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जन्माष्टमी के व्रत को पूर्ण करती है राधाष्टमी
Sat, 30 Aug 2025 08:41 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 30 Aug 2025 08:41 PM IST
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- आज कृष्ण भक्ति का प्रसाद देंगी वृषभानुजा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राधाष्टमी राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है। इन्हें माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इनका अवतार कमल के फूल से हुआ। भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में माना गया हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि आज शहर के सभी राधा कृष्ण मंदिरों में राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रियतमा राधा रानी का जन्म हुआ। जन्माष्टमी से ठीक 15 दिन बाद राधाष्टमी आती है। जैसे राधा के बिना श्याम अधूरे हैं। उसी प्रकार राधा अष्टमी के व्रत के बिना जन्माष्टमी का व्रत अधूरा है। मान्यताओं के अनुसार जो भक्त राधाष्टमी पर व्रत रखता है तथा विधि अनुसार राधा कृष्ण की पूजा उपासना करता है। उसे जन्माष्टमी के व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि ऐसा कहा जाता है कि राधाष्टमी पर व्रत रखने वाले जातकों को कभी धन धान्य की कमी नहीं होती है। इसके साथ इस दिन राधा रानी से मांगी गई हर एक मुराद पूरी होती है।
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श्री राधा रानी को भगवान श्री कृष्ण की शक्ति माना जाता है। कहते हैं राधा रानी संपूर्ण जगत को परम आनंद प्रदान करती है। राधा रानी को मोक्ष देने वाली, सौम्य और संपूर्ण जगत की जननी माना जाता है। राधा रानी द्वापर युग में प्रकट हुईं। उनका प्राकट्य मथुरा के रावल गांव में वृषभानु की यज्ञ स्थली के पास हुआ। उनकी माता का नाम कीर्ति और पिता का नाम वृषभानु है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राधाष्टमी राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है। इन्हें माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इनका अवतार कमल के फूल से हुआ। भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में माना गया हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि आज शहर के सभी राधा कृष्ण मंदिरों में राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रियतमा राधा रानी का जन्म हुआ। जन्माष्टमी से ठीक 15 दिन बाद राधाष्टमी आती है। जैसे राधा के बिना श्याम अधूरे हैं। उसी प्रकार राधा अष्टमी के व्रत के बिना जन्माष्टमी का व्रत अधूरा है। मान्यताओं के अनुसार जो भक्त राधाष्टमी पर व्रत रखता है तथा विधि अनुसार राधा कृष्ण की पूजा उपासना करता है। उसे जन्माष्टमी के व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।
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ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि ऐसा कहा जाता है कि राधाष्टमी पर व्रत रखने वाले जातकों को कभी धन धान्य की कमी नहीं होती है। इसके साथ इस दिन राधा रानी से मांगी गई हर एक मुराद पूरी होती है।
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श्री राधा रानी को भगवान श्री कृष्ण की शक्ति माना जाता है। कहते हैं राधा रानी संपूर्ण जगत को परम आनंद प्रदान करती है। राधा रानी को मोक्ष देने वाली, सौम्य और संपूर्ण जगत की जननी माना जाता है। राधा रानी द्वापर युग में प्रकट हुईं। उनका प्राकट्य मथुरा के रावल गांव में वृषभानु की यज्ञ स्थली के पास हुआ। उनकी माता का नाम कीर्ति और पिता का नाम वृषभानु है।