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कांवड़ियों ने लगाया चूना: कांवड़ यात्रा में घटी रेलवे की आय, रोडवेज को हुआ चार करोड़ का नुकसान

Thu, 01 Aug 2019 12:00 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 01 Aug 2019 12:00 PM IST
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Railway revenue decreased in kanwar yatra, roadways in loss of forty crores
रोडवेज बस - फोटो : अमर उजाला

कांवड़ यात्रा के दौरान रेलवे और रोडवेज को काफी नुकसान उठाना पड़ा। एक ओर जहां ट्रेन में यात्रियों की संख्या बढ़ गई, वहीं रोडवेज में कम ही लोगों ने सफर किया, लेकिन यात्री बढ़ने के बाद भी रेलवे की आय घट गई। कांवड़ियों के साथ अन्य यात्रियों ने भी टिकट नहीं लिया। अधिक भीड़ के कारण रेलवे कर्मचारी टिकट भी चेक नहीं कर पाए, इससे विभाग को नुकसान उठाना पड़ा। 

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मेरठ जिला प्रशासन ने रूट डायवर्जन कर भले ही कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने में सफलता हासिल की हो, लेकिन रोडवेज को इससे करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मेरठ रोडवेज रीजन के सभी पांचों डिपो की आय गिरकर आधी से भी कम रह गई। सफर लंबा और किराया महंगा होने से यात्रियों ने बसों में सफर करने से परहेज किया।
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कांवड़ यात्रा के चलते हर साल रोडवेज का रूट डायवर्जन कर दिया जाता है। मेरठ से मुजफ्फरनगर और दिल्ली रूट पूरी तरह सील होने के चलते भैसाली बस अड्डे को सोहराबगेट बस अड्डे पर अस्थायी रूप से शिफ्ट किया जाता है। यहीं से दिल्ली रूट की बसों को वाया किठौर-हापुड़ और मुजफ्फरनगर रूट की बसों को वाया मवाना-मीरापुर संचालित किया गया।
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इसके चलते सफर लंबा और किराया करीब दोगुना होने के चलते यात्रियों ने बसों से सफर करने से परहेज किया। इसका असर रोडवेज की आय पर पड़ा। रोडवेज सूत्रों के मुताबिक कांवड़ यात्रा के दौरान विभाग को करीब चार करोड़ रुपये की चपत लगी है। आम दिनों में जहां मेरठ रीजन को सभी पांचों डिपो से रोजाना करीब 90 लाख रुपये की आमदनी होती थी वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान यह कमाई गिरकर 40 से 45 लाख प्रतिदिन रह गई। 

08 दिन में आय हुई आधी, रूट डायवर्जन केचलते यात्रियों ने किया किनारा
कांवड़ यात्रा के चलते रोडवेज ने हरिद्वार रूट के लिए 75 से ज्यादा बसों का संचालन किया था। इन बसों में न केवल बाहरी कांवड़ियों ने सफर किया बल्कि स्थानीय कांवड़ियों ने भी बसों का सहारा लिया। रोडवेज सूत्रों ने बताया कि सफर करने वाले कांवड़ियों में से काफी कांवड़ियें ऐसे थे जिन्होंने कम किराया दिया या फिर किराया ही नहीं दिया।

इस तरह गिरी रीजन की आय 

डिपो     रोजाना औसत आय     कांवड़ के दौरान आय 
 मेरठ     18 लाख    करीब 10 लाख
 भैसाली     25 लाख     करीब 11 लाख
 सोहराबगेट     22 लाख     करीब 11 लाख 
 गढ़मुक्तेश्वर    12 लाख     करीब  07 लाख 
 बड़ौत     14 लाख    करीब  06 लाख 
 कुल आय     91 लाख     करीब 45 लाख 

