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Meerut News: निजी स्कूलों की मनमानी जारी, हर स्कूल की अपनी दुकान तय

Fri, 28 Mar 2025 01:41 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Mar 2025 01:41 AM IST
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Private schools continue to be arbitrary, every school has its own shop
- किताबों के साथ स्टेशनरी लेने का भी अभिभावकाें पर दवाब, यूनिफार्म और बैग भी कुछ ही दुकानों से मिल रहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। निजी स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। भले ही शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद स्कूलों में किताबें नहीं बिक रही हो लेकिन शहर के हर स्कूल की दुकानें तय हैं। निजी स्कूलों की हर वर्ष बढ़ती फीस और महंगी होती किताबों का बोझ अभिभावकों का तनाव बढ़ा रहा है। प्राइवेट स्कूलों की किताबों के दाम आसमान छू रहे हैं, यह शिक्षा के व्यापार की ओर इशारा कर रहे हैं।
नया सत्र शुरू होते ही स्कूल हर वर्ष 5 से 10 प्रतिशत फीस बढ़ा देते हैं। हर वर्ष बच्चों को नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं, क्योंकि निजी स्कूल हर वर्ष बच्चों से नई किताबें मंगवाते हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि सभी स्कूलों ने दुकानें तय कर रखी है। कुछ स्कूलों ने तो पहली से पांचवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबोंं को ही नहीं लगाया है। वहीं छठीं से आठवीं तक कुछ किताबें एनसीईआरटी की है तो कुछ निजी प्रकाशकों की लगाई जा रही है। वहीं नौवीं से बारहवीं तक एनसीईआरटी पढ़ाई जा रही है। क्योंकि बोर्ड के पेपर एनसीईआरटी की किताबों से आते हैं। इसलिए स्कूलों को यह लेना मजबूरी है। क्योंकि एनसीईआरटी न पढ़ाने पर स्कूलों का परिणाम खराब हो सकता है। पहली कक्षा के सेट की बात करे तो वह एक हजार से बारह सौ रुपये तक का है। मनीष ने बताया कि यूनिफार्म और जूतों के दाम अधिक है और वह भी स्कूल द्वारा बताई गई दुकानों पर ही मिल रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की मनमानी पर रोक लगनी चाहिए।
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अन्य दुकानों पर नहीं मिल रही किताबें
मेरे दो बच्चे हैं, जिनकी किताब करीब 12 हजार रुपये की आई है। महंगी होने की वजह से दूसरी दुकानों पर तलाशा लेकिन वापस वहीं लौटकर आना पड़ा। कॉपी किताबों के साथ अन्य सामान पर भी दोगुने दाम पर मिल रहे हैं। प्रदीप सिंह अभिभावक
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एनसीईआरटी की केवल तीन किताबें
मेरी बेटी इस वर्ष छठी कक्षा में आई है। स्कूल की कॉपी और किताबें करीब 7 हजार रुपये की आई हैं। जिसमें एनसीईआरटी की मात्र तीन किताबें हैं। बाकी अन्य प्रकाशकों की हैं, जो काफी महंगी है। इतना ही नहीं एक दूसरे की किताबें ले भी नहीं सकते क्योंकि स्कूल हर साल बदलाव कर देते हैं। गौरव अभिभावक

स्कूल वाले बाध्य नहीं कर सकते
स्कूल संचालक किसी एक दुकान से किताबें और कॉपी खरीदने को बाध्य नहीं कर सकते। एक तय मानक के आधार पर ही दाम ले सकते हैं। कोई इसकी शिकायत करता है तो स्कूल पर कार्रवाई की जाएगी। - आशा चौधरी बेसिक शिक्षाधिकारी
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