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जीवन को सार्थक और सफल बनाने के लिए वैराग्य आवश्यक : भारत भूषण
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सरधना। भव्य श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन समापन के दौरान प्रस्तुति देते प
संवाद समाचार एजेंसी
सरधना। नगर में ऐतिहासिक श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवें दिन सौधर्म इंद्र-इंद्राणी और भगवान के माता-पिता कुबेर यज्ञनायक इंद्र व इंद्राणियों की उपस्थिति में पंडित अरविंद शास्त्री के नेतृत्व में नित्यार्चन, जाप्य अनुष्ठान और कल्याणक पूजन की क्रियाएं संपन्न कराई गईं।
आचार्य भारत भूषण महाराज के सानिध्य में बड़े उल्लास के साथ महोत्सव शुरू हुआ। गुरु ने प्रवचन में बताया कि जीवन को सफल बनाने के लिए सदैव वैराग्य की भावना बनाए रखना आवश्यक है। इसके पश्चात राजा सोमप्रभा और राजा श्रेयांश द्वारा मुनि आदिनाथ को आहार कराया गया। दोपहर में जैन नाटिका का मंचन हुआ, जिसमें भरत और बाहुबली के युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। दिखाया गया कि किस प्रकार बाहुबली ने स्वामी वैराग्य प्राप्त किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन संध्या आयोजित की गई। जिसमें भजन कलाकार रूपेश जैन ने अपनी भक्ति भावना से उपस्थित जनमानस का मन मोह लिया। कार्यक्रम में मेरठ, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, मवाना, खतौली, गुन्नौर और दिल्ली से भक्तजन पहुंचे। शुक्रवार को साधर्मी वात्सल्य का आयोजन भी किया गया, जिसके लाभार्थी सतीश जैन, उषा जैन, अमित जैन, वेणी जैन रहे।
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शाम की महाआरती के लाभार्थी सतीश चंद जैन, कुसुम जैन, वैभव जैन, दिव्या जैन रहे। पंचकल्याणक महोत्सव में सौभाग्यशाली पात्र राहुल जैन, संजीव जैन, अनिल जैन, कुणाल जैन, मनोज जैन, ललित जैन रहे। संचालन में सागर जैन, आलोक जैन, अजय जैन, अविनाश जैन, अरिहंत जैन, संयम जैन, भोला जैन, राजीव जैन, शानू जैन, विनोद जैन, सजल जैन, वासु जैन, वंदित जैन, निमिष जैन, अक्षत जैन का योगदान रहा।
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सरधना। नगर में ऐतिहासिक श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवें दिन सौधर्म इंद्र-इंद्राणी और भगवान के माता-पिता कुबेर यज्ञनायक इंद्र व इंद्राणियों की उपस्थिति में पंडित अरविंद शास्त्री के नेतृत्व में नित्यार्चन, जाप्य अनुष्ठान और कल्याणक पूजन की क्रियाएं संपन्न कराई गईं।
आचार्य भारत भूषण महाराज के सानिध्य में बड़े उल्लास के साथ महोत्सव शुरू हुआ। गुरु ने प्रवचन में बताया कि जीवन को सफल बनाने के लिए सदैव वैराग्य की भावना बनाए रखना आवश्यक है। इसके पश्चात राजा सोमप्रभा और राजा श्रेयांश द्वारा मुनि आदिनाथ को आहार कराया गया। दोपहर में जैन नाटिका का मंचन हुआ, जिसमें भरत और बाहुबली के युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। दिखाया गया कि किस प्रकार बाहुबली ने स्वामी वैराग्य प्राप्त किया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन संध्या आयोजित की गई। जिसमें भजन कलाकार रूपेश जैन ने अपनी भक्ति भावना से उपस्थित जनमानस का मन मोह लिया। कार्यक्रम में मेरठ, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, मवाना, खतौली, गुन्नौर और दिल्ली से भक्तजन पहुंचे। शुक्रवार को साधर्मी वात्सल्य का आयोजन भी किया गया, जिसके लाभार्थी सतीश जैन, उषा जैन, अमित जैन, वेणी जैन रहे।
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शाम की महाआरती के लाभार्थी सतीश चंद जैन, कुसुम जैन, वैभव जैन, दिव्या जैन रहे। पंचकल्याणक महोत्सव में सौभाग्यशाली पात्र राहुल जैन, संजीव जैन, अनिल जैन, कुणाल जैन, मनोज जैन, ललित जैन रहे। संचालन में सागर जैन, आलोक जैन, अजय जैन, अविनाश जैन, अरिहंत जैन, संयम जैन, भोला जैन, राजीव जैन, शानू जैन, विनोद जैन, सजल जैन, वासु जैन, वंदित जैन, निमिष जैन, अक्षत जैन का योगदान रहा।