फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Police will not make final report in dowry harassment cases,high court will take judgments

दहेज उत्पीड़न के मुकदमों में अब पुलिस नहीं लगाएगी फाइनल रिपोर्ट, केवल हाईकोर्ट को होगा अधिकार

Wed, 23 Jan 2019 11:00 AM IST
Priyesh Mishra गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 23 Jan 2019 11:00 AM IST
विज्ञापन
Police will not make final report in dowry harassment cases,high court will take judgments
उत्पीड़न
सांठगांठ कर मुकदमों में पुलिस द्वारा फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाने का खेल अब खत्म हो गया हैं। दहेज उत्पीड़न और वैवाहिक विवाद के पक्षकारों के मध्य समझौता भी मंजूर नहीं होगा। डीआईजी अखिलेश कुमार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार ऐसे मुकदमों में एफआर केवल हाईकोर्ट के आदेश पर ही मान्य होगी। इसके निर्देश सभी थाना प्रभारियों और सीओ को दे दिए गए हैं। किसी भी विवेचक ने समझौते पर भी मुहर लगाई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
विज्ञापन


फर्जी मुकदमों से रिश्तों में दरार 
रिश्तों की डोर बेहद नाजुक होती है। आरोप लगते हैं कि अधिकांश मामलों में शक और दूसरों के कहने पर छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर दहेज उत्पीड़न सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करा दिया जाता है। ऐसे मुकदमों का ग्राफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेजी से चढ़ा है।
विज्ञापन


अधिकांश मुकदमों में आरोपों का फर्जी निकलना और फिर पुलिस द्वारा सांठगांठ कर ऐसे मुकदमे में एफआर लगाने का यह खेल सबसे ज्यादा चल रहा है। मुकदमा दर्ज होने पर दोनों परिवार के रिश्तों में हमेशा के लिए खटास आ जाती है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने और जेल तक जाने से अधिकांश रिश्ते फिर से नहीं जुड़ पाते।
विज्ञापन
विज्ञापन

थानों में रिश्वत का खेल
वेस्ट यूपी में दहेज उत्पीड़न के फर्जी मुकदमे दर्ज कराने का सबसे ज्यादा चलन है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अकेले मेरठ जिले में ऐसे करीब 800 मुकदमे हर साल दर्ज होते है। पुलिस विभाग की समीक्षा के मुताबिक इन मुकदमों से करीब 70 फीसदी फर्जी होते हैं। रिपोर्ट दर्ज होते ही दोनों परिवार के लोग समझौते की पटकथा तैयार करने लगते हैं। पुलिस भी इसमें शामिल होती है। रिश्वत मिलते ही मुकदमे में एफआर लगाकर उसे कोर्ट भेज दिया जाता है। अब न्यायालय की गाइड लाइन है कि आरोप सही हैं या गलत, पुलिस एफआर नहीं लगाएगी।

89 मुकदमों पर लटकी तलवार 
मेरठ जिले में दहेज उत्पीड़न के करीब 89 मुकदमों पर तलवार लटक गई है। जिसमें 50 फीसदी मुकदमों में पुलिस सांठगांठ कर एफआर  की तैयारी में लगी थी। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता। केस में एफआर लगनी है या नहीं, यह सब कोर्ट ही तय करेगी। इस मामले में डीजीपी ने सभी जिला प्रमुखों को यह गाइड लाइन भेजी है।  

दुरुपयोग बंद होगा
डीआईजी अखिलेश कुमार का कहना है कि पहले फर्जी मुकदमा दर्ज कराया और फिर दोनों पक्षों में समझौता कर केस में एफआर लगाकर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। दहेज उत्पीड़न के 70 फीसदी मुकदमे पुलिस जांच में फर्जी पाए गए हैं। उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी।

जल्द ही की जाएगी गोष्ठी
वैवाहिक विवाद से जुड़े मुकदमों में पुलिस एफआर न लगाए। चार्जशीट दाखिल करके कोर्ट में प्रस्तुत करे। कोर्ट ही तय करेगी कि दंपति में फैसला होना है या नहीं।  सरकारी मशीनरी और कोर्ट का समय खराब करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed