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क्राइम पेट्रोल देखकर डाली डकैती, सीखा बचने का तरीका
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मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सराफ पवन जिंदल की ज्वेलरी शॉप में 17 दिसंबर 2019 को हुई डकैती की वारदात का खुलासा करने में पुलिस को एक महीना लग गया। बदमाश पुलिस से चार कदम आगे चल रहे थे। पेशेवर अपराधी न होने के बावजूद फूलप्रूफ प्लानिंग कर डकैती की वारदात की और पुलिस को खूब छकाया। बदमाशों ने बताया कि उन्होंने क्राइम पेट्रोल सीरियल देखकर डकैती डाली थी और पुलिस से बचने का तरीका भी सीखा था।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का सरगना अक्षय उर्फ विक्की पंडित है, जो दिल्ली में क्रिकेट मैच में सट्टा खेलता था। अक्षय पर 26 लाख रुपये का कर्जा चढ़ गया था। जिसके चलते उसने मेरठ में सराफा की किसी दुकान पर लूट या डकैती की बड़ी वारदात को अंजाम देकर सारा कर्जा उतारने की प्लानिंग बनानी शुरू की थी। वह इसलिए क्योंकि अक्षय शहर सराफा बाजार में करीब पांच साल तक कारीगर का काम कर चुका था। प्लानिंग को सिरे चढ़ाने के लिए अक्षय ने छह माह से क्राइम पेट्रोल सीरियल देखना शुरू किया था। अक्षय ने अपनी प्लानिंग में रांझा, मधुर, सचिन, शुभम और सूरज को शामिल किया।
उसने तीन दोस्तों से मेरठ में सराफ की दुकान की रेकी करानी शुरू करा दी थी। प्लानिंग के तहत वारदात के दौरान मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं किया था। डकैती की वारदात के बाद पुलिस के बचने के लिए अक्षय ने बाइक और स्कूटी को मेरठ में ही छोड़ दिया था और साथी बदमाशों के साथ दूसरे वाहनों से दिल्ली के लिए निकल गया था। जबकि पुलिस लोकल बदमाशों की कुंडली खंगालने में जुटी रही। लेकिन कुछ नहीं मिला। पुलिस की सर्विलांस टीम भी बदमाशों का पता नहीं लगा सकी।
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300 सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए बदमाशों
पुलिस के अनुसार बदमाश दिल्ली के थे और घटना में उन्होंने मोबाइल भी प्रयोग नहीं किया था। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में बदमाश कई जगह दिखाई दिए। बिजली बंबा बाईपास स्थित जुर्रानपुर फाटक के पास बाइक लावारिस हालत में मिली। जहां पुलिस का नेटवर्क टूट गया था। सराफ पवन जिंदल की ज्वेलरी शॉप के पास वाली सराफा की दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे में बदमाश कैद हो गए थे। उसी फुटेज के आधार पर पुलिस ने बदमाशों की तलाश की। मेरठ से दिल्ली तक पुलिस ने एक माह में करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी, जिनमें बदमाशों की पुख्ता पहचान हुई।
छह माह की ज्वेलरी शॉप की रेकी
बदमाशों ने छह माह तक ज्वेलरी शॉप की रेकी की। अक्षय ने सचिन को पांच हजार रुपये देकर ज्वेलरी शॉप पर अंगूठी खरीदने के लिये भेजा था। तीन दिन बाद फिर आर्डर कैंसिल कर पांच हजार रुपये वापस ले आया था। इस बहाने दो बार दुकान के अंदर का नजारा देखा। आरोपी कई बार रेकी करने के लिये शास्त्रीनगर गए। दुकान पर गार्ड नहीं था। कैमरे लगे हैं, इसकी जानकारी बदमाशों को थी। कैमरे की डीबीआर ले जाएंगे। इसकी पहले से प्लानिंग थी।
शुभम, रांझा, मधुर बाइक से पहुंचे
17 दिसंबर यानी वारदात वाले दिन सुबह बदमाश शुभम, रांझा और मधुर बाइक से दिल्ली से मेरठ पहुंचे। अक्षय अपने दोस्त सूरज और सचिन के साथ रोडवेज बस से मेरठ पहुंचा। सभी आरोपी पीवीएस मॉल पर जमा हुए। जहां से शुभम, रांझा, मधुर बाइक पर और अक्षय, सूरज और सचिन स्कूटी से शास्त्रीनगर में पहुंचे। अक्षय और सूरज एक्टिवा खड़ी करके ज्वेलरी शॉप के सामने खड़े थे और सचिन पीवीएस मॉल पर पहुंच गया था। वारदात के बाद बाइक और स्कूटी से सभी बदमाश अलग-अलग दिशा में निकल गए थे।
हुलिया बदलकर भागते रहे बदमाश
बदमाशों की तलाश करते-करते पुलिस 15 दिन बाद शाहदरा दिल्ली में पहुंच गई थी। इसकी जानकारी लगते ही बदमाशों ने अपना हुलिया बदल लिया था। उसके बाद दिल्ली ही छोड़ दी थी। बदमाश देहरादून, जम्मू, विजयवाड़ा, जयपुर, बंगलूरू, अमृतसर, शिमला, चंडीगढ़, करनाल में छिपते रहे थे। पुलिस सर्विलांस की लोकेशन से जहां भी पहुंचती थी, उससे पहले ही बदमाश वहां से निकल जाते थे।
ऐसे चढ़े हत्थे
