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दंगा नियंत्रण प्रबंधन में दक्ष है आरएएफ

Tue, 17 Dec 2019 01:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 01:54 AM IST
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RAF perfect in riots control management
मेरठ।
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देश के अंदर और सीमा पर तैनात सभी फोर्सेस की अपनी-अपनी खासियत है। कोई देश की सीमाओं की सुरक्षा में दक्ष है तो किसी का आंतरिक सुरक्षा के मामलों में कोई सानी नहीं है। इन सभी फोर्सेस के बीच आरएएफ के जवानों की खूबी है उनका दंगा नियंत्रण प्रबंधन (क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट)। इसका उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) सीआरपीएफ की विंग है। सीआरपीएफ से कांस्टेबल, हेडकांस्टेबल, एसआई और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों को चार साल के लिए आरएएफ में भेजा जाता है। इंस्पेक्टर रैंक से उच्च रैंक के अधिकारियों को तीन वर्ष के लिए आरएएफ में तैनाती दी जाती है। आरएएफ में निर्धारित समय पूरा करने के बाद उन्हें सीआरपीएफ की वाहिनी में भेज दिया जाता है। देश के चुनिंदा शहरों में आरएएफ की वाहिनी स्थापित हैं। इनमें से मेरठ भी एक है। 7 अक्तूबर 1992 को आरएएफ की 10 वाहिनी दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, अलीगढ़, मेरठ, हैदराबाद, जमशेदपुर, कोयंबटूर और इलाहाबाद में स्थापित की गईं। वर्तमान में देशभर में आरएएफ की 15 वाहिनी हैं। आरएएफ विदेशों तक में प्रशिक्षण और सेवा देती रही है।
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दंगा नियंत्रण के लिए हैं पांच विकल्प
दंगे में क्या करना चाहिए। हालात को कैसे भांपना चाहिए। हिंसक भीड़ गोलियां चला रही है, तो उसे कैसे संभालना चाहिए। दंगे से निपटने के ये तमाम गुर सिर्फ आरएएफ में सिखाए जाते हैं। जो काम पुलिस और दूसरे अर्धसैनिक बल नहीं कर पाते उसको आरएएफ जवान पूरा करते हैं। यही कारण है कि देश में कहीं भी दंगा होता है तो सबसे पहले आरएएफ को बुलाया जाता है। क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट के लिए आरएएफ के पास वज्र वाहन, बुलेट प्रूफ वाहन, वाटर कैनन वाहन मुख्य हैं। आरएएफ पांच विकल्प लेकर चलती है। पहला विकल्प चेतावनी। दूसरा विकल्प आंसू गैस के गोले। इसके बाद भी भीड़ नहीं हटती है तो तीसरा विकल्प लाठीचार्ज का होता है। चौथे विकल्प में तौर पर आरएएफ वाटर कैनन का प्रयोग करती है। आखिरी विकल्प है फायरिंग।
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फायरिंग की विशेष ट्रेनिंग: आरएएफ को हवाई फायरिंग के अलावा भीड़ को 135 मीटर की दूरी से लो एंगिल पर गोली मारने का खास प्रशिक्षण दिया जाता है। इस एंगिल पर गोली चलाने पर उपद्रवी को घुटने के नीचे ही पैर में गोली लगती है।
म्यांमार के अधिकारी पहुंचे मेरठ
म्यांमार के पुलिस अधिकारी दंगों का इतिहास पढ़ने सोमवार को 108 वीं वाहिनी पहुंचे। 17 से 24 दिसंबर तक विदेश के सात अधिकारियों की टीम 108वीं वाहिनी आरएएफ में प्रशिक्षण लेगी। आरएएफ वाहिनी में आरएएफ एकेडमी ऑफ पब्लिक एकेडमी (रैपो) में इन्हें प्रशिक्षण के साथ अन्य अधिकारी लेक्चर भी देंगे। सोमवार शाम को विदेशी मेहमान सुभारती विवि भी पहुंचे। इस दौरान आरएएफ के कमांडेंट शैलेंद्र कुमार, डिप्टी कमांडेंट शिल्पा कुमार, असिस्टेंट कमांडेंट गौरव कुमार, सोनिया और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। मेरठ की यह वाहिनी विदेशी मेहमानों के प्रशिक्षण की नर्सरी बनने जा रही है। जल्द ही दूसरे देशों के चयनित अधिकारी यहां आकर प्रशिक्षण लेंगे।

आईजी आरएएफ मेरठ पहुंचे
सोमवार को आईजी आरएएफ अरुण कुमार भी मेरठ पहुंचे। वहीं एडीजी हेडक्वार्टर संजय अरोड़ा मंगलवार को आ सकते हैं। सीआरपीएफ के डीजी राजीव राय भटनागर को भी आना था, लेकिन वह किन्हीं कारणों से नहीं आ पाए।
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