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आरक्षण से उम्मीद: पश्चिमी यूपी की राजनीति में हाशिये पर आधी आबादी की भागीदारी, ये है लोकसभा में जिलों का हाल
Wed, 20 Sep 2023 03:31 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 20 Sep 2023 03:31 PM IST
सार
केंद्र सरकार द्वारा नारी उत्थान के लिए महिला आरक्षण में ऐतिहासिक बदलाव के बाद से सक्रिय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। पश्चिमी यूपी की राजनीति में महिलाएं सक्रिय रही हैं लेकिन उन्हें अभी वह मुकाम नहीं हासिल हुआ जिसकी वे हकदार हैं।
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महिला आरक्षण
विस्तार
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महिलाएं भले ही हर क्षेत्र में नित नए आयाम गढ़ रही हों, अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हों, लेकिन राजनीति में उन्हें वह मुकाम कभी नहीं मिला, जिसकी वे हकदार हैं। यहां से चंद महिलाएं ही सांसद और विधायक बन सकी हैं।
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अब संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में प्रावधान है कि लोकसभा, दिल्ली विधानसभा और सभी राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद से सक्रिय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
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साल 2022 के विधानसभा चुनाव में में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 58 सीटों पर भाजपा, कांग्रेस, बसपा और सपा-रालोद के 232 प्रत्याशियों में महिलाएं सिर्फ 28 थीं। तमाम दावों के बावजूद प्रमुख दलों ने टिकट वितरण में महिलाओं को सिर्फ 12 फीसदी ही हिस्सेदारी दी थी। कांग्रेस ने 15 प्रत्याशी उतारे थे, उनका प्रतिशत 25.90 था, भाजपा ने छह उतारे थे, उनका प्रतिशत 10.35 था।
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सपा-रालोद ने चार प्रत्याशी उतारे थे, उनका प्रतिशत 6.89 था और बसपा ने तीन प्रत्याशी उतारे थे, उनका प्रतिशत 5.17 था। इनमें से भाजपा के टिकट पर लड़ रहीं सिर्फ सात महिलाओं को जीत मिली थी। वहीं, मेरठ लोकसभा क्षेत्र से सिर्फ दो बार महिला सांसद मेरठ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
इस क्षेत्र में कांग्रेस ने पांच बार महिला को अपना प्रत्याशी बनाया। हालांकि बसपा, सपा और भाजपा ने कभी भी किसी महिला पर भरोसा नहीं जताया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी कई सीटें हैं जहां से अभी तक कोई महिला उम्मीदवार जीतकर संसद की चौखट तक नहीं पहुंच पाई हैं। आगरा, मुरादाबाद, अमरोहा, मुजफ्फरनगर आदि लोकसभा क्षेत्र से एक भी महिला सांसद नहीं बन पाई है।
इस क्षेत्र में कांग्रेस ने पांच बार महिला को अपना प्रत्याशी बनाया। हालांकि बसपा, सपा और भाजपा ने कभी भी किसी महिला पर भरोसा नहीं जताया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी कई सीटें हैं जहां से अभी तक कोई महिला उम्मीदवार जीतकर संसद की चौखट तक नहीं पहुंच पाई हैं। आगरा, मुरादाबाद, अमरोहा, मुजफ्फरनगर आदि लोकसभा क्षेत्र से एक भी महिला सांसद नहीं बन पाई है।
लोकसभा में जिलों का हाल...
मेरठ: वर्ष 1998 में कांग्रेस से मोहसिना किदवई और जनता दल से शाहीन परवेज महिला प्रत्याशी को मौका दिया था, लेकिन दोनों हार गईं। वर्ष 1980 में मेरठ लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने सबसे पहले महिला प्रत्याशी के रूप में मोहसिना किदवई को चुनाव मैदान में उतारा था। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी विजय पताका फहराई। उन्होंने जनता पार्टी के प्रत्याशी हरीश पाल को 57,217 मतों से हराया था। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें फिर मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने लोकदल के मंजूर अहमद को 96,518 वोटों से हरा दिया। दोनों बार लोकसभा में मेरठ का प्रतिनिधित्व महिला सांसद ने किया।
वर्ष 1984 के चुनाव में जनता पार्टी से अंबिका सोनी और निर्दलीय प्रत्याशी नाहिदा मालिक ने भी इस क्षेत्र से भाग्य आजमाया था। वर्ष 1989 के चुनाव में कांग्रेस से मोहसिना किदवई और निर्दलीय प्रत्याशी नाहिदा मलिक चुनावी समर में आमने-सामने थीं। दोनों महिला प्रत्याशी हार गई थीं। वर्ष 1998 में कांग्रेस से फिर मोहसिना किदवई, जनता दल से शाहीन परवीन समेत तीन महिलाएं चुनाव मैदान में थीं लेकिन तीनों हार गई थीं।
