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गर्मी से ब्रेन हैमरेज का खतरा: एसी से धूप और धूप से एसी में जाने की लापरवाही से लगातार बढ़ रहे ऐसे मरीज

Tue, 21 May 2024 11:48 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 21 May 2024 11:48 AM IST
सार

ब्रेन हैमरेज का खतरा अब गर्मियों में भी देखने को मिल रहा है। हालांकि सर्दियों में ब्रेन हैमरेज के मरीज ज्यादा देखने को मिलते हैं। चिकित्सक गर्मी में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

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Risk of brain haemorrhage due to heat: Patients are continuously increasing due to carelessness
यूपी में गर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आमतौर पर ब्रेन हैमरेज के मामले ज्यादातर सर्दियों में देखने को मिलते हैं, लेकिन गर्मियों में भी इसके मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इससे डॉक्टर अलर्ट हो गए हैं। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में पिछले पांच दिन में इस प्रकार के आठ मरीज आए हैं। इनका उपचार चल रहा है। 

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मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. धीरज बालियान ने बताया कि गर्मियों में यह मामले चौंकाने वाले हैं। इसका सबसे बड़ा कारण अचानक से तापमान में बदलाव  हो सकता   है। लोग एक साथ एसी से धूप और धूप से एसी में आते-जाते हैं। इससे खतरा बढ़ रहा है।

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डॉ. बालियान ने बताया कि मरीजों में यह देखा जा रहा है कि उनकी उम्र 40 से 60 साल के बीच है। साथ ही उन्हें बीपी और शुगर की बीमारी है। यह लोग बीपी की नियमित दवाई नहीं ले रहे थे। इस वजह से बीपी और शुगर लगातार बढ़ा हुआ रहता है। ऐसे में अगर मरीज अचानक ठंड से गर्मी या गर्मी से ठंड में जाते हैं, तो ब्रेन हैमरेज की आशंका बढ़ जाती है। 

जिला अस्पताल प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र ने बताया कि एसी से तुरंत धूप में न जाएं या फिर धूप से तुरंत एसी वाली जगह न बैठें। ऐसा करने से पहले एसी को कम कर दें, ताकि शरीर का तापमान बाहर के तापमान के बराबर आ जाए।

आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुब्रतो सेन ने बताया कि भीषण गर्मी में वात, पित्त, कफ के असंतुलित होने के कारण उच्च रक्तचाप, हृदय, मधुमेह आदि रोगों से ग्रस्त लोग चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, घबराहट, थकान आदि समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बीमारी बढ़ने पर ब्रेन हेमरेज, हार्ट अटैक जैसी घातक बीमारी का भी सामना करना पड़ सकता है। लो ब्लड प्रेशर की समस्या बहुत अधिक बढ़ गई है।

ब्रेन हैमरेज के लक्षण
शरीर के एक हिस्से में अंतर दिखना।
चेहरे, हाथ-पैरों का सुन्न होना।
किसी बात को बोलने में दिक्कत होना, दृष्टि में समस्या, सिर दर्द।
उल्टी व मतली होना, शरीर में अकड़न होना।

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अस्पतालों में मरीजों की संख्या हुई दोगुना 
डॉ. कौशलेंद्र ने बताया कि जिला अस्पताल में आम दिनों में 1 हजार से 1200 के आसपास ओपीडी होती थी। अब मरीजों की संख्या बढ़कर 1800 से 2000 के आसपास पहुंच रही हैं। आईएमए मेरठ अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज, प्राइवेट अस्पतालों के साथ निजी चिकित्सकों के पास भी मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। ऐसे में आंकड़ा 5000 के पार पहुंच गया है।

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