सीबीआई जांच से खुलेंगी रमाला चीनी में गड़बड़ी की परतें
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बागपत। यूपी सरकार ने सहकारी चीनी मिल संघ के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ. बीके यादव की सीबीआई जांच को हरी झंडी दे दी। जिन शिकायतों पर जांच के आदेश दिए हैं, इनमें सहकारी क्षेत्र की रमाला चीनी मिल में गबन का बिंदु भी शामिल हैं। मेडिकल भत्तों के दुरुपयोग, धुरिया मिल से खरीद और रिकवरी समेत कई बिंदुओं पर शिकायत की। जिला स्तर पर हुई जांच में कई बिंदुओं पर पहले ही हेराफेरी पकड़ी गई।
संघ के प्रबंधक निदेशक रहे डॉ. बीके यादव का कार्यकाल 18 दिसंबर 2013 से 23 मई 2017 तक रहा। चार साल के अंतराल में रमाला चीनी मिल में गड़बड़ी दर्जनभर से अधिक शिकायतें की। भगवानपुर नांगल के पूर्व डायरेक्टर राम पाल सिंह, भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर समेत अन्य कई लोगों ने शिकायतें कीं। प्रदेश के गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा तक भी शिकायतें पहुंचीं। पिछले करीब चार से चीनी मिल में गबन की शिकायतें की जा रही है। जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार ने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक रमाला और सहकारी गन्ना विकास समिति मलकपुर के सचिव के साथ इसी साल पांच जुलाई को जांच रिपोर्ट दी। इसमें सेवानिवृत्ति लेखाधिकारी रूपचंद को दोबारा नौकरी पर रखने के प्रकरण में नियमों का पालन नहीं किया। भगवानपुर नांगल के पूर्व डायरेक्टर रामपाल सिंह ने कहा रमाला मिल में लंबे समय से गड़बड़ी चल रही है, इसके खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई और शिकायत की। दूसरी तरफ डीसीओ सुशील कुमार ने कहा भाकियू की शिकायत पर तीन सदस्यीय टीम ने जांच की। मेडिकल बिल समेत अन्य बिंदुओं में हेराफेरी प्रतीत हुई।
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इनके मेडिकल बिलों पर भी उठे सवाल
मिल के उप मुख्य रसायनविद जीएस छोकर, रसायनविद एमपी चौधरी आरके त्रिपाठी, कांटा फीटर अब्दुल सलीम, वायरमैन शीशपाल, किरण पाल और गन्ना पर्यवेक्षक अजीत सिंह के मेडिकल बिलों की शिकायत की, इसकी जांच अभी तक चल रही है।
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नियम विरुद्ध की चिकित्सा प्रतिपूर्ति
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वायरमैन के बेटे को गोली मारकर घायल करने के मामले में 22 जनवरी 2015 और 31 मार्च 2015 को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की। प्रबंध निदेशक के आदेश हैं कि दो लाख से ऊपर के भुगतान में मंडलीय संयुक्त निदेशक चिकित्सा की हस्ताक्षरित प्रति जरूरी है, लेकिन यहां पर सीएमएस बागपत से प्रतिहस्ताक्षरित कराकर ही भुगतान कर दिया।
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गोरखपुर की धुरियापार मिल से भी जुड़े तार
रमाला चीनी मिल के लिए गोरखपुर की धुरियापार चीनी मिल से भी कुछ सामान खरीदा गया। ट्रांसपोर्ट, लेबर और परचेज बिलों की शिकायत की। धुरियापार चीनी मिल बंद हो गई, इससे कुछ सामान रमाला के लिए खरीदा गया।
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रिकवरी प्रकरण की भी होगी जांच
भगवानपुर नांगल निवासी पूर्व डायरेक्टर राम पाल सिंह का कहना है कि वर्ष 2015-16 की बैलेंस सीट के करीब एक करोड़ रुपये के बाउचर रिकॉर्ड में नहीं मिले। इसके अलावा 12 साल तक मिल नहीं पहुंचने वाले कर्मचारी चतर सैन गुप्ता को नियम विरुद्ध दोबारा रखकर उसका पूरा भुगतान किया । इन सब बिंदुओं की करीब 81 पृष्ठों की शिकायत सीएम योगी आदित्य नाथ से की।
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