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300 करोड़ खर्च कर बिजली चोरी रोक रहा पीवीवीएनएल

Mon, 29 Jul 2019 03:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजदीप जाखड़, मेरठ
राजदीप जाखड़, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 29 Jul 2019 03:03 AM IST
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PVVNL stopping power theft by spending 300 crores
फाइल फोटो - फोटो : social media

मीटरों में शंट के माध्यम से हो रही करीब एक हजार करोड़ रुपये सालाना की बिजली चोरी रोकने के लिए पीवीवीएनएल स्मार्ट मीटरों पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। स्मार्ट मीटरों से बिजली चोरी रोकने के साथ ही 400 से ज्यादा मीटर रीडरों पर होने वाला खर्च भी बचाया जा सकेगा। कंपनी ने अब तक करीब एक लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगा दिए हैं।

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प्रदेश सरकार पर केंद्र सरकार की उदय योजना के अंतर्गत बिजलीघरों का लाइन लास 15 फीसदी से कम लाने का दबाव है। इस शर्त पर ही केंद्र सरकार प्रदेश की बिजली कंपनियों का ढांचा सुदृढ़ करने के लिए मोटी धनराशि दे रही है। लाइन लॉस कम करने और शत-प्रतिशत बिलिंग कर राजस्व लक्ष्य पूरा करने के लिए अब यूपीपीसीएल ने प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में स्मार्ट मीटर लगाने की व्यवस्था की है। 
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प्रदेश की सबसे समृद्ध और कमाऊ कंपनी पीवीवीएनएल में पहले चरण के तहत 10 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। इसकी शुरूआत हो चुकी है। केंद्र सरकार की कार्यदायी संस्था ईईएसएल को इस काम की जिम्मेदारी दी गई है। ईईएसएल इस कार्य को एलएंडटी से करा रही है। करीब 3 हजार रुपये प्रति स्मार्ट मीटर के हिसाब से 10 लाख मीटरों पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होना है।
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लाइनलॉस औसत 25 फीसदी से ज्यादा
पश्चिमांचल में बिजली चोरी और लाइन लॉस का औसत करीब 25 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन रामपुर, संभल, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर और मेरठ के ऐसे कई बिजलीघर क्षेत्र हैं जहां पर 50 फीसदी से ज्यादा लाइन लॉस दर्ज किए जाते हैं। कंपनी सूत्रों का कहना है कि मीटर में शंट के माध्यम से ही करीब एक हजार करोड़ रुपये की चोरी को अंजाम दिया जा रहा है। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद शंट की संभावना खत्म हो जाएगी। अगर कोई उपभोक्ता शंट लगाने की कोशिश करेगा उसकी जानकारी कंट्रोल रूम पहुंच जाएगी।

400 मीटर रीडर होंगे कम
वर्तमान में एक मीटर रीडर करीब 2500 मीटर चेक कर बिलिंग करता है। कंपनी में करीब 60 लाख उपभोक्ता है। बिलिंग के लिए करीब 2400 मीटर रीडर काम कर रहे हैं। दस हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से इन रीडरों पर प्रतिवर्ष करीब 28 करोड 80 लाख रुपये खर्च होते हैं। दस लाख स्मार्ट मीटर लगने के बाद करीब 400 मीटर रीडर कम हो जाएंगे। इस पर कंपनी के करीब 4 करोड़ 80 लाख रुपये बचेंगे।

संवेदनशील इलाकों में पहले लगाए जा रहे मीटर

पहले चरण में स्मार्ट मीटर ऐसे संवेदनशील इलाकों में ही लगाए जा रहे हैं जहां सर्वाधिक बिजली चोरी है और बिलिंग के लिए कनेक्शन चेक करने में दिक्कत होती है। मेरठ शहर में सबसे पहले इसकी शुरूआत विद्युत नगरीय वितरण खंड तृतीय से की गई है। इसके अलावा मुरादाबाद, संभल, रामपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर आदि में भी मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। अब तक कंपनी के सभी 14 जिलों में करीब एक लाख मीटर लगाए जा चुके हैं।

राजस्व में वृद्धि होगी
स्मार्ट मीटर लगने पर बेशक मोटा खर्च हो रहा है, लेकिन इनके लगने से न केवल मीटर रीडरों की जरूरत कम होगी बल्कि शत-प्रतिशत एवं शुद्ध बिलिंग होने लगेगी। ऑफिस में बैठे ही मीटर की रीडिंग का पता लग सकेगा। इसके अलावा इसमें छेड़छाड़ की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी। इससे कंपनी के राजस्व में अच्छी खासी वृद्धि होगी। - आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ

बोलते आंकड़े
पीवीवीएनएल में कुल उपभोक्ता              60 लाख
उपभोक्ताओं का लोड                   1 करोड़ 85 लाख 98 हजार किलोवाट
प्रति मीटर रीडर बिलिंग                    2500 कनेक्शन प्रतिमाह
कनेक्शनों के सापेक्ष मीटर रीडर    2400
मीटर रीडरों पर सालाना खर्च                 28.80 करोड़
10 लाख स्मार्ट मीटर खर्च                      300 करोड़ रुपये
स्मार्ट मीटर लगने पर कम होंगे रीडर          400
400 रीडर कम होने पर बचने वाला खर्च       4.80 करोड़
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