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स्वतंत्रा सेनानी के मकान में पुलिस ने की थाना खोलने की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
Updated Fri, 11 Sep 2015 03:08 AM IST
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जिस गंगानगर चौकी में जल्द थाना खुलने जा रहा है, वहां दो दशक पहले लाखों रुपये डकैती पड़ी थी। उस समय सुरक्षा के लिहाज से पुलिस को घर का एक कमरा दे दिया गया था। लेकिन पुलिस ने कमरा खाली करने के बजाए बराबर की जमीन पर एक और कमरा बनाकर चौकी ही खोल दी। पुलिस प्रशासन भले ही यहां थाने का उद्घाटन करने की तैयारी में है, लेकिन यह सरकारी रिकॉर्ड में पुलिस के नाम ही नहीं है।
स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल मेमोरियल ट्रस्ट के महासचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेशचंद गर्ग का कहना है कि 1974 में लखनऊ से सोसायटी को रजिस्टर्ड कराया गया था। जिसमें राधा गार्डन कॉलोनी, गंगानगर के लिए 400 प्लाट थे। उसके बाद मेरठ विकास प्राधिकरण ने नक्शे बनाने क ा काम शुरू कर दिया। 21 मार्च 1993 को उनके घर पर 16 बदमाशों ने डाका डाल लिया था। जिसमें वह और उनका बेटा बुरी तरह से जख्मी हो गए थे।
उस समय की वह बड़ी वारदात थी। जिसके चलते तत्कालीन डीआईजी शैलेंद्र कुमार को मौके पर पहुंचना पड़ा था। दो दशक पहले गंगानगर और आसपास का क्षेत्र सुनसान था। राधा गार्डन कॉलोनी में सिर्फ उनके मकान के अलावा तीन मकान और बने हुए थे। जिसके चलते सुरेश चंद गर्ग के बड़े भाई स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल गर्ग ने तत्कालीन डीआईजी को सुरक्षा के लिए मेन रोड पर स्थित एक कमरा सुरक्षा के लिए दे दिया था। इंचौली थाना दूर होने कि चलते कमरे में चार सिपाही तैनात कर दिए गए थे।
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फिर चौकी ही मान ली
बाद में पुलिस महकमे ने उस कमरे को चौकी ही मान लिया। बीस साल से कमरे में पुलिस चौकी चल रही है। स्वतंत्रता सेनानी ने कमरा तो सुरक्षा के लिए दिया, लेकिन पुलिस ने कमरे के बराबर में भी जमीन पर कब्जा कर दूसरा कमरा बना दिया। साथ ही मेन रोड की तरफ टायल्स लगा दी। सुरेश चंद गर्ग का कहना है कि यह जगह उनके परिवार की थी। पुलिस के नाम यह दर्ज नहीं है। अब पुलिस इस पर थाना खोलेगी और बाद में सड़क और आसपास की जगह पर भी अतिक्रमण किया जाएगा। वैसे कायदे से तो चौकी भी अवैध रूप से चल रही है।
16 साल की उम्र में गए थे जेल
मेरठ। स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल गर्ग का जन्म 13 अप्रैल 1925 को परीक्षितगढ़ में हुआ था। 16 अगस्त 1942 को मवाना तहसील में हुए बर्बर गोलीकांड में वह बाल-बाल बचे, लेकिन देशसेवा से पीछे नहीं हटे। 21 अगस्त 1942 से 23 फरवरी 1943 तक मेरठ जेल में बंद रहे। 1975 में आपातकाल घोषित होने पर उन्हें फिर नजरबंद कर दिया। 1994-95 में मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए। 1994 में उन्हें सुभाष रत्न व 1996 में मेरठ रत्न से सुशोभित किया गया था।
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स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल मेमोरियल ट्रस्ट के महासचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेशचंद गर्ग का कहना है कि 1974 में लखनऊ से सोसायटी को रजिस्टर्ड कराया गया था। जिसमें राधा गार्डन कॉलोनी, गंगानगर के लिए 400 प्लाट थे। उसके बाद मेरठ विकास प्राधिकरण ने नक्शे बनाने क ा काम शुरू कर दिया। 21 मार्च 1993 को उनके घर पर 16 बदमाशों ने डाका डाल लिया था। जिसमें वह और उनका बेटा बुरी तरह से जख्मी हो गए थे।
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उस समय की वह बड़ी वारदात थी। जिसके चलते तत्कालीन डीआईजी शैलेंद्र कुमार को मौके पर पहुंचना पड़ा था। दो दशक पहले गंगानगर और आसपास का क्षेत्र सुनसान था। राधा गार्डन कॉलोनी में सिर्फ उनके मकान के अलावा तीन मकान और बने हुए थे। जिसके चलते सुरेश चंद गर्ग के बड़े भाई स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल गर्ग ने तत्कालीन डीआईजी को सुरक्षा के लिए मेन रोड पर स्थित एक कमरा सुरक्षा के लिए दे दिया था। इंचौली थाना दूर होने कि चलते कमरे में चार सिपाही तैनात कर दिए गए थे।
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फिर चौकी ही मान ली
बाद में पुलिस महकमे ने उस कमरे को चौकी ही मान लिया। बीस साल से कमरे में पुलिस चौकी चल रही है। स्वतंत्रता सेनानी ने कमरा तो सुरक्षा के लिए दिया, लेकिन पुलिस ने कमरे के बराबर में भी जमीन पर कब्जा कर दूसरा कमरा बना दिया। साथ ही मेन रोड की तरफ टायल्स लगा दी। सुरेश चंद गर्ग का कहना है कि यह जगह उनके परिवार की थी। पुलिस के नाम यह दर्ज नहीं है। अब पुलिस इस पर थाना खोलेगी और बाद में सड़क और आसपास की जगह पर भी अतिक्रमण किया जाएगा। वैसे कायदे से तो चौकी भी अवैध रूप से चल रही है।
16 साल की उम्र में गए थे जेल
मेरठ। स्वतंत्रता सेनानी रतनलाल गर्ग का जन्म 13 अप्रैल 1925 को परीक्षितगढ़ में हुआ था। 16 अगस्त 1942 को मवाना तहसील में हुए बर्बर गोलीकांड में वह बाल-बाल बचे, लेकिन देशसेवा से पीछे नहीं हटे। 21 अगस्त 1942 से 23 फरवरी 1943 तक मेरठ जेल में बंद रहे। 1975 में आपातकाल घोषित होने पर उन्हें फिर नजरबंद कर दिया। 1994-95 में मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए। 1994 में उन्हें सुभाष रत्न व 1996 में मेरठ रत्न से सुशोभित किया गया था।