भिजवा दिया। इसकी वहां मौजूद लोगों ने वीडियो बना ली।
ट्विटर पर पोस्ट हुई थी वीडियो
शुक्रवार को मेरठ निवासी डॉ. संदीप पहल ने ठेकेदार पर खाने में सड़े आलू उपयोग करने का आरोप लगा ट्विटर पर फोटो अपलोड किए। इसमें एक कर्मचारी खराब आलू काटते हुए दिख रहा है। ट्विटर पोस्ट पीएमओ व सीएमओ ऑफिस को टैग की गई। वहीं मामले की जानकारी के बाद सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने सीडीओ से सख्त कार्रवाई करने की बात कही।
लापरवाही के मामले में एमडीए के सुपरवाइजर को निलंबित कर दिया गया है। जांच समिति बना दी गई है। कुछ बोरियों में सड़े आलू थे, लेकिन उन आलू को अलग नही रखा गया था। ये खाना बनाने वाले स्थान पर रखे थे। - ईशा दुहन, नोडल अधिकारी/ सीडीओ
ठेकेदार है एक जनप्रतिनिधि का खास
एमडीए द्वारा संचालित रसोई का ठेकेदार एक जनप्रतिनिधि का खास है। इसको लेकर दिन भर शहर में चर्चा रही। मामले में प्रशासनिक अधिकारियों ने एमडीए कर्मचारी को निलंबित कर दिया। वहीं दोषी ठेकेदार को चेतावनी देकर छोड़ दिया। उसका ठेका निरस्त नहीं किया।
एक रसोई की निगरानी के लिए दस कर्मचारी
गंगानगर में सामुदायिक किचन में सड़े आलू मिलने के मामले के बाद प्रशासन ने रसोई की निगरानी के लिए दो शिफ्टों में दस कर्मचारियों को तैनात किया है। अधिशाषी अभियंता अरुण कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
हालांकि, पहले भी सेक्टर मजिस्ट्रेट, फूड सेफ्टी अधिकारी तैनात थे। इसके बाद भी खामियां मिलने पर अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई। जबकि सामुदायिक किचन में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री भी निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद भी लापरवाही सामने आ रही है।