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Meerut News: रहमत, मगफिरत और निजात का पैगाम देता है रमजान
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। मुकद्दस रमजान का पहला अशरा शुरू हो चुका है। रमजान के पहले दस दिनों को रहमत का अशरा कहा जाता है। इस दौरान अल्लाह तआला की बेशुमार रहमत बंदों पर बरसती है। हदीस के अनुसार इस पाक महीने में की गई हर इबादत का सवाब 70 गुना तक बढ़ जाता है।
शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने बताया कि रमजान का महीना तीन अशरों में तकसीम किया गया है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नुम से निजात का होता है। पहले अशरे में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों की बारिश करता है। दूसरे अशरे में बंदों की मगफिरत की जाती है, जबकि तीसरे अशरे में जहन्नुम से आजादी अता की जाती है।
उन्होंने बताया कि रमजान सब्र, शुक्र और इबादत का महीना है। रोजेदार सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की रजा हासिल करने की कोशिश करता है। इससे इंसान में परहेजगारी और इंसानियत की भावना मजबूत होती है। जामिया सबील उल फलाह के मोहतमिम मुफ्ती इसराईल ने कहा कि इस पाक महीने में मुसलमानों को पांचों वक्त की नमाज, तरावीह और तिलावत-ए-कुरआन का एहतमाम करना चाहिए।
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साथ ही जरूरतमंदों की मदद, सदका-खैरात और जकात अदा करने पर भी जोर दिया गया है। रमजान का महीना आपसी भाईचारे, सब्र और रहमत का पैगाम देता है। उलमा ने अपील की कि लोग इस बरकत वाले महीने में ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारें और समाज में अमन-चैन व मोहब्बत का पैगाम फैलाएं।
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सरधना। मुकद्दस रमजान का पहला अशरा शुरू हो चुका है। रमजान के पहले दस दिनों को रहमत का अशरा कहा जाता है। इस दौरान अल्लाह तआला की बेशुमार रहमत बंदों पर बरसती है। हदीस के अनुसार इस पाक महीने में की गई हर इबादत का सवाब 70 गुना तक बढ़ जाता है।
शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने बताया कि रमजान का महीना तीन अशरों में तकसीम किया गया है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नुम से निजात का होता है। पहले अशरे में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों की बारिश करता है। दूसरे अशरे में बंदों की मगफिरत की जाती है, जबकि तीसरे अशरे में जहन्नुम से आजादी अता की जाती है।
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उन्होंने बताया कि रमजान सब्र, शुक्र और इबादत का महीना है। रोजेदार सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की रजा हासिल करने की कोशिश करता है। इससे इंसान में परहेजगारी और इंसानियत की भावना मजबूत होती है। जामिया सबील उल फलाह के मोहतमिम मुफ्ती इसराईल ने कहा कि इस पाक महीने में मुसलमानों को पांचों वक्त की नमाज, तरावीह और तिलावत-ए-कुरआन का एहतमाम करना चाहिए।
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साथ ही जरूरतमंदों की मदद, सदका-खैरात और जकात अदा करने पर भी जोर दिया गया है। रमजान का महीना आपसी भाईचारे, सब्र और रहमत का पैगाम देता है। उलमा ने अपील की कि लोग इस बरकत वाले महीने में ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारें और समाज में अमन-चैन व मोहब्बत का पैगाम फैलाएं।