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नौकरानी के हाथों चाय में दिया था जहरीला पदार्थ : नेेहा
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मेरठ। दीवान समूह की बहू नेहा दीवान के सिविल लाइन पुलिस ने बयान दर्ज किए हैं। नेहा ने अपने बयान में कहा है कि नौकरानी ने उन्हें चाय दी थी। इसमें जहरीला पदार्थ मिला हुआ था। चाय पीने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। वह काफी देर तक कमरे में ही तड़पती रही, लेकिन किसी ने भी उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं कराया। उन्होंने अपने भाई को फोन कर घटना के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने मेरठ पहुंचकर अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने नेहा दीवान के बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित साकेत निवासी अजय दीवान का अपनी पत्नी नेहा दीवान से काफी दिनों से विवाद चल रहा है। 25 फरवरी को नेहा दीवान ने पति के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। नेहा ने अपनी शिकायत में लिखा था कि अजय दीवान उनके साथ आए दिन मारपीट करते है और बच्चों को भी उनके खिलाफ भड़काते हैं। आरोप लगाया था कि 22 फरवरी को पति ने उनकी चाय में जहरीला पदार्थ मिला दिया था। इससे वह बेसुध हो गई थीं और उनके मुंह से झाग निकलने लगे थे। उनके भाई ने पुलिस की मदद से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था।
नेहा के मुताबिक मुकदमा दर्ज होने