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सरायकाजी में श्मशान की जमीन को लेकर हंगामा, धरने पर बैठे लोग
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सरायकाजी में जमीन के विवाद पर हंगामा, प्रदर्शन
मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र के सरायकाजी में श्मशान की जमीन को लेकर हुए विवाद के बाद दो पक्षों में हंगामा हो गया। एक पक्ष श्मशान की भूमि होने का दावा करता रहा तो दूसरे पक्ष ने ट्रस्ट की जमीन बताया। इस विवाद को लेकर काफी देर तक हंगामा चला और प्रदर्शन किया गया। हंगामे के दौरान पुलिस के साथ भी नोकझोंक हुई। एसीएम के पहुंचने के बाद मामला शांत हो पाया।
नगर निगम वार्ड-18 के सरायकाजी में एक स्थल पर कई साल से शवों का अंतिम संस्कार होता रहा है। चार दिन पहले यहां एक युवक के शव का अंतिम संस्कार हुआ, लेकिन बारिश होने के कारण व्यवस्था प्रभावित हो गई। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि सब मिलकर यहां दो नए चबूतरों का निर्माण करेंगे, साथ ही उन पर शेड भी डालेंगे।
शनिवार सुबह कुछ लोगों ने सफाई शुरू की। किसी ने पुलिस को सूचना दी। इंस्पेक्टर मेडिकल प्रमोद कुमार गौतम फोर्स के साथ पहुंचे और काम रुकवा दिया। इसके बाद पुलिस की ग्रामीणों की नोंकझोक शुरु हो गई। तभी एसीएम सिविल लाइन चंद्रेश कुमार और सीओ सिविल लाइन देवेश सिंह भी आ गए। ग्रामीणों से बात की तो वह चबूतरे और शेड का निर्माण कराने की बात पर अड़ गए। क्षेत्रीय पार्षद रविंद्र सिंह को भी बुला लिया गया। हंगामे के दौरान ग्रामीण इसे श्मशान की जमीन बता रहे थे, जबकि दूसरा पक्ष इसे ट्रस्ट की होने का दावा करता रहा।
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एक पक्ष जमीन को पूरनचंद मनोहरी देवी मेमोरियल ट्रस्ट की जमीन बता रहा था, वहीं पूर्व पार्षद जगपाल सिंह बौद्ध ने बताया कि यह जमीन औरंगशाहपुर डिग्गी निवासी माया देवी के नाम थी, जिन्होंने प्लॉट काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में उसे बेच दिया था। इसी में से 650 मीटर जमीन उनके द्वारा इस ट्रस्ट को दी गई थी। यह भी बताया गया कि यह जमीन सरायकाजी का रकबा नहीं है। यह कमालपुर में आती है। जबरन लोग इस पर शवों का दहन कर रहे थे, जबकि इनके लिए चाणक्यपुरी व जागृति विहार एक्सटेंशन क्षेत्र में श्मशान बने हैं।
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क्षेत्रीय पार्षद बोले, मैं जनता के साथ
नगर निगम वार्ड-18 के पार्षद रविंद्र सिंह ने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक विवाद बढ़ाने में जुटे हैं। 100 साल से अधिक समय से यहां शवों का अंतिम संस्कार होता आ रहा है। फिर क्यों इसे रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह जनता के साथ हैं। उधर, सामाजिक कार्यकर्ता पवन गुर्जर न भी इसे साजिश बताया। उन्होंने कहा कि जिस ट्रस्ट से इस जमीन को जोड़ा जा रहा है, वह विवादित है। जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है।
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कुछ लोग अनावश्यक निर्माण का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें समझाकर लौटा दिया गया। दरअसल, कागजों में भी यह जमीन श्मशान की जमीन नहीं है। पटवारी को बुलाकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई, जिसके बाद ग्रामीण खुद लौट गए। फिर भी कोई माहौल खराब करने का प्रयास करता है तो कार्रवाई की जाएगी। - देवेश सिंह, सीओ सिविल लाइन।
