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करोड़ों की संपत्ति में फिर हेराफेरी की तैयारी
Sun, 30 Jun 2019 02:11 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Sun, 30 Jun 2019 02:11 AM IST
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मेरठ में घंटाघर स्थित नगर निगम की संपत्ति पालिका बाजार की तीन दुकानों के नाम परिवर्तन की तैयारी चल रही है। जिससे निगम को लाखों रुपये का चूना लगने वाला है। बताया जा रहा है कि इन दुकानों को पहले की तरह पार्टनर दर्शाकर बेचने की मिलीभगत चल रही है।
शहर में नगर निगम की करोड़ों की संपत्ति खुर्द-बुर्द हो चुकी है। जहां पाल होटल का अवैध तरीके से निर्माण करके मार्केट बन चुकी है। वहीं, पालिका बाजार की दुकानों को मुख्य आवंटी ने दूसरों को लाखों रुपये में बेच दिया है। इतना ही नहीं, नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारियों ने मिलकर दुकानों को दूसरे व्यक्ति को मुख्य आवंटी का पार्टनर दर्शाकर उसके नाम कर दिया। दुकानों की खरीद फरोख्त का मामला कई बार सदन में भी गूंजा। लेकिन इसका कोई असर किराया विभाग के अधिकारी और लिपिकों पर नहीं पड़ा।
दरअसल महानगर में निगम की घंटाघर पालिका बाजार, भगत सिंह मार्केट, सूरजकुंड मार्केट, शारदा रोड स्थित सरदार पटेल स्कूल के बाहर सहित अनेकों स्थानों पर मार्केट और दुकानें हैं। नियमानुसार नगर निगम ने जिस किराएदार को दुकान दी है, उस दुकान में वही व्यक्ति कार्य कर सकता है। उसी व्यक्ति के नाम से नगर निगम खजाने में दुकान का किराया जमा होगा। अगर कोई दूसरा व्यक्ति उसमें काम करता है या फिर मूल किराएदार से 100 रुपये के स्टांप पेपर पर खरीद लेता है और साठगांठ करके नगर निगम का किराएदार बन जाता है तो वह गलत है। जबकि नगर निगम की दुकानों में इस तरह से ही गोलमाल किया जा रहा है। अनेकों दुकानों को इसी प्रकार बदल दिया गया है।
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तीन दुकानों में खेल की तैयारी
पालिका बाजार में फ्रंट की तीन दुकानें काफी समय से बंद पड़ी थीं। अन्य दुकानों की तर्ज पर इन दुकानों के मूल आवंटी का दूसरे व्यक्ति को पार्टनर दर्शाकर नाम परिवर्तन की तैयारी चल रही है। जो निगम में चर्चाओं का विषय बना है। दुकानों में रात को फर्नीचर लगाने का काम भी चल रहा है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सत्ताधारी नेताओं का अधिकारियों पर दबाव है। कई बार फाइल पर मंथन हो चुका है।
फाइल पर कार्रवाई नहीं
- किसी दुकान की किराएदारी परिवर्तित नहीं की जा रही है। यह मामला उठा जरूर था। लेकिन फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। -संतोष शर्मा, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी नगर निगम
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शहर में नगर निगम की करोड़ों की संपत्ति खुर्द-बुर्द हो चुकी है। जहां पाल होटल का अवैध तरीके से निर्माण करके मार्केट बन चुकी है। वहीं, पालिका बाजार की दुकानों को मुख्य आवंटी ने दूसरों को लाखों रुपये में बेच दिया है। इतना ही नहीं, नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारियों ने मिलकर दुकानों को दूसरे व्यक्ति को मुख्य आवंटी का पार्टनर दर्शाकर उसके नाम कर दिया। दुकानों की खरीद फरोख्त का मामला कई बार सदन में भी गूंजा। लेकिन इसका कोई असर किराया विभाग के अधिकारी और लिपिकों पर नहीं पड़ा।
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दरअसल महानगर में निगम की घंटाघर पालिका बाजार, भगत सिंह मार्केट, सूरजकुंड मार्केट, शारदा रोड स्थित सरदार पटेल स्कूल के बाहर सहित अनेकों स्थानों पर मार्केट और दुकानें हैं। नियमानुसार नगर निगम ने जिस किराएदार को दुकान दी है, उस दुकान में वही व्यक्ति कार्य कर सकता है। उसी व्यक्ति के नाम से नगर निगम खजाने में दुकान का किराया जमा होगा। अगर कोई दूसरा व्यक्ति उसमें काम करता है या फिर मूल किराएदार से 100 रुपये के स्टांप पेपर पर खरीद लेता है और साठगांठ करके नगर निगम का किराएदार बन जाता है तो वह गलत है। जबकि नगर निगम की दुकानों में इस तरह से ही गोलमाल किया जा रहा है। अनेकों दुकानों को इसी प्रकार बदल दिया गया है।
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तीन दुकानों में खेल की तैयारी
पालिका बाजार में फ्रंट की तीन दुकानें काफी समय से बंद पड़ी थीं। अन्य दुकानों की तर्ज पर इन दुकानों के मूल आवंटी का दूसरे व्यक्ति को पार्टनर दर्शाकर नाम परिवर्तन की तैयारी चल रही है। जो निगम में चर्चाओं का विषय बना है। दुकानों में रात को फर्नीचर लगाने का काम भी चल रहा है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सत्ताधारी नेताओं का अधिकारियों पर दबाव है। कई बार फाइल पर मंथन हो चुका है।
फाइल पर कार्रवाई नहीं
- किसी दुकान की किराएदारी परिवर्तित नहीं की जा रही है। यह मामला उठा जरूर था। लेकिन फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। -संतोष शर्मा, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी नगर निगम