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प्रतिबंध होने के बावजूद जमकर लगाए जा रहे सबमर्सिबल, अधिकारी कर रहे वसूली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Nov 2016 01:29 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में सबमर्सिबल पर प्रतिबंध होने के बावजूद जमकर सबमर्सिबल लगाए जा रहे हैं। जबकि शहर में गंगाजल परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद ये सबमर्सिबल बेकार हो जाएंगे। वर्तमान में भी शहर के एक बड़े इलाके को गंगाजल मिल रहा है। भविष्य में 45 क्यूसेक गंगाजल मिलेगा।
2010 में जेएनएनयूआरएम योजना शुरू हुई थी। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के साथ गिरते भूगर्भ जल स्तर को रोकना है। योजना में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये खर्च होने बाद भी शहर की समस्त जनता को न तो स्वच्छ पानी ही मिल पा रहा है और न ही गिरते भूगर्भ जल स्तर को रोका जा रहा है। वहीं नगर निगम और जल निगम के अधिकारी हैंडपंप, ट्यूबवेल और सबमर्सिबल लगाने के नाम पर लाखों की बंदरबांट कर रहे हैं। जबकि 2013 में जिला प्रशासन गिरते भूगर्भ जल स्तर का हवाला देते हुए नए सबमर्सिबल लगाने पर प्रतिबंध लगा चुका है। अगर हम तीन साल में लगे हैंडपंपों की बात करें तो हर गली मोहल्ले में वन एचपी और 10 एचपी के सबमर्सिबल लगा दिए गए हैं। बाकी बची गलियों में जगह-जगह हैंडपंप लगाए गए हैं। अब सवाल उठता है कि जब शहर में गंगाजल योजना है तो सबमर्सिबल क्यों लगाए जा रहे हैं।
1.78 लाख में एक सबमर्सिबल
जलकल विभाग शहर में वन एचपी और 10 एचपी के सबमर्सिबल लगा रहा है। पहले जहां 10 एचपी सबमर्सिबल को लगाने पर 2.12 लाख खर्च किए जाते थे तो अब उसका रेट घटाकर 1.78 लाख कर दिया है।
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शहर में ये हैं जल संसाधन
वन एचपी और 10 एचपी के 275 सबमर्सिबल।
341.30 करोड़ रुपये गंगाजल लाइन पर खर्च।
21.04 किलोमीटर है मुख्य लाइन।
725 किलोमीटर में बिछाई गई डिस्ट्रीब्यूशन लाइन।
10 हजार हैं हैंडपंप।
जांच कराकर कार्रवाई कराएंगे
हमने सख्त निर्देश दिए हैं कि जहां पर गंगाजल पाइप लाइन डल चुकी है या फिर पहले से ही सबमर्सिबल और हैंडपंप लगे हैं। पानी की भी दिक्कत नहीं है। उन सभी क्षेत्रों में न तो हैंडपंप लगेगा और न ही सबमर्सिबल। अगर कहीं पर गलत तरीके से लगाए जा रहे हैं तो हम जांच करके कार्रवाई करेंगे। देवेंद्र कुमार कुशवाहा, नगरायुक्त
जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर लगाए
उन इलाकों में सबमर्सिबल नहीं लगाए जा रहे हैं जहां पर गंगाजल पाइप लाइन चालू हो चुकी है। जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर पार्क आदि सार्वजनिक स्थानों पर हो सकता है कुछ हैंडपंप या सबमर्सिबल लगे हों। उसकी हम अधिशासी अभियंता से रिपोर्ट लेेंगे। संजीव रामचंद्र, महाप्रबंधक जल
कार्रवाई के शासन को लिखेंगे
जहां पर गंगाजल की पाइप लाइन है, वहां पर सबमर्सिबल लगाया जाना उचित नहीं है। अगर गलत तरीके से लगाए गए हैं तो कार्रवाई के लिए शासन को लिखेंगे। हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
