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चुनावी खर्च की बैठक में हंगामे के आसार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2017 02:05 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव के खर्च को लेकर प्रशासनिक टीम के आंकलन पर राजनीतिक दलों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्रत्याशियों के अनुसार प्रशासन ने अधिकांश मदों में दो से तीन गुना अधिक खर्च जोड़ा है। प्रत्याशियों के व्यय प्रभारियों का कहना है कि प्रशासनिक टीम ने मनमाना रवैया अपनाते हुए निर्वाचन आयोग की गाइड लाइन को भी दरकिनार कर दिया है।
विधानसभा चुनाव में एक प्रत्याशी के चुनाव खर्च की सीमा निर्वाचन आयोग ने 28 लाख रुपये तय की थी। अभी तक के आंकड़ों के अनुसार सभी प्रत्याशियों ने इसी सीमा के भीतर खर्च किया है। उधर जिला निर्वाचन कार्यालय की लेखा टीम ने भी इसी सीमा में खर्च दर्शाया है, लेकिन दोनों के आंकलन में बड़ा फर्क है। कई प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होंने चुनावी खर्च 12 लाख दिखाया है, लेकिन प्रशासनिक टीम ने आंकलन 17 लाख किया है। यह अंतर प्रत्याशियों पर आयकर विभाग की कार्रवाई करा सकता है। इसे लेकर अधिकांश प्रत्याशियों में रोष है। सबसे ज्यादा खर्च भाजपा प्रत्याशियों का दर्शाया गया है।
ये है अंतर का पैमाना
जिला निर्वाचन कार्यालय की लेखा टीम ने चुनाव में लगी एक कार का प्रतिदिन का खर्च 4000 रुपये आंका है, जबकि प्रत्याशियों ने इस खर्च को 1800 रुपये जोड़ा है। इसे लेकर सर्वाधिक खींचतान है। साथ ही लेखा टीम ने डीजल और ड्राइवर का वेतन अलग से जोड़ा है। उधर, प्रत्याशियों ने नामांकन फीस से अलग 25 से 50 हजार रुपये तक खर्च दर्शाया है, लेकिन प्रशासन ने इसे तीन लाख तक दर्शाया है। बिना झंडा लगी गाड़ियों को भी प्रत्याशी के खाते में जोड़ा गया है। चुनावी रैलियों के खर्च और झंडे आदि के खर्च को भी प्रत्याशियों के मद में जोड़ दिया गया, जबकि निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार यह खर्च पार्टी के हिस्से आता है। इस मामले पर सबसे ज्यादा आपत्ति भाजपा ने दर्ज कराई है। भाजपा की छह विधानसभाओं के व्यय प्रभारी राकेश गोयल का कहना है कि वह 20 साल से चुनावी व्यय देख रहे हैं। हर बार व्यय प्रेक्षक से उनकी मुलाकात कराई जाती थी, लेकिन इस बार जिला निर्वाचन अधिकारी ने किसी भी व्यय प्रेक्षक से मुलाकात नहीं कराई।
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छह अप्रैल को प्रस्तावित है बैठक
इस मामले में तत्कालीन डीएम ने छह अप्रैल को बैठक प्रस्तावित की है। आश्वासन दिया गया कि लेखा टीम और प्रत्याशियों के व्यय प्रभारियों की मौजूदगी में आपत्तियों का निस्तारण कर दिया जायेगा। तत्कालीन डीएम का ट्रांसफर हो चुका है और नए डीएम को इसकी जानकारी नहीं है, ऐसे में बैठक में हंगामा हो सकता है।
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विधानसभा चुनाव में एक प्रत्याशी के चुनाव खर्च की सीमा निर्वाचन आयोग ने 28 लाख रुपये तय की थी। अभी तक के आंकड़ों के अनुसार सभी प्रत्याशियों ने इसी सीमा के भीतर खर्च किया है। उधर जिला निर्वाचन कार्यालय की लेखा टीम ने भी इसी सीमा में खर्च दर्शाया है, लेकिन दोनों के आंकलन में बड़ा फर्क है। कई प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होंने चुनावी खर्च 12 लाख दिखाया है, लेकिन प्रशासनिक टीम ने आंकलन 17 लाख किया है। यह अंतर प्रत्याशियों पर आयकर विभाग की कार्रवाई करा सकता है। इसे लेकर अधिकांश प्रत्याशियों में रोष है। सबसे ज्यादा खर्च भाजपा प्रत्याशियों का दर्शाया गया है।
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ये है अंतर का पैमाना
जिला निर्वाचन कार्यालय की लेखा टीम ने चुनाव में लगी एक कार का प्रतिदिन का खर्च 4000 रुपये आंका है, जबकि प्रत्याशियों ने इस खर्च को 1800 रुपये जोड़ा है। इसे लेकर सर्वाधिक खींचतान है। साथ ही लेखा टीम ने डीजल और ड्राइवर का वेतन अलग से जोड़ा है। उधर, प्रत्याशियों ने नामांकन फीस से अलग 25 से 50 हजार रुपये तक खर्च दर्शाया है, लेकिन प्रशासन ने इसे तीन लाख तक दर्शाया है। बिना झंडा लगी गाड़ियों को भी प्रत्याशी के खाते में जोड़ा गया है। चुनावी रैलियों के खर्च और झंडे आदि के खर्च को भी प्रत्याशियों के मद में जोड़ दिया गया, जबकि निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार यह खर्च पार्टी के हिस्से आता है। इस मामले पर सबसे ज्यादा आपत्ति भाजपा ने दर्ज कराई है। भाजपा की छह विधानसभाओं के व्यय प्रभारी राकेश गोयल का कहना है कि वह 20 साल से चुनावी व्यय देख रहे हैं। हर बार व्यय प्रेक्षक से उनकी मुलाकात कराई जाती थी, लेकिन इस बार जिला निर्वाचन अधिकारी ने किसी भी व्यय प्रेक्षक से मुलाकात नहीं कराई।
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छह अप्रैल को प्रस्तावित है बैठक
इस मामले में तत्कालीन डीएम ने छह अप्रैल को बैठक प्रस्तावित की है। आश्वासन दिया गया कि लेखा टीम और प्रत्याशियों के व्यय प्रभारियों की मौजूदगी में आपत्तियों का निस्तारण कर दिया जायेगा। तत्कालीन डीएम का ट्रांसफर हो चुका है और नए डीएम को इसकी जानकारी नहीं है, ऐसे में बैठक में हंगामा हो सकता है।