पुलिस के अनुसार बदमाश हत्थे नहीं चढ़ रहे थे और शहर के व्यापारियों में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के परिजनों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ करनी शुरू की तो सभी आरोपी एक-एक कर खुद ही पुलिस के पास पहुंचने लगे थे। जबकि एक आरोपी शुभम ने दिल्ली में ही सरेंडर कर दिया था।
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पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का सरगना अक्षय उर्फ विक्की पंडित है, जो दिल्ली में क्रिकेट मैच में सट्टा खेलता था। अक्षय पर 26 लाख रुपये का कर्जा चढ़ गया था। जिसके चलते उसने मेरठ में सराफा की किसी दुकान पर लूट या डकैती की बड़ी वारदात को अंजाम देकर सारा कर्जा उतारने की प्लानिंग बनानी शुरू की थी। वह इसलिए क्योंकि अक्षय शहर सराफा बाजार में करीब पांच साल तक कारीगर का काम कर चुका था। प्लानिंग को सिरे चढ़ाने के लिए अक्षय ने छह माह से क्राइम पेट्रोल सीरियल देखना शुरू किया था। अक्षय ने अपनी प्लानिंग में रांझा, मधुर, सचिन, शुभम और सूरज को शामिल किया।
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उसने तीन दोस्तों से मेरठ में सराफ की दुकान की रेकी करानी शुरू करा दी थी। प्लानिंग के तहत वारदात के दौरान मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं किया था। डकैती की वारदात के बाद पुलिस के बचने के लिए अक्षय ने बाइक और स्कूटी को मेरठ में ही छोड़ दिया था और साथी बदमाशों के साथ दूसरे वाहनों से दिल्ली के लिए निकल गया था। जबकि पुलिस लोकल बदमाशों की कुंडली खंगालने में जुटी रही। लेकिन कुछ नहीं मिला। पुलिस की सर्विलांस टीम भी बदमाशों का पता नहीं लगा सकी।
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300 सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए बदमाशों
पुलिस के अनुसार बदमाश दिल्ली के थे और घटना में उन्होंने मोबाइल भी प्रयोग नहीं किया था। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में बदमाश कई जगह दिखाई दिए। बिजली बंबा बाईपास स्थित जुर्रानपुर फाटक के पास बाइक लावारिस हालत में मिली। जहां पुलिस का नेटवर्क टूट गया था। सराफ पवन जिंदल की ज्वेलरी शॉप के पास वाली सराफा की दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे में बदमाश कैद हो गए थे। उसी फुटेज के आधार पर पुलिस ने बदमाशों की तलाश की। मेरठ से दिल्ली तक पुलिस ने एक माह में करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी, जिनमें बदमाशों की पुख्ता पहचान हुई।
छह माह की ज्वेलरी शॉप की रेकी
बदमाशों ने छह माह तक ज्वेलरी शॉप की रेकी की। अक्षय ने सचिन को पांच हजार रुपये देकर ज्वेलरी शॉप पर अंगूठी खरीदने के लिये भेजा था। तीन दिन बाद फिर आर्डर कैंसिल कर पांच हजार रुपये वापस ले आया था। इस बहाने दो बार दुकान के अंदर का नजारा देखा। आरोपी कई बार रेकी करने के लिये शास्त्रीनगर गए। दुकान पर गार्ड नहीं था। कैमरे लगे हैं, इसकी जानकारी बदमाशों को थी। कैमरे की डीबीआर ले जाएंगे। इसकी पहले से प्लानिंग थी।
शुभम, रांझा, मधुर बाइक से पहुंचे
17 दिसंबर यानी वारदात वाले दिन सुबह बदमाश शुभम, रांझा और मधुर बाइक से दिल्ली से मेरठ पहुंचे। अक्षय अपने दोस्त सूरज और सचिन के साथ रोडवेज बस से मेरठ पहुंचा। सभी आरोपी पीवीएस मॉल पर जमा हुए। जहां से शुभम, रांझा, मधुर बाइक पर और अक्षय, सूरज और सचिन स्कूटी से शास्त्रीनगर में पहुंचे। अक्षय और सूरज एक्टिवा खड़ी करके ज्वेलरी शॉप के सामने खड़े थे और सचिन पीवीएस मॉल पर पहुंच गया था। वारदात के बाद बाइक और स्कूटी से सभी बदमाश अलग-अलग दिशा में निकल गए थे।
हुलिया बदलकर भागते रहे बदमाश
बदमाशों की तलाश करते-करते पुलिस 15 दिन बाद शाहदरा दिल्ली में पहुंच गई थी। इसकी जानकारी लगते ही बदमाशों ने अपना हुलिया बदल लिया था। उसके बाद दिल्ली ही छोड़ दी थी। बदमाश देहरादून, जम्मू, विजयवाड़ा, जयपुर, बंगलूरू, अमृतसर, शिमला, चंडीगढ़, करनाल में छिपते रहे थे। पुलिस सर्विलांस की लोकेशन से जहां भी पहुंचती थी, उससे पहले ही बदमाश वहां से निकल जाते थे।
ऐसे चढ़े हत्थे
पुलिस के अनुसार बदमाश हत्थे नहीं चढ़ रहे थे और शहर के व्यापारियों में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के परिजनों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ करनी शुरू की तो सभी आरोपी एक-एक कर खुद ही पुलिस के पास पहुंचने लगे थे। जबकि एक आरोपी शुभम ने दिल्ली में ही सरेंडर कर दिया था।