वर्ष 2004, 2009 में एक-एक महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में थी। 2014 में कांग्रेस ने फिर आधी आबादी पर विश्वास करते हुए सिने अभिनेत्री नगमा को चुनावी मैदान में उतार था। उन्हें 42,911 मत मिले थे और वह चौथे स्थान पर रहीं। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस, सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा, किसी ने भी महिला प्रत्याशी को चुनावी रणभूमि में नहीं उतारा।
मेरठ: वर्ष 1998 में कांग्रेस से मोहसिना किदवई और जनता दल से शाहीन परवेज महिला प्रत्याशी को मौका दिया था, लेकिन दोनों हार गईं। वर्ष 1980 में मेरठ लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने सबसे पहले महिला प्रत्याशी के रूप में मोहसिना किदवई को चुनाव मैदान में उतारा था। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी विजय पताका फहराई। उन्होंने जनता पार्टी के प्रत्याशी हरीश पाल को 57,217 मतों से हराया था। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें फिर मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने लोकदल के मंजूर अहमद को 96,518 वोटों से हरा दिया। दोनों बार लोकसभा में मेरठ का प्रतिनिधित्व महिला सांसद ने किया।
वर्ष 1984 के चुनाव में जनता पार्टी से अंबिका सोनी और निर्दलीय प्रत्याशी नाहिदा मालिक ने भी इस क्षेत्र से भाग्य आजमाया था। वर्ष 1989 के चुनाव में कांग्रेस से मोहसिना किदवई और निर्दलीय प्रत्याशी नाहिदा मलिक चुनावी समर में आमने-सामने थीं। दोनों महिला प्रत्याशी हार गई थीं। वर्ष 1998 में कांग्रेस से फिर मोहसिना किदवई, जनता दल से शाहीन परवीन समेत तीन महिलाएं चुनाव मैदान में थीं लेकिन तीनों हार गई थीं।
वर्ष 2004, 2009 में एक-एक महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में थी। 2014 में कांग्रेस ने फिर आधी आबादी पर विश्वास करते हुए सिने अभिनेत्री नगमा को चुनावी मैदान में उतार था। उन्हें 42,911 मत मिले थे और वह चौथे स्थान पर रहीं। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस, सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा, किसी ने भी महिला प्रत्याशी को चुनावी रणभूमि में नहीं उतारा।
मुरादाबाद: लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद सीट से किसी भी महिला को आज तक सांसद बनने का मौका नहीं मिल पाया है। हालांकि पार्टियों ने यहां से महिला प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया , लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हुई।
आगरा: पहली बार 1967 में जनसंघ ने एच. रानी को उतारा था, लेकिन वो हार गईं। इसके बाद 1984 में निर्दलीय सुमन ने चुनाव लड़ा, पर उन्हें महज 600 वोट ही मिले। 1996 में तीन महिला प्रत्याशी उतरीं, लेकिन किसी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय दल ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया।
अमरोहा: 1969 के विधानसभा चुनाव में भारतीय क्रांति दल के टिकट पर सौभाग्यवती के विधायक बनने के बाद यहां से किसी भी विस क्षेत्र से कोई महिला उम्मीदवार विधायक भी नहीं चुनी गईं।
आगरा: पहली बार 1967 में जनसंघ ने एच. रानी को उतारा था, लेकिन वो हार गईं। इसके बाद 1984 में निर्दलीय सुमन ने चुनाव लड़ा, पर उन्हें महज 600 वोट ही मिले। 1996 में तीन महिला प्रत्याशी उतरीं, लेकिन किसी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय दल ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया।
अमरोहा: 1969 के विधानसभा चुनाव में भारतीय क्रांति दल के टिकट पर सौभाग्यवती के विधायक बनने के बाद यहां से किसी भी विस क्षेत्र से कोई महिला उम्मीदवार विधायक भी नहीं चुनी गईं।
संभल: 1977 में बीएलडी प्रत्याशी और 1984 में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी शांति देवी ने यहां जीत दर्ज की थी। साल 1984 के लोकसभा चुनाव में महिला प्रत्याशी के रूप में शांति देवी एकमात्र उम्मीदवार थीं। 1996 के चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या दो रही। 1998 के चुनाव में महिला प्रत्याशियों की संख्या शून्य रही। 2004 में बीएसपी ने महिला प्रत्याशी उतारा। 2009 में महिला प्रत्याशियों की संख्या शून्य रही।
