सरूरपुर। क्षेत्र कोल्हुओं पर ईंधन के रूप में प्लास्टिक व पॉलीथिन का प्रयोग किया जा रहा है। जिससे निकला धुआं पर्यावरण का दूषित कर रहा है। लोगों के मुताबिक धुअें के चलते गांव में रहना मुश्किल हो रहा है। कई बार क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी से की जा चुकी है।
ग्रामीण क्षेत्र में कई दर्जन कोल्हू जहर उगल रहे हैं। कोई भी संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार सरूरपुर, डाहर, जसड़ सुल्तान नगर, भूनी, रासना, बाड़म, रिठाली में पॉलीथिन जलाई जा रही है। ग्रामीण राजकुमार, राहुल कुमार, अशफाक, मुकेश कुमार, सोनू त्यागी, नईम आदि के मुताबिक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केवल खेतों में जलने वाली पराली को प्रदूषण का मुख्य कारण मान रहा है। हालांकि सरूरपुर और रोहटा क्षेत्र में करीब दो दर्जन कोल्हू जहरीला धुआं उगल रहे हैं। इनकी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नजर नहीं है। सीजन के शुरुआत में ही प्रशासन ने कोल्हू चलाने के लिए कुछ मानक तैयार किए थे। हालांकि वे आदेश चिमनी के धुएं में उड़ते दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्र में कई कोल्हू आबादी क्षेत्र में हैं। बिना मानकों के धड़ल्ले से चल रहे हैं। धूप नहीं निकलने से गन्ने की खोई नहीं सूख पा रही है। ऐसे में कोल्हुओं में प्लास्टिक, पालीथिन एवं रबर आदि जलाई जा रही है। किसी भी कोल्हू पर अभी तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई नहीं की है। सीएचसी सरूरपुर प्रभारी डॉ. ओपी जयसवाल के मुताबिक पॉलीथिन और प्लास्टिक को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने से निकलने वाला धुआं सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।