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यूपी बड़ौत में चल रहे धरने पर आधी रात पहुंची पुलिस, बल प्रयोग कर किसानों को दौड़ाया

Thu, 28 Jan 2021 12:01 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 28 Jan 2021 12:01 AM IST
सार

- किसानों ने कहा कि दिल्ली हिंसा के नाम पर उन्हें दबाने और डराने की कोशिश
- बड़ौत धरने में किया एलान, 31 जनवरी को होगी किसानों की महापंचायत

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police used force on farmers protesting against Agriculture Law in Barot up
किसानों को दौड़ाती पुलिस - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बड़ौत में कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरने को समाप्त कराने के लिए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधिमंडल से करीब ढाई घंटे तक बातचीत की। बातचीत बेनतीजा रही। वहीं बुधवार देर रात पहुंची पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए धरने पर बैठे किसानों को दौड़ा दिया। इस दौरान कुछ किसान अपनी साइकिल उठाकर वहां से निकल गए तो कुछ किसान अपनी रजाई समेटते हुए पैदल ही भागते दिखाई दिए।
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किसानों ने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन लाल किले के प्रकरण का हवाला लेकर उन्हें दबाने और डराने की कोशिश कर रहा है। इसके विरोध में 31 जनवरी को महापंचायत बुलाई जाएगी। किसानों को बदनाम करने की कोशिश सफल नहीं होने देंगे। 
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बुधवार को तहसील बड़ौत के एसडीएम कक्ष मेें एडीएम अमित कुमार, एएसपी मनीष कुमार मिश्र, एसडीएम दुर्गेश मिश्र, सीओ आलोक सिंह ने किसानों के प्रतिनिधि थांबेदार ब्रजपाल सिंह, चौबासी खाप चौधरी सुभाष सिंह, आचार्य बलजोर सिंह आर्य, विक्रम आर्य और विश्वास चौधरी से बातचीत की।
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पुलिस-प्रशासन का कहना था कि धरना समाप्त कर दें। किसानों का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन ने यह भी दबाव बनाया कि दिल्ली में यहां के किसानों ने भी हंगामा किया है, जिन्हें चिह्नित किया जा रहा है।

बातचीत ढाई घंटे तक चली। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि किसानों से मशवरा किया जाएगा। आंदोलन किसी एक का नहीं है, इसलिए जब तक सभी किसान सहमत नहीं होंगे, वह यहां से धरना नहीं उठा सकते। दिल्ली में हुए हंगामे में बागपत का कोई किसान नहीं था। असामाजिक तत्वों ने वहां पर माहौल बिगाड़ा है, पुलिस उन्हें पकड़े, किसानों को झूठा बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।

इसके बाद किसान धरनास्थल पर पहुंचे। धरने पर पहुंचकर अधिकारियों के साथ हुई वार्ता का हाल किसानों को बताया गया। किसानों में रोष व्याप्त हो गया। उधर देर रात प्रशासन के आदेश पर पुलिस ने धरनास्थल पहुंचकर किसानों को जबरन वहां से उठाया। इस दौरान पुलिस ने किसानों पर हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान कई किसान मामूली रूप से घायल भी हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट जयवीर सिंह तोमर ने बताया कि किसान शांतिपूर्ण धरना कर रहे हैं। जिले का प्रत्येक किसान निर्दोष है। सरकार असली दोषियों को पकड़ें। तय किया गया कि 31 जनवरी को महापंचायत होगी। इस दौरान दरियाव सिंह, पूर्व विधायक वीरपाल राठी, पूर्व विधायक अजय, सुरेश मलिक, विकास बाछौड़, विनोद, सतबीर सिंह, सभासद आशुतोष तोमर विकास मलिक एडवोकेट, सुमेर आर्य, विपिन ढिकाना, अशोक, ओमप्रकाश मौजूद रहे।

हिंसक झड़प में शामिल किसानों की होगी जांच 
दिल्ली की ट्रैक्टर रैली में शामिल होने के लिए गए जिले के कुछ किसान भी जांच के दायरे में आ गए हैं।  पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर झड़प में शामिल रहे किसानों की पहचान कर रही है।
जिले से बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों पर सवार होकर किसान गाजीपुर और सिंघु बार्डर गए थे। दिल्ली में हिंसक झड़प के बाद किसान वापस लौट आए हैं।

दिल्ली पुलिस ने मुकदमें दर्ज करने शुरू कर दिए हैं और किसानों की पहचान की जा रही है। स्थानीय पुलिस को इनपुट मिला है कि जिले के कुछ किसान भी लाल किले पर पहुंचे थे।  इन किसानों की भूमिका की जांच की जाएगी। एसपी अभिषेक सिंह का कहना है कि दिल्ली पुलिस अगर सहयोग मांगती है तो पूरी जानकारी दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर सूचनाएं एकत्र की जा रही है। 

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