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Meerut News: पं. सुनील भराला की 55 सौ किमी की तीर्थ यात्रा संपन्न
Mon, 10 Nov 2025 09:17 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 10 Nov 2025 09:17 PM IST
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अरुणाचल प्रदेश में भगवान परशुराम कुंड व मां कामाख्या देवी के दर्शन कर किया पूजन
मोदीपुरम। पंडित सुनील भराला के नेतृत्व में 140 सदस्यीय दल ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के लोहित में भगवान परशुराम कुंड में पवित्र स्नान व पूजा-अर्चना की। इस पूजा के साथ उनकी 5500 किमी की यात्रा संपन्न हुई।
पंडित सुनील भराला ने बताया कि भगवान परशुराम कुंड का पौराणिक महत्व है। त्रेतायुग और सतयुग के संधिकाल में भगवान परशुराम ने अधर्म, अन्याय और अत्याचार का अंत करते हुए 21 दुराचारी राक्षसों का संहार किया था। भगवान परशुराम शोधन पीठ द्वारा रचित भगवान परशुराम चालीसा, भगवान परशुराम ग्रंथ का विमोचन बाबा हरिशरण दास ने किया। परशुराम संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें राष्ट्रीय परशुराम परिषद द्वारा भगवान परशुराम के आदर्शों, पराक्रम व राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर चर्चा की गई। भगवान परशुराम कुंड पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का सेमिनार बाबा हरिशरण दास व महामंडलेश्वर रूपेश प्रकाश महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। सेमिनार की अध्यक्षता प्रेम चंद्र ने की और संचालन रोशन भारद्वाज ने किया।
अरुणाचल प्रदेश के लोहित स्थित परशुराम कुंड से लौटने के बाद यात्रा दल गुवाहाटी पहुंचा और मां कामाख्या देवी के धाम में दर्शन व पूजन-अर्चन किया। सुनील भराला ने कहा कि यह 55 सौ किलोमीटर की यात्रा न केवल एक धार्मिक अभियान थी, बल्कि यह राष्ट्र एकता, संस्कार और सनातन चेतना के पुनर्जागरण की यात्रा थी। इस दौरान मुकेश भार्गव, वैभव पराशर, विनय शर्मा, अनुज शर्मा, नीलम पांडेय, अशोक शर्मा, जीवनानंद, कपिल आदि मौजूद रहे।
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मोदीपुरम। पंडित सुनील भराला के नेतृत्व में 140 सदस्यीय दल ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के लोहित में भगवान परशुराम कुंड में पवित्र स्नान व पूजा-अर्चना की। इस पूजा के साथ उनकी 5500 किमी की यात्रा संपन्न हुई।
पंडित सुनील भराला ने बताया कि भगवान परशुराम कुंड का पौराणिक महत्व है। त्रेतायुग और सतयुग के संधिकाल में भगवान परशुराम ने अधर्म, अन्याय और अत्याचार का अंत करते हुए 21 दुराचारी राक्षसों का संहार किया था। भगवान परशुराम शोधन पीठ द्वारा रचित भगवान परशुराम चालीसा, भगवान परशुराम ग्रंथ का विमोचन बाबा हरिशरण दास ने किया। परशुराम संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें राष्ट्रीय परशुराम परिषद द्वारा भगवान परशुराम के आदर्शों, पराक्रम व राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर चर्चा की गई। भगवान परशुराम कुंड पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का सेमिनार बाबा हरिशरण दास व महामंडलेश्वर रूपेश प्रकाश महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। सेमिनार की अध्यक्षता प्रेम चंद्र ने की और संचालन रोशन भारद्वाज ने किया।
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अरुणाचल प्रदेश के लोहित स्थित परशुराम कुंड से लौटने के बाद यात्रा दल गुवाहाटी पहुंचा और मां कामाख्या देवी के धाम में दर्शन व पूजन-अर्चन किया। सुनील भराला ने कहा कि यह 55 सौ किलोमीटर की यात्रा न केवल एक धार्मिक अभियान थी, बल्कि यह राष्ट्र एकता, संस्कार और सनातन चेतना के पुनर्जागरण की यात्रा थी। इस दौरान मुकेश भार्गव, वैभव पराशर, विनय शर्मा, अनुज शर्मा, नीलम पांडेय, अशोक शर्मा, जीवनानंद, कपिल आदि मौजूद रहे।
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