फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Read full story of bloody bridge Meerut, Indians were tortured by British

ब्रिटिश हुकूमत के जुल्मों की दर्दनाक कहानी: अंग्रेजों ने दीं यातनाएं... जगह का नाम पड़ गया था खूनी पुल

Sat, 13 Aug 2022 06:47 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 13 Aug 2022 06:47 PM IST
सार

अंग्रेजों ने भारतीयों को खूब यातनाएं दी थीं। बताया जाता है कि खूनी पुल का नाम लेते ही खौफनाक मंजर लोगों के जेहन में आ जाता है।

विज्ञापन
Read full story of bloody bridge Meerut, Indians were tortured by British
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंग्रेजों ने हर हिंदुस्तानी को यातनाएं दीं। खूनी पुल आज भी भारतीयों के साथ हुए रक्तपात को स्मरण कराता है। हालांकि अब पुल का कोई स्वरूप नहीं बचा है, लेकिन इसका नाम लेते ही खौफनाक मंजर जेहन में आ जाता है।

विज्ञापन


प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान देने के बाद मेरठ अखिल भारतीय स्तर के राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्त्ताओं की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया। इतिहासकार डॉ. केडी शर्मा ने बताया कि इंडियन एसोसियेशन की स्थापना के पश्चात सुरेंद्र नाथ बनर्जी ने कोलकाता से लेकर लाहौर तक समस्त पूर्वोत्तर भारत का दौरा किया। मेरठ आए और इंडियन एसोसिएशन की एक शाखा खोली। धार्मिक आंदोलनों से भारतीय पुनर्जागरण आया। चौधरी रघुवीर नारायण सिंह आदि सत्याग्रहियों के रूप में असहयोग आंदोलन के दौरान जेल गए। महिलाओं में केवल विद्यावती ही जेल गई। पुलिस यातनाओं के बावजूद लोगों ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार किया। निषेध एवं विदेशी वस्त्रों के बेचने वाली दुकानों पर धरना आदि कार्यक्रम को उत्साहपूर्वक चलाए गए। 
विज्ञापन


हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का उदय
विष्णुवारण दुबलिश ने जेल से छूटने पर क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की सदस्यता ली। इतिहासकार डॉ. अमित पाठक ने बताया कि रामप्रसाद बिस्मिल, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद से इनका सीधा संपर्क था। प्रसिद्ध विप्लवी योगेशचंद्र चटर्जी ने लिखा है कि दुबलिश ने क्रांति और आजादी के लिए बड़ी तत्परता से संलग्न होकर कार्य किया। वैश्य अनाथालय में दुबलिश रहते थे, वह तब क्रांतिकारियों का मेरठ में अड्डा था। काकोरी षड्यंत्र कांड की व्यूह रचना मेरठ में ही हुई। चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में काकोरी के स्टेशन पर ट्रेन में सरकारी खजाने को लूटा गया। इसके उपरांत क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की कार्यकारिणी की बैठक दुबलिश के निवास पर हुई। बैठक में रामप्रसाद बिस्मिल, सुरेश भट्टाचार्य, राजेंद्र लाहड़ी, शिवचरन लाल, वीर भद्र तिवारी, गोविंद चरन, जतिन्द्र नाथ दास और दामोदर स्वरूप सेठ ने भी भाग लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

युवाओं ने निभाई अहम भूमिका
शहर के विद्यार्थी राष्ट्रीय आंदोलन में तेजी से आगे आए। विद्यार्थी खादी संघ, हिंदुस्तानी सेवा दल, यंग कामरेड लीग आदि संस्थाओं ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतिहासकार केडी शर्मा ने बताया कि विद्यार्थी प्रदर्शनकारियों ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए। लाल स्याही से लिखे गए इश्तहार को पुलिस थानों, कोतवाली, सैनिक भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाया गया। इन इश्तहारों में सोवियत प्रतीक हथोड़ा और हसिया अंकित था। विप्लवी दल हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का क्रांतिकारी संदेश लिखा हुआ था। आंख के बदले आंख की चेतावनी के साथ कहा गया था कि महात्मा के शांतिमय सैनिकों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना को लाल पोस्टर केस के नाम से जाना जाता है। सुंदर लाल जैन को इस केस में गिरफ्तार किया गया। 

मौलाना आजाद की आजादी की मांग
मौलाना आजाद 1930 के दशक में मेरठ आए और विशाल जन समूह को उन्होंने संबोधित किया। भाषण में उन्होंने आजादी की मांग की। मेरठ से उन्हें बंदी बनाया गया और छह माह की सजा दी गई। यह समय उन्होंने मेरठ जेल में बिताया। 

यह भी पढ़ें: Divya Kakran: भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने पहलवान दिव्या काकरान से बंधवाई राखी, दोनों ने आप पर साधा निशाना

मेरठ में चला साम्यवादी षड्यंत्र केस
मेरठ 1857 के बाद देश और विश्व में चर्चा का विषय बना रहा। साम्यवादी षड्यंत्र केस में भारत के विभिन्न भागों से नेताओं को गिरफ्तार कर मेरठ लाया गया। इनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासमिति के सदस्य भी थे। मेरठ लाकर इन सभी नेताओं पर सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र करने के आरोप में मुकदमा चलाया गया। अभियुक्तों पर साम्यवादी प्रचार का भी आरोप था। ब्रिटिश पार्लियामेंट और इंग्लैंड के अखबारों ने इस केस में बहुत रुचि ली। मुकदमे के समय सरकारी प्रकाशन विभाग के निदेशक स्वयं उपस्थित रहते थे और मुकदमे से संबंधित प्रकाशन कार्य खुद देखते थे। मेरठ के दो लोग-गौरी शंकर और धर्मवीर अभियुक्त थे। गांधीजी और नेहरू अभियुक्तों से मिलने मेरठ आये। अभियुक्तों को लंबी सजाएं हुईं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed