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Meerut News: अक्षय तृतीया पर ऋषभदेव का प्रथम आहार दिवस मनाया
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मेरठ। शहर में जैन समाज ने अक्षय तृतीया पर्व उत्साह के साथ मनाया। मंदिरों में पूजन और अन्य अनुष्ठान हुए। भगवान ऋषभदेव को स्मरण किया गया। इस अवसर बाजारों में गन्ने के रस का वितरण भी किया गया।
कचहरी रोड स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में कार्यक्रम हुआ। रमेश चंद्र जैन बताया कि यह दिन विशेष रूप से भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की पहली आहार ग्रहण घटना की स्मृति में मनाया जाता है। तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने कठिन तपस्या के बाद अन्न, जल ग्रहण करने का निर्णय लिया। उस समय लोगों को संन्यासी को आहार देने की विधि का ज्ञान नहीं था। इसलिए कोई उन्हें यथायोग्य आहार नहीं दे सका। अंततः अयोध्या के राजा श्रेयांस कुमार को अपने पूर्व जन्म के ज्ञान (जातिस्मरण) से यह विधि ज्ञात हुई। उन्होंने ऋषभदेव को इक्षु रस (गन्ने का रस) अर्पित किया।
कार्यक्रम में बच्चों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कविता जैन ने बच्चों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर संजय जैन, राजीव राय जैन, कंचन जैन आदि लोगों का सहयोग रहा। मंदिर में राजीव जैन परिवार ने गन्ने के रस का वितरण किया। इस अवसर पर साहिल जैन, प्रतीक जैन, मनोज जैन, लकी जैन, सौम्य जैन रहे।
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साकेत स्थित जैन मंदिर में गन्ने के रस का वितरण किया गया। साकेत जैन समाज के प्रेस प्रवक्ता एडवोकेट विनीत जैन ने बताया कि अक्षय तृतीया का जैन धर्म में विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने उपवास के बाद हस्तिनापुर में गन्ने के रस के रूप में आहार प्राप्त हुआ था। तभी से इस दिन को अक्षय तृतीया के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिर कमेटी उपाध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि मंदिर में योगेंद्र परिवार और जैन मंदिर कमेटी ने दो स्टॉल लगाए गए। कार्यक्रम में अर्चना जैन, शालु जैन, अनु जैन, पारुल जैन, नेहा जैन, कामिनी जैन, अनीता जैन और संगीता जैन रहीं।
बच्चों ने को अक्षय तृतीया का महत्व बताया
मेरठ। विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ की ओर से महावीर जयंती भवन में प्रशिक्षण एवं संस्कार शिविर का आयोजन सौरभ जैन के संयोजन में किया गया। शिविर में 75 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। बच्चों को अक्षय तृतीया का महत्व बताया गया। सौरभ जैन सराफ ने बताया कि यह दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक घटना के कारण विशेष महत्व रखता है। कार्यक्रम में देवेंद्र जैन, अतुल जैन और गौरव जैन ने प्रक्षाल क्रियाएं सम्पन्न कराईं। इस अवसर पर राहुल जैन, वैभव जैन, सम्यक जैन व अमन जैन ने पूजन विधि कराई।
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कचहरी रोड स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में कार्यक्रम हुआ। रमेश चंद्र जैन बताया कि यह दिन विशेष रूप से भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की पहली आहार ग्रहण घटना की स्मृति में मनाया जाता है। तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने कठिन तपस्या के बाद अन्न, जल ग्रहण करने का निर्णय लिया। उस समय लोगों को संन्यासी को आहार देने की विधि का ज्ञान नहीं था। इसलिए कोई उन्हें यथायोग्य आहार नहीं दे सका। अंततः अयोध्या के राजा श्रेयांस कुमार को अपने पूर्व जन्म के ज्ञान (जातिस्मरण) से यह विधि ज्ञात हुई। उन्होंने ऋषभदेव को इक्षु रस (गन्ने का रस) अर्पित किया।
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कार्यक्रम में बच्चों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कविता जैन ने बच्चों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर संजय जैन, राजीव राय जैन, कंचन जैन आदि लोगों का सहयोग रहा। मंदिर में राजीव जैन परिवार ने गन्ने के रस का वितरण किया। इस अवसर पर साहिल जैन, प्रतीक जैन, मनोज जैन, लकी जैन, सौम्य जैन रहे।
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साकेत स्थित जैन मंदिर में गन्ने के रस का वितरण किया गया। साकेत जैन समाज के प्रेस प्रवक्ता एडवोकेट विनीत जैन ने बताया कि अक्षय तृतीया का जैन धर्म में विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने उपवास के बाद हस्तिनापुर में गन्ने के रस के रूप में आहार प्राप्त हुआ था। तभी से इस दिन को अक्षय तृतीया के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिर कमेटी उपाध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि मंदिर में योगेंद्र परिवार और जैन मंदिर कमेटी ने दो स्टॉल लगाए गए। कार्यक्रम में अर्चना जैन, शालु जैन, अनु जैन, पारुल जैन, नेहा जैन, कामिनी जैन, अनीता जैन और संगीता जैन रहीं।
बच्चों ने को अक्षय तृतीया का महत्व बताया
मेरठ। विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ की ओर से महावीर जयंती भवन में प्रशिक्षण एवं संस्कार शिविर का आयोजन सौरभ जैन के संयोजन में किया गया। शिविर में 75 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। बच्चों को अक्षय तृतीया का महत्व बताया गया। सौरभ जैन सराफ ने बताया कि यह दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक घटना के कारण विशेष महत्व रखता है। कार्यक्रम में देवेंद्र जैन, अतुल जैन और गौरव जैन ने प्रक्षाल क्रियाएं सम्पन्न कराईं। इस अवसर पर राहुल जैन, वैभव जैन, सम्यक जैन व अमन जैन ने पूजन विधि कराई।