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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Rampur Tiraha Kand: hands of the law did not reach the neck of the criminals even after 28 years

Rampur Tiraha Kand: 28 साल बाद भी गुनहगारों की गर्दन तक नहीं पहुंचे कानून के हाथ, सात हुए थे शहीद

Sun, 02 Oct 2022 02:02 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 02 Oct 2022 02:02 PM IST
सार

रामपुर तिराहा कांड दो अक्तूबर 1994 को हुआ था। इसमें सात लोग शहीद हुए थे। वहीं  सीबीआई ने इसकी जांच की थी। हालांकि अभी तक प्रकरण की लड़ाई अदालत में ही उलझी हुई है। 

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Rampur Tiraha Kand: hands of the law did not reach the neck of the criminals even after 28 years
रामपुर तिराहा कांड का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले बापू की जयंती पर 28 साल पहले मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर मानवता को शर्मसार किया गया। आरोप लगे, जांच हुई और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की गर्दन फंसी। मगर, अभी तक गुनहगारों को सजा नहीं मिली। मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं। 
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एक अक्तूबर 1994 की रात अलग राज्य की मांग को लेकर देहरादून से आंदोलनकारी दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। आंदोलनकारी रात के समय रामपुर तिराहे पर पहुंचे तो उन्हें पुलिस ने रोक लिया। विरोध करने पर लाठीचार्ज और फायरिंग हुई। सात आंदोलनकारी शहीद हो गए थे। रामपुर तिराहा कांड ने दुनिया को झकझोर दिया। मगर, हकीकत यह है कि अभी तक प्रकरण अदालती लड़ाई में उलझा हुआ है।
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शहादत के बाद बना उत्तराखंड
लंबे संघर्ष और शहादत के बाद नौ नवंबर 2000 को नए राज्य का गठन हुआ। साल 1995 में रामपुर तिराहा कांड की सीबीआई जांच शुरू कराई गई।  2003 में मुजफ्फरनगर के तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह नामजद किए गए थे।
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रामपुर तिराहा कांड में इनकी गई थी जान
- देहरादून नेहरु कालोनी निवासी रविंद्र रावत उर्फ गोलू 
- भालावाला निवासी सतेंद्र चौहान
- बदरीपुर निवासी गिरीश भदरी
- अजबपुर निवासी राजेश लखेड़ा
- ऋषिकेश निवासी सूर्यप्रकाश थपलियाल
- ऊखीमठ निवासी अशोक कुमार
- भानियावाला निवासी राजेश नेगी

मुकदमा-1 : सीबीआई बनाम राजबीर सिंह
विशेष न्यायाधीश कोर्ट में आईपीसी की धारा 120 बी समेत अन्य धाराओं में राजबीर सिंह एवं अन्य के खिलाफ मुकदमा ट्रायल पर है। प्रकरण में गवाही की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी।

मुकदमा-2 : सीबीआई बनाम राजेंद्र आदि
सीबीआई बनाम राजेंद्र आदि के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। पहले आरोपियों को हाईकोर्ट से स्टे मिल जाने के कारण सुनवाई रुक गई थी। अब स्टे खारिज हो गया है। सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी।

Rampur Tiraha Kand: hands of the law did not reach the neck of the criminals even after 28 years
पुष्कर धामी - फोटो : अमर उजाला

मुकदमा-3 : सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा  
सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा मामले में खतौली के तत्कालीन निरीक्षक एसपी मिश्रा को भी आरोपी बनाया गया था। मिश्रा के खिलाफ धारा  120 बी का मुकदमा चल रहा है।  सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी।

मुकदमा: 4  : सरकार बनाम बृजकिशोर सिंह
कांधला के तत्कालीन थानाध्यक्ष बृजकिशोर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने आंदोलनकारियों की तलाशी में हथियारों की फर्जी हथियार बरामदगी दिखाई। प्रकरण में गवाही चल रही है। अगली सुनवाई 11 अक्तूबर को होगी।

जिले में चल रहे चार मुकदमे
उत्तराखंड संघर्ष समिति के समन्वयक अनुराग वर्मा एवं रजनीश चौहान एडवोकेट ने बताया कि जिले में चार मुकदमे विचाराधीन है। समिति की ओर से वह पैरवी कर रहे हैं।

पांच अभियुक्तों की मौत के कारण तीन मुकदमे खत्म 
विशेष मजिस्ट्रेट कोर्ट में सीबीआई की ओर से आरोपी बनाए गए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मोती सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबीर सिंह और एक अन्य मामले में आरोपियों की मौत होने के कारण यह मामले समाप्त कर दिए गए हैं।

आज रामपुर तिराहे पर पहुंचे पुष्कर सिंह धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज रामपुर तिराहा पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वह यहां आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे। इसके बाद वह एक बजे वहलना में आयोजित रथयात्रा महोत्सव में शामिल होंगे। 

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