मौसम सुहाना: मानसून की विदाई से पहले झूमकर बरसे बदरा, तीन दिन से बारिश, गन्ना-धान को फायदा, सब्जियों पर खतरा
मानसून की विदाई से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरे दिन बारिश से मौसम सुहाना हो गया। तापमान में गिरावट से उमस से राहत मिली। सामान्य बारिश गन्ना और धान के लिए लाभकारी है, लेकिन जलभराव से सब्जियों को नुकसान की आशंका है।
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विस्तार
मानसून की विदाई से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय हो गया है। शनिवार सुबह से आसमान में घने बादल छाए रहे और कई इलाकों में तेज बारिश हुई। कहीं झमाझम तो कहीं रिमझिम बारिश का दौर चलता रहा। पिछले तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण मौसम पूरी तरह बदल गया है।
तापमान में गिरावट के साथ उमस भरी गर्मी से राहत मिली और मौसम सुहाना हो गया। सुबह बारिश शुरू होने के बाद सड़कों और बाजारों में भी इसका असर दिखाई दिया। लोग छाता और बरसाती लेकर घरों से निकले। कई स्थानों पर सड़क पर पानी भी जमा हो गया।
बारिश से किसानों के चेहरे खिले
सितंबर में मानसून की विदाई से पहले हो रही बारिश खेती के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खेतों में नमी बढ़ने से किसानों को राहत मिली है। जिन किसानों को सिंचाई की जरूरत थी, उन्हें भी बारिश से फायदा हुआ है।
गन्ने और धान की फसल के लिए फायदेमंद
कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर के अनुसार इस समय सामान्य मात्रा में होने वाली बारिश गन्ने और धान की फसल के लिए लाभकारी है। खेतों में पर्याप्त नमी मिलने से फसलों की बढ़वार बेहतर हो सकती है।
गन्ने की फसल में इस समय पानी की जरूरत रहती है। ऐसे में बारिश से किसानों की सिंचाई की लागत भी कम हो सकती है। चारे वाली फसलों के लिए भी बारिश लाभकारी है और मिट्टी में नमी बने रहने से पौधों की बढ़वार अच्छी होने की उम्मीद है।
रबी की तैयारी में भी मिलेगी मदद
बारिश से खेतों में नमी बढ़ने का लाभ आने वाले समय में रबी की फसलों की तैयारी करने वाले किसानों को भी मिल सकता है। मिट्टी में पर्याप्त नमी रहने से खेत तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हर फसल के लिए लगातार बारिश फायदेमंद नहीं होती। खेतों में अधिक समय तक पानी जमा रहने पर सब्जियों और दलहनी फसलों को नुकसान हो सकता है।
जलभराव की स्थिति में पौधों की जड़ों तक हवा का संचार प्रभावित होता है, जिससे गलन और रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। किसानों को जिन खेतों में पानी जमा है, वहां जल्द निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
तेज हवा के साथ बारिश से गन्ना गिरने का खतरा
तेज हवा के साथ लगातार बारिश होने पर गन्ने जैसी ऊंची फसल के गिरने का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले एक-दो दिन मौसम का मिला-जुला असर बना रह सकता है। इस दौरान बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनने की संभावना है। इसके बाद धीरे-धीरे बारिश की गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद है।
मानसून की वापसी से पहले बदला मौसम
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार सितंबर के पहले से दूसरे सप्ताह के आसपास मानसून की वापसी की स्थिति बनने लगती है। इससे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश सक्रिय होने के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि लगातार तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश का असर तापमान पर भी दिखाई दे रहा है। सुबह से बादल छाए रहने और बारिश के कारण धूप की तपिश कम रही। हवा में ठंडक महसूस हुई और लोगों को सितंबर की उमस से राहत मिली।
मानसून की विदाई से पहले हुई बारिश ने जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी है, वहीं किसानों को भी फायदा पहुंचाया है। हालांकि बारिश की मात्रा बढ़ने पर जलभराव और फसलों में रोग का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों में पानी की निकासी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।