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धर्म मनुष्य का स्वभाव, आचरण में दिखे तो ही सार्थक : विमर्श सागर
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कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का सोलहवां दिन
संवाद समाचार एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के सोलहवें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
स्वर्ण कलश से डॉ. सुधीर जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा रवीन जैन व लोकेश जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन दीप्ति जैन, निकिता जैन लंदन, उषा, मोनिका, शशि ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 303 परिवारों की ओर से विधान कराया गया।
विधान के मध्य गुरुवर विमर्श सागर महाराज ने कहा कि अपने भीतर कलुषित मन को साफ करो। धर्म मनुष्य का स्वभाव है। उस स्वभाव में विकारों की परत तो जम सकती है परंतु उसकी विशेषता समाप्त नहीं हो सकती। इसलिए मनुष्य धर्म छूटता नहीं है। जिस प्रकार पानी कितना भी गर्म हो वह अपना स्वभाव नहीं छोड़ता, उबलता पानी यदि आग पर गिरेगा तो उसे बुझाने का ही प्रयास करेगा। उसी प्रकार कोई व्यक्ति कितना भी बुरा क्यों न हो परंतु प्रभु का स्मरण अवश्य करता है। कभी न कभी उसमें दया भाव उत्पन्न हो ही जाता है।
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विधान का विसर्जन दीप्ति जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मनीष जैन, सुधीर जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन विपिन जैन, मोनिका जैन और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रानी जैन, कुसुमलता जैन, रूपा जैन ने किया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जिवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, शशांक जैन, विजय कुमार जैन, विपुल जैन, पंकज जैन, मनोज जैन का सहयोग रहा।
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संवाद समाचार एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के सोलहवें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
स्वर्ण कलश से डॉ. सुधीर जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा रवीन जैन व लोकेश जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन दीप्ति जैन, निकिता जैन लंदन, उषा, मोनिका, शशि ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 303 परिवारों की ओर से विधान कराया गया।
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विधान के मध्य गुरुवर विमर्श सागर महाराज ने कहा कि अपने भीतर कलुषित मन को साफ करो। धर्म मनुष्य का स्वभाव है। उस स्वभाव में विकारों की परत तो जम सकती है परंतु उसकी विशेषता समाप्त नहीं हो सकती। इसलिए मनुष्य धर्म छूटता नहीं है। जिस प्रकार पानी कितना भी गर्म हो वह अपना स्वभाव नहीं छोड़ता, उबलता पानी यदि आग पर गिरेगा तो उसे बुझाने का ही प्रयास करेगा। उसी प्रकार कोई व्यक्ति कितना भी बुरा क्यों न हो परंतु प्रभु का स्मरण अवश्य करता है। कभी न कभी उसमें दया भाव उत्पन्न हो ही जाता है।
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विधान का विसर्जन दीप्ति जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मनीष जैन, सुधीर जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन विपिन जैन, मोनिका जैन और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रानी जैन, कुसुमलता जैन, रूपा जैन ने किया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जिवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, शशांक जैन, विजय कुमार जैन, विपुल जैन, पंकज जैन, मनोज जैन का सहयोग रहा।

कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद

कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद