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Meerut News: कूड़ा निस्तारण प्लांट के टेंडर पर सवाल, समिति ही देगी रिपोर्ट
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- लोहियानगर में कूड़ा निस्तारण प्लांट के टेंडर में अनियमितता के आरोप पर विवाद
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लोहियानगर में कूड़ा निस्तारण प्लांट के टेंडर को लेकर नगर निगम की कार्यशैली एक बार फिर विवादों में आ गई है। शुक्रवार को यह मामला कमिश्नर हर्षिकेश भास्कर यशोद के सामने भी पहुंचा। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता हुई या नहीं, इसका रिपोर्ट समिति ही देगी। इससे नगर निगम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोहियानगर का कूड़ा समाप्त करने के लिए नगर निगम ने करोड़ों रुपये का टेंडर निकाला था। इस प्रक्रिया में चार कंपनियों ने भाग लिया था। टेंडर की तकनीकी व वित्तीय बोलियां भी खोली गईं। इसी दौरान एक कंपनी ने निगम पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए टेंडर प्रक्रिया को संदिग्ध बताया। इसके बाद महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नया टेंडर निकाला जाए। इसके बावजूद टेंडर निरस्त नहीं किया गया। चार दिन से इस टेंडर को लेकर निगम में घमासान चल रहा है। यह मामला शुक्रवार कमिश्नर के सामने भी पहुंच गया।
महापौर ने स्पष्ट कर दिया कि टेंडर की फाइनेंस बिड खोलने से पहले मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, ये नहीं हुए। तीन दिन से टेंडर प्रक्रिया अटकी हुई है। टेंडर होगा या नहीं, इसके बारे में निगम अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। नगर आयुक्त ने कहा है कि टेंडर की प्रक्रिया में अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी, मुख्य एवं वित्त लेखाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव व अधिशासी अभियंता निर्माण की संयुक्त समिति बनी है। समिति ही तय करेगी कि टेंडर निरस्त हो या नहीं।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लोहियानगर में कूड़ा निस्तारण प्लांट के टेंडर को लेकर नगर निगम की कार्यशैली एक बार फिर विवादों में आ गई है। शुक्रवार को यह मामला कमिश्नर हर्षिकेश भास्कर यशोद के सामने भी पहुंचा। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता हुई या नहीं, इसका रिपोर्ट समिति ही देगी। इससे नगर निगम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोहियानगर का कूड़ा समाप्त करने के लिए नगर निगम ने करोड़ों रुपये का टेंडर निकाला था। इस प्रक्रिया में चार कंपनियों ने भाग लिया था। टेंडर की तकनीकी व वित्तीय बोलियां भी खोली गईं। इसी दौरान एक कंपनी ने निगम पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए टेंडर प्रक्रिया को संदिग्ध बताया। इसके बाद महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नया टेंडर निकाला जाए। इसके बावजूद टेंडर निरस्त नहीं किया गया। चार दिन से इस टेंडर को लेकर निगम में घमासान चल रहा है। यह मामला शुक्रवार कमिश्नर के सामने भी पहुंच गया।
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महापौर ने स्पष्ट कर दिया कि टेंडर की फाइनेंस बिड खोलने से पहले मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, ये नहीं हुए। तीन दिन से टेंडर प्रक्रिया अटकी हुई है। टेंडर होगा या नहीं, इसके बारे में निगम अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। नगर आयुक्त ने कहा है कि टेंडर की प्रक्रिया में अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी, मुख्य एवं वित्त लेखाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव व अधिशासी अभियंता निर्माण की संयुक्त समिति बनी है। समिति ही तय करेगी कि टेंडर निरस्त हो या नहीं।
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