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मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र के सरायकाजी में श्मशान की जमीन को लेकर हुए विवाद के बाद दो पक्षों में हंगामा हो गया। एक पक्ष श्मशान की भूमि होने का दावा करता रहा तो दूसरे पक्ष ने ट्रस्ट की जमीन बताया। इस विवाद को लेकर काफी देर तक हंगामा चला और प्रदर्शन किया गया। हंगामे के दौरान पुलिस के साथ भी नोकझोंक हुई। एसीएम के पहुंचने के बाद मामला शांत हो पाया।
नगर निगम वार्ड-18 के सरायकाजी में एक स्थल पर कई साल से शवों का अंतिम संस्कार होता रहा है। चार दिन पहले यहां एक युवक के शव का अंतिम संस्कार हुआ, लेकिन बारिश होने के कारण व्यवस्था प्रभावित हो गई। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि सब मिलकर यहां दो नए चबूतरों का निर्माण करेंगे, साथ ही उन पर शेड भी डालेंगे।
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शनिवार सुबह कुछ लोगों ने सफाई शुरू की। किसी ने पुलिस को सूचना दी। इंस्पेक्टर मेडिकल प्रमोद कुमार गौतम फोर्स के साथ पहुंचे और काम रुकवा दिया। इसके बाद पुलिस की ग्रामीणों की नोंकझोक शुरु हो गई। तभी एसीएम सिविल लाइन चंद्रेश कुमार और सीओ सिविल लाइन देवेश सिंह भी आ गए। ग्रामीणों से बात की तो वह चबूतरे और शेड का निर्माण कराने की बात पर अड़ गए। क्षेत्रीय पार्षद रविंद्र सिंह को भी बुला लिया गया। हंगामे के दौरान ग्रामीण इसे श्मशान की जमीन बता रहे थे, जबकि दूसरा पक्ष इसे ट्रस्ट की होने का दावा करता रहा।
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एक पक्ष जमीन को पूरनचंद मनोहरी देवी मेमोरियल ट्रस्ट की जमीन बता रहा था, वहीं पूर्व पार्षद जगपाल सिंह बौद्ध ने बताया कि यह जमीन औरंगशाहपुर डिग्गी निवासी माया देवी के नाम थी, जिन्होंने प्लॉट काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में उसे बेच दिया था। इसी में से 650 मीटर जमीन उनके द्वारा इस ट्रस्ट को दी गई थी। यह भी बताया गया कि यह जमीन सरायकाजी का रकबा नहीं है। यह कमालपुर में आती है। जबरन लोग इस पर शवों का दहन कर रहे थे, जबकि इनके लिए चाणक्यपुरी व जागृति विहार एक्सटेंशन क्षेत्र में श्मशान बने हैं।
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क्षेत्रीय पार्षद बोले, मैं जनता के साथ
नगर निगम वार्ड-18 के पार्षद रविंद्र सिंह ने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक विवाद बढ़ाने में जुटे हैं। 100 साल से अधिक समय से यहां शवों का अंतिम संस्कार होता आ रहा है। फिर क्यों इसे रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह जनता के साथ हैं। उधर, सामाजिक कार्यकर्ता पवन गुर्जर न भी इसे साजिश बताया। उन्होंने कहा कि जिस ट्रस्ट से इस जमीन को जोड़ा जा रहा है, वह विवादित है। जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है।
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कुछ लोग अनावश्यक निर्माण का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें समझाकर लौटा दिया गया। दरअसल, कागजों में भी यह जमीन श्मशान की जमीन नहीं है। पटवारी को बुलाकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई, जिसके बाद ग्रामीण खुद लौट गए। फिर भी कोई माहौल खराब करने का प्रयास करता है तो कार्रवाई की जाएगी। - देवेश सिंह, सीओ सिविल लाइन।
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