भैसाली बस अड्डे से दौड़ने लगीं बसें  
कांवड़ यात्रा के दौरान अस्थायी रूप से सोहराबगेट बस अड्डे पर शिफ्ट हुआ भैसाली बस अड्डा अपने मूल स्थान पर लौट आया। बसों के मूल रूट से चलने पर यात्रियों को राहत मिलना शुरू हो गई। हालांकि अभी सभी बसें नहीं लौटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि बृहस्पतिवार तक सभी बसें अड्डे पर लौट आएंगी।

कांवड़ यात्रा के चलते भैसाली बस अड्डे को 22 जुलाई को सोहराबगेट अड्डे पर शिफ्ट किया गया था। यहां से दिल्ली और गाजियाबाद जाने वाली बसों को वाया किठौर-हापुड़ और मुजफ्फरनगर रूट की बसों को वाया मवाना-मीरापुर रूट से संचालित किया जा रहा था। बुधवार दोपहर बाद बसें अपने मूल रूट से संचालित होने लगीं।

Railway revenue decreased in kanwar yatra, roadways in loss of forty crores
कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रेनों की हालत - फोटो : अमर उजाला
कांवड़ यात्रा में घट गई रेलवे की आय 
कांवड़ यात्रा के दौरान रेल में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन रेलवे की आय कम हो गई। यात्रा शुरू होते ही भैसाली बस अड्डे को शिफ्ट कर दिया गया  था। इसके बाद यात्रियों ने बस से न जाकर ट्रेन से जाना शुरू कर दिया। लेकिन इसके बाद भी रेलवे को नुकसान उठाना पड़ा।

उत्तर रेलवे की ओर से कांवड़ियों के लिए स्पेशल ट्रेन की घोषणा नहीं की थी। रेलवे ने दिल्ली जंक्शन से सहारनपुर जाने वाली टू-डीएस पैसेंजर को हरिद्वार तक बढ़ा दिया था। लेकिन मेरठ से हरिद्वार जाने वाले यात्रियों ने जनशताब्दी, उत्कल एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में सीट कब्जाई थीं। इससे आम यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी थी। कांवड़ियों की भीड़ के सामने रेलवे प्रशासन मूकदर्शक नजर आया। स्टेशनों और ट्रेनों में टिकट चेकिंग नहीं की गई।

रोजाना 15 हजार यात्रियों का औसत
सिटी स्टेशन से रोजाना 15 हजार औसत दैनिक यात्री सफर करते हैं। बात करें कांवड़ यात्रा के समय की तो यह संख्या बढ़नी चाहिए थी, लेकिन यह संख्या घटकर 11 से 13 हजार के बीच रही। यह संख्या टिकट खरीद पर आधारित है, जबकि सिटी स्टेशन से सभी ट्रेनें फुल होकर गईं। आंकड़े गवाह हैं कि कांवड़ियों के साथ अन्य यात्रियों ने भी मुफ्त में यात्रा की।

कांवड़ यात्रा से पहले
         कुल आय                                                कुल यात्री
 20 जुलाई     4 लाख 58 हजार 605    20 जुलाई     12 हजार 548
 21 जुलाई     4 लाख 33 हजार 395    21 जुलाई     9 हजार 71
 22 जुलाई     6 लाख 810    22 जुलाई     16 हजार 774
 23 जुलाई     5 लाख 38 हजार 255    23 जुलाई     14 हजार 375
 24 जुलाई     5 लाख 33 हजार 585    24 जुलाई     15 हजार 22

कांवड़ यात्रा के बाद
               कुल आय                              कुल यात्री 
 25 जुलाई     5 लाख 42 हजार 95    25 जुलाई     16 हजार 328
 26 जुलाई     4 लाख 94 हजार 780    26 जुलाई     13 हजार 71
 27 जुलाई     4 लाख 82 हजार 355    27 जुलाई     13 हजार 333
 28 जुलाई     4 लाख 49 हजार 40    28 जुलाई     11 हजार 515
 29 जुलाई     4 लाख 9 हजार 150    29 जुलाई     13 हजार 722
 30 जुलाई     3 लाख 32 हजार 630    30 जुलाई     11 हजार 294 
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