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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Revolution saga: 85 soldiers were imprisoned for 10 years, the decision of the court martial came on this day

क्रांति गाथा: 85 सिपाहियों को हुआ था 10 वर्ष कारावास, आज ही के दिन आया था कोर्ट मार्शल का निर्णय

Wed, 08 May 2024 03:10 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 08 May 2024 03:10 PM IST
सार

मेरठ में 1857 में आज ही के दिन कोर्ट मार्शल का निर्णय तीसरी रेजिमेंट को भेजा गया था। कुल 85 सिपाहियों को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।

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Revolution saga: 85 soldiers were imprisoned for 10 years, the decision of the court martial came on this day
1857 की क्रांति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में 8 मई 1857 के दिन कोर्ट मार्शल का निर्णय तीसरी रेजिमेंट को भेजा गया। सभी 85 सिपाहियों को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। कोर्ट मार्शल में सम्मिलित 15 देशी अधिकारियों में से 14 ने 85 सिपाहियों को दोषी माना और एक ने नहीं।

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इतिहासकार एके गांधी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह 14 देशी अधिकारी पूरी तरह अंग्रेज अधिकारियों के दबाव में थे। क्योंकि वह सभी रैंक में कनिष्ठ थे और सभी वरिष्ठ अधिकारी अंग्रेज थे।
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इतिहासकार एके गांधी ने बताया कि अंग्रेजों ने पूरी तरह से न्याय प्रक्रिया का मखौल उड़ाया। मेरठ गेजेटियर में है कि दोषी सिपाहियों ने अपने बचाव में कुछ नहीं कहा था। सत्य यह है सिपाहियों को बोलने का कोई अवसर नहीं दिया गया। 

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न्याय प्रक्रिया का मखौल इस प्रकार भी उड़ाया गया कि तीसरी रेजिमेंट के कमान अधिकारी ने 85 सिपाहियों में से 11 की सजा घटाकर 5 वर्ष कर दी। यह तर्क दिया कि वह 18 वर्ष से कम आयु के थे। एक कमान अधिकारी द्वारा कोर्ट मार्शल के निर्णय में परिवर्तन अधिकार अतिक्रमण के अतिरिक्त और कुछ नहीं हो सकता।

हिंदू फकीर के रूप में बाबा औघड़नाथ मंदिर में उपस्थित स्वामी दयानंद को भी शाम तक निर्णय ज्ञात हो गया। इतिहासकार एके गांधी ने बताया कि क्रांति की योजना बना रहे सभी लोग सिपाहियों को शांत देखकर गहन विचार में थे।

इस शांति के चलते कैसे क्रांति हो पाएगी। उन्हें आशा थी कि अगले दिन परेड ग्राउंड में सिपाहियों को सरेआम सजा दी जाएगी। जिसके बाद सिपाही भड़क जाएंगे। सभी लोग योजना बनाने में जुट गए। कई लोगों को स्पष्ट आदेश था कि उन्हें अपनी पहचान उजागर किए बिना ही क्रांति को भड़काना है।

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