धन की बंदरबांट हो रही
जहां पर गंगाजल आ रहा है वहां नए सबमर्सिबल लगाने ही नहीं चाहिए। अगर सबमर्सिबल लगाए जाते हैं तो सीधे सीधे धन की बंदरबांट है। जाहिद अंसारी, पूर्व पार्षद एवं कांग्रेसी नेता
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2010 में जेएनएनयूआरएम योजना शुरू हुई थी। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के साथ गिरते भूगर्भ जल स्तर को रोकना है। योजना में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये खर्च होने बाद भी शहर की समस्त जनता को न तो स्वच्छ पानी ही मिल पा रहा है और न ही गिरते भूगर्भ जल स्तर को रोका जा रहा है। वहीं नगर निगम और जल निगम के अधिकारी हैंडपंप, ट्यूबवेल और सबमर्सिबल लगाने के नाम पर लाखों की बंदरबांट कर रहे हैं। जबकि 2013 में जिला प्रशासन गिरते भूगर्भ जल स्तर का हवाला देते हुए नए सबमर्सिबल लगाने पर प्रतिबंध लगा चुका है। अगर हम तीन साल में लगे हैंडपंपों की बात करें तो हर गली मोहल्ले में वन एचपी और 10 एचपी के सबमर्सिबल लगा दिए गए हैं। बाकी बची गलियों में जगह-जगह हैंडपंप लगाए गए हैं। अब सवाल उठता है कि जब शहर में गंगाजल योजना है तो सबमर्सिबल क्यों लगाए जा रहे हैं।
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1.78 लाख में एक सबमर्सिबल
जलकल विभाग शहर में वन एचपी और 10 एचपी के सबमर्सिबल लगा रहा है। पहले जहां 10 एचपी सबमर्सिबल को लगाने पर 2.12 लाख खर्च किए जाते थे तो अब उसका रेट घटाकर 1.78 लाख कर दिया है।
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शहर में ये हैं जल संसाधन
वन एचपी और 10 एचपी के 275 सबमर्सिबल।
341.30 करोड़ रुपये गंगाजल लाइन पर खर्च।
21.04 किलोमीटर है मुख्य लाइन।
725 किलोमीटर में बिछाई गई डिस्ट्रीब्यूशन लाइन।
10 हजार हैं हैंडपंप।
जांच कराकर कार्रवाई कराएंगे
हमने सख्त निर्देश दिए हैं कि जहां पर गंगाजल पाइप लाइन डल चुकी है या फिर पहले से ही सबमर्सिबल और हैंडपंप लगे हैं। पानी की भी दिक्कत नहीं है। उन सभी क्षेत्रों में न तो हैंडपंप लगेगा और न ही सबमर्सिबल। अगर कहीं पर गलत तरीके से लगाए जा रहे हैं तो हम जांच करके कार्रवाई करेंगे। देवेंद्र कुमार कुशवाहा, नगरायुक्त
जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर लगाए
उन इलाकों में सबमर्सिबल नहीं लगाए जा रहे हैं जहां पर गंगाजल पाइप लाइन चालू हो चुकी है। जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर पार्क आदि सार्वजनिक स्थानों पर हो सकता है कुछ हैंडपंप या सबमर्सिबल लगे हों। उसकी हम अधिशासी अभियंता से रिपोर्ट लेेंगे। संजीव रामचंद्र, महाप्रबंधक जल
कार्रवाई के शासन को लिखेंगे
जहां पर गंगाजल की पाइप लाइन है, वहां पर सबमर्सिबल लगाया जाना उचित नहीं है। अगर गलत तरीके से लगाए गए हैं तो कार्रवाई के लिए शासन को लिखेंगे। हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
धन की बंदरबांट हो रही
जहां पर गंगाजल आ रहा है वहां नए सबमर्सिबल लगाने ही नहीं चाहिए। अगर सबमर्सिबल लगाए जाते हैं तो सीधे सीधे धन की बंदरबांट है। जाहिद अंसारी, पूर्व पार्षद एवं कांग्रेसी नेता