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रमजान 2024: भूल से पानी पी लिया, क्या टूट जाएगा रोजा? रोजेदारों के सवालों का उलमा ने दिया ये जवाब

Thu, 21 Mar 2024 12:44 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 21 Mar 2024 12:44 PM IST
सार

क्या भूल से कुछ खा लेने या पानी पी लेने से रोजा टूट जाता है। हेल्पलाइन पर पूछे गए सवालों का उलमा ने जवाब दिया। पढ़ें ऐसे ही अन्य सवालों पर क्या बोले उलमा।

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Ramadan 2024: will fast be broken if one Drinks water by mistake? Ulama answer to the question of fast
इफ्तार में शामिल रोजेदार। संवाद

विस्तार

जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलना कारी इस्हाक गोरा ने बुधवार को हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब देकर उनकी शंकाओं को दूर किया।

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कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि भूखा-प्यासा रहने के साथ जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है। आंख, ज़ुबान और कानों का भी रोजा होता है। आंखों का रोजा है कि बुरी चीजों को न देखें। कान का रोजा है बुरी बात न सुने। ज़ुबान का रोजा यह है कि गलत बात न बोले। रोजेदारों को चाहिए वह शरीयत के उसूलों के साथ रोजा रखे।

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सवाल: मुजफ्फरनगर के कस्बा पुरकाजी निवासी मोहम्मद ईसा ने पूछा कि कमजोरी के कारण उन्हें भूलने की आदत है। उन्होंने रोजे की हालत में भूल से दो बार पानी पी लिया, उसके बाद एक बिस्कुट भी खा लिया। अब ऐसी सूरत में रोजा रहेगा या नहीं?

जवाब: शरीयत के अनुसार रोजे की हालत में किसी व्यक्ति ने भूल से पानी पी लिया या कुछ खा लिया तो रोजा ख़त्म नहीं होगा। शरीयत में यह भी आया है कि अगर रोजेदार ने भूल से कई बार खाया पिया है तो भी उसका रोजा सलामत रहेगा।

सवाल: मेरठ निवासी अरहम ने पूछा कि वह मोहल्ले की मस्जिद में तरावीह पढ़ रहे हैं। वहां के हाफिज इतनी जल्दी कुरआन पढ़ रहे हैं कि ज्यादातर लफ्ज समझ में नहीं आते। इस तरह पढ़ने पर शरीयत का क्या हुकुम है?

जवाब: शरीयत के अनुसार अगर कोई व्यक्ति कुरआन-ए-करीम को इतनी जल्दी पढ़ता है कि लफ्ज कटते हों तो यह एक तरह क़ुरआन की बेअदबी और बड़ा गुनाह है। शरीयत में आया है कि इस सूरत में न तो सुनने और न ही सुनाने वाले को सवाब मिलेगा।

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सवाल: सहारनपुर शहीदगंज निवासी इब्राहीम बख्शी ने मालूम किया कि अगर कोई व्यक्ति किसी गरीब को जकात दे रहा है तो क्या उसे बताना जरूरी है?

जवाब: शरीयत के अनुसार किसी को जकात देते समय ज़ुबान से कहना जरूरी नहीं, बल्कि दिल में जकात की नीयत होनी चाहिए।

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