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धर्म जीवन को संयम, सेवा और सत्य की राह पर ले जाने वाला मार्ग : आचार्य सौरभ सागर
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जानीखुर्द। हिम्स शुद्धिग्राम मुजक्कीपुर में सोमवार को जैन मुनि आचार्य सौरभ सागर महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि धर्म जीवन को संयम, सेवा और सत्य की राह पर ले जाने वाला मार्ग है। उन्होंने जीवन में अहिंसा, तप और दया के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझते हुए उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। सौरभ सागर महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि धर्म जीवन को संयम, सेवा और सत्य की राह पर ले जाने वाला मार्ग है। उन्होंने जीवन में अहिंसा, तप और दया के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
गुरु महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझते हुए उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। जैन धर्म में सेवा की प्रभावना होती है। महाराज ने कहा कि अपने अंदर के आलस्य को त्यागकर भक्ति एवं श्रेष्ठ कार्य करें। अपने बच्चों के अंदर भी अच्छे संस्कार पैदा करें। साधुओं की सेवा करें। इससे आपका कल्याण होगा। कार्यक्रम के दौरान अक्षय अग्रवाल ने जैन मुनि आचार्य सौरभ सागर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके संत जीवन को अपनाने के घटनाक्रम को बताया।
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आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझते हुए उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। सौरभ सागर महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि धर्म जीवन को संयम, सेवा और सत्य की राह पर ले जाने वाला मार्ग है। उन्होंने जीवन में अहिंसा, तप और दया के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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गुरु महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझते हुए उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। जैन धर्म में सेवा की प्रभावना होती है। महाराज ने कहा कि अपने अंदर के आलस्य को त्यागकर भक्ति एवं श्रेष्ठ कार्य करें। अपने बच्चों के अंदर भी अच्छे संस्कार पैदा करें। साधुओं की सेवा करें। इससे आपका कल्याण होगा। कार्यक्रम के दौरान अक्षय अग्रवाल ने जैन मुनि आचार्य सौरभ सागर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके संत जीवन को अपनाने के घटनाक्रम को बताया।
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