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Meerut News: कार्यवाहक प्राचार्य सहित चार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
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मवाना। कृषक पीजी काॅलेज की तत्कालीन सचिव अर्चना वर्मा ने तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य सहित चार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
अर्चना वर्मा ने महाविद्यालय के आशु लिपिक मनु चौधरी, लेखाकार नवीन कुमार वर्मा, हरनदंन सिंह, तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. तनुज कुमार पर फीस गबन का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 2018-19 में महाविद्यालय में संचालित स्ववित्त पोषित कक्षा बीकाॅम, बीएससी होम साइंस में चारों नामजद आरोपियों द्वारा फीस में गबन किया गया। इनसे मौखिक जानकारी चाही तो जानकारी नहीं दी गई। 28 अक्तूबर 2021 को डाॅ. प्रभात कुमार को प्राचार्य नियुक्त किया गया। 30 नवंबर 2021 को लेखाकार द्वारा प्राचार्य को स्ववित्त पोषित कक्षाओं बीकाम, बीएससी होमसाइंस में फीस में गबन से संबंधित पत्र प्रेषित किया। जिसमें तत्कालीन प्राचार्य डाॅ. प्रभात कुमार ने 64500 रुपये महाविद्यालय के बैंक खाते में कम जमा होना बताया। 17 मई 2022 को प्रबंध समिति ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। संबंधित कर्मचारियों ने जांच समिति को कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। कुछ साक्ष्य जांच समिति को हाथ लगे। जिसमें मनु चौधरी द्वारा तैयार किया रजिस्टर मूलरूप में प्राप्त हुआ। जिसमें रुपये 308300 रुपये प्राप्त करने का उल्लेख है। लेखाकार ने रुपये 271200 की कुल रसीद काटा जाना बताया। मनु चौधरी इस प्रकरण के मुख्य दोषी है। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि चारों ने जानबूझकर फीस रसीद अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर पूनम से कटवाई। महाविद्यालय में कुल फीस 539160 रुपये रुपये जमा होनी चाहिए थी। किंतु 209700 रुपये जमा हुए। आरोपियों ने फर्जी रसीद बुक छपवाकर होमसाइंस की छात्राओं को रुपये 21640 रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति तत्कालीन नोडल अधिकारी छात्रवृत्ति के सामने फर्जी रसीद बुक पेशकर धोखा देकर छात्रवृत्ति फार्मों पर हस्ताक्षर कर दिलाई। छात्रा सोनी की रसीद 8 हजार की है, जबकि समाज कल्याण विभाग से 21340 रुपये छात्रवृत्ति प्राप्त होने का उल्लेख है। महाविद्यालय के बैंक खाते में केवल 8 हजार रुपये ही जमा किए गए। जो राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी है। पुलिस ने उक्त मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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अर्चना वर्मा ने महाविद्यालय के आशु लिपिक मनु चौधरी, लेखाकार नवीन कुमार वर्मा, हरनदंन सिंह, तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. तनुज कुमार पर फीस गबन का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 2018-19 में महाविद्यालय में संचालित स्ववित्त पोषित कक्षा बीकाॅम, बीएससी होम साइंस में चारों नामजद आरोपियों द्वारा फीस में गबन किया गया। इनसे मौखिक जानकारी चाही तो जानकारी नहीं दी गई। 28 अक्तूबर 2021 को डाॅ. प्रभात कुमार को प्राचार्य नियुक्त किया गया। 30 नवंबर 2021 को लेखाकार द्वारा प्राचार्य को स्ववित्त पोषित कक्षाओं बीकाम, बीएससी होमसाइंस में फीस में गबन से संबंधित पत्र प्रेषित किया। जिसमें तत्कालीन प्राचार्य डाॅ. प्रभात कुमार ने 64500 रुपये महाविद्यालय के बैंक खाते में कम जमा होना बताया। 17 मई 2022 को प्रबंध समिति ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। संबंधित कर्मचारियों ने जांच समिति को कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। कुछ साक्ष्य जांच समिति को हाथ लगे। जिसमें मनु चौधरी द्वारा तैयार किया रजिस्टर मूलरूप में प्राप्त हुआ। जिसमें रुपये 308300 रुपये प्राप्त करने का उल्लेख है। लेखाकार ने रुपये 271200 की कुल रसीद काटा जाना बताया। मनु चौधरी इस प्रकरण के मुख्य दोषी है। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि चारों ने जानबूझकर फीस रसीद अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर पूनम से कटवाई। महाविद्यालय में कुल फीस 539160 रुपये रुपये जमा होनी चाहिए थी। किंतु 209700 रुपये जमा हुए। आरोपियों ने फर्जी रसीद बुक छपवाकर होमसाइंस की छात्राओं को रुपये 21640 रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति तत्कालीन नोडल अधिकारी छात्रवृत्ति के सामने फर्जी रसीद बुक पेशकर धोखा देकर छात्रवृत्ति फार्मों पर हस्ताक्षर कर दिलाई। छात्रा सोनी की रसीद 8 हजार की है, जबकि समाज कल्याण विभाग से 21340 रुपये छात्रवृत्ति प्राप्त होने का उल्लेख है। महाविद्यालय के बैंक खाते में केवल 8 हजार रुपये ही जमा किए गए। जो राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी है। पुलिस ने उक्त मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।