सहारनपुर-मुजफ्फरनगर-बागपत: वेस्ट यूपी की दो अहम मुजफ्फरनगर और सहारनपुर सीट पर भी आजादी के बाद आज तक कोई महिला सांसद नहीं चुनी गईं। कुछ ऐसा ही हाल बागपत संसदीय सीट का है जहां के लोगों ने आज तक किसी महिला को संसद में नहीं भेजा।
बिजनौर: 1985 में पहली बार मीरा कुमारी यहां से सांसद चुनी गईं। इसके बाद 1989 के चुनाव में बिजनौर के लोगों ने बीएसपी से मायावती को चुनकर सांसद भेजा। 1998 में एसपी से ओमवती सांसद बनीं।
रामपुर: 1996 और 1999 में बेगम नूर बानो कांग्रेस पार्टी से सांसद चुनी गईं। इसके बाद 2004 और 2009 के चुनावों में समाजवादी पार्टी से जयाप्रदा का जलवा कायम रहा।
कैराना: 2004 में पहली बार आरएलडी की महिला उम्मीदवार अनुराधा चौधरी को सांसद बनाकर भेजा। 2009 में तबस्सुम हसन बीएसपी से सांसद बनीं। पिछले साल हुए उपचुनाव में तबस्सुम फिर से सांसद चुनी गईं।
सहारनपुर: 17 विधानसभा चुनावों में सिर्फ छह महिलाएं विधानसभा पहुंच सकीं।
सहारनपुर-मुजफ्फरनगर-बागपत: वेस्ट यूपी की दो अहम मुजफ्फरनगर और सहारनपुर सीट पर भी आजादी के बाद आज तक कोई महिला सांसद नहीं चुनी गईं। कुछ ऐसा ही हाल बागपत संसदीय सीट का है जहां के लोगों ने आज तक किसी महिला को संसद में नहीं भेजा।
बिजनौर: 1985 में पहली बार मीरा कुमारी यहां से सांसद चुनी गईं। इसके बाद 1989 के चुनाव में बिजनौर के लोगों ने बीएसपी से मायावती को चुनकर सांसद भेजा। 1998 में एसपी से ओमवती सांसद बनीं।
रामपुर: 1996 और 1999 में बेगम नूर बानो कांग्रेस पार्टी से सांसद चुनी गईं। इसके बाद 2004 और 2009 के चुनावों में समाजवादी पार्टी से जयाप्रदा का जलवा कायम रहा।
कैराना: 2004 में पहली बार आरएलडी की महिला उम्मीदवार अनुराधा चौधरी को सांसद बनाकर भेजा। 2009 में तबस्सुम हसन बीएसपी से सांसद बनीं। पिछले साल हुए उपचुनाव में तबस्सुम फिर से सांसद चुनी गईं।
सहारनपुर: 17 विधानसभा चुनावों में सिर्फ छह महिलाएं विधानसभा पहुंच सकीं।
भाजपा ने यह प्रस्ताव लाकर बड़ा अच्छा कार्य किया है। सभी को इसका स्वागत करना चाहिए। इसके समर्थन में मेरठ-हापुड़ लोकसभा से बुधवार 500 महिलाएं 12 बसों से दिल्ली जाएंगी। - सुरेश जैन रितुराज, महानगर अध्यक्ष, भाजपा
समाजवादी पार्टी ने हमेशा इसका समर्थन किया है, लेकिन इसमें उनको भी हक मिलना चाहिए जो महिलाएं आखिरी पंक्ति में खड़ी हैं। सरकार को नौ साल हो गए। इन्हें महिला आरक्षण बिल लाना था तो पहले ला सकते थे। - शाहिद मंजूर, पूर्व कैबिनेट मंत्री, सपा
केंद्र सरकार ने जो महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत के आरक्षण का प्रस्ताव लाई है। इसमें पिछड़े, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को जिम्मेदारी मिले, इसका भी ध्यान रखना चाहिए था। - सिमरन प्रीत कौर
केंद्र सरकार द्वारा नारी उत्थान के लिए जो बिल आज लाया गया है, इससे महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। इससे महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। - अमिता शर्मा
भाजपा महिलाओं को हमेशा से आगे बढ़ाती रही है। मुझे भी राज्यसभा का मेंबर बनवाया है। भाजपा हमेशा महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करती है। - कांता कर्दम, राज्य सभा सदस्य
महिला आरक्षण लैंगिक न्याय और सामाजिक न्याय का संतुलन होना चाहिए। -राजपाल सिंह, पूर्व मंत्री, सपा
समाजवादी पार्टी ने हमेशा इसका समर्थन किया है, लेकिन इसमें उनको भी हक मिलना चाहिए जो महिलाएं आखिरी पंक्ति में खड़ी हैं। सरकार को नौ साल हो गए। इन्हें महिला आरक्षण बिल लाना था तो पहले ला सकते थे। - शाहिद मंजूर, पूर्व कैबिनेट मंत्री, सपा
केंद्र सरकार ने जो महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत के आरक्षण का प्रस्ताव लाई है। इसमें पिछड़े, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को जिम्मेदारी मिले, इसका भी ध्यान रखना चाहिए था। - सिमरन प्रीत कौर
केंद्र सरकार द्वारा नारी उत्थान के लिए जो बिल आज लाया गया है, इससे महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। इससे महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। - अमिता शर्मा
भाजपा महिलाओं को हमेशा से आगे बढ़ाती रही है। मुझे भी राज्यसभा का मेंबर बनवाया है। भाजपा हमेशा महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करती है। - कांता कर्दम, राज्य सभा सदस्य
महिला आरक्षण लैंगिक न्याय और सामाजिक न्याय का संतुलन होना चाहिए। -राजपाल सिंह, पूर्व मंत्री, सपा