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जागरूकता से रोकें गर्भपात से होने वाली मौतें
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जागरूकता से रोकें गर्भपात के दौरान होने वाली मौतें
मेरठ। भारत में प्रतिवर्ष करीब 1.56 करोड़ गर्भपात होते हैं और हर 2 घंटे में असुरक्षित गर्भपात के कारण एक महिला की मृत्यु हो जाती है। इनमें से लगभग दो तिहाई गर्भपात स्वास्थ्य संस्थाओं के बाहर होते हैं। गर्भपात के दौरान महिलाओं को मौत से बचाने और जागरूकता के लिए सोमवार को सीएमओ कार्यालय में सुरक्षित गर्भ समापन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का आयोजन ग्रामीण समाज विकास केंद्र संस्था और साझा प्रयास नेटवर्क के सहयोग से किया गया। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया गया कि उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष होने वाले कुल 31 लाख गर्भपात में से सिर्फ 11 प्रतिशत ही स्वास्थ्य केन्द्रों में होते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित गर्भ समापन से समय-समय पर अपने अधीनस्थ एवं जनसामान्य को जागरूक करें। साथ ही समस्त एएनएम, आशाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कानूनी जानकारी दें, जिससे भ्रांतियों को दूर कर उन्हें जागरूक किया जा सकें।
एसीएमओ डा. पूजा शर्मा ने बताया कि महिलाएं जानकारी के अभाव में घरेलू नुस्खों एवं स्वयं मेडिकल स्टोर से दवा लेने के कारण गंभीर जटिलताओं का सामना करती हैं। कार्यशाला में समस्त स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी, डॉक्टर और स्वयंसेवी संस्थाएं आदि उपस्थित रहे।
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मेरठ। भारत में प्रतिवर्ष करीब 1.56 करोड़ गर्भपात होते हैं और हर 2 घंटे में असुरक्षित गर्भपात के कारण एक महिला की मृत्यु हो जाती है। इनमें से लगभग दो तिहाई गर्भपात स्वास्थ्य संस्थाओं के बाहर होते हैं। गर्भपात के दौरान महिलाओं को मौत से बचाने और जागरूकता के लिए सोमवार को सीएमओ कार्यालय में सुरक्षित गर्भ समापन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का आयोजन ग्रामीण समाज विकास केंद्र संस्था और साझा प्रयास नेटवर्क के सहयोग से किया गया। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया गया कि उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष होने वाले कुल 31 लाख गर्भपात में से सिर्फ 11 प्रतिशत ही स्वास्थ्य केन्द्रों में होते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित गर्भ समापन से समय-समय पर अपने अधीनस्थ एवं जनसामान्य को जागरूक करें। साथ ही समस्त एएनएम, आशाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कानूनी जानकारी दें, जिससे भ्रांतियों को दूर कर उन्हें जागरूक किया जा सकें।
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एसीएमओ डा. पूजा शर्मा ने बताया कि महिलाएं जानकारी के अभाव में घरेलू नुस्खों एवं स्वयं मेडिकल स्टोर से दवा लेने के कारण गंभीर जटिलताओं का सामना करती हैं। कार्यशाला में समस्त स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी, डॉक्टर और स्वयंसेवी संस्थाएं आदि उपस्थित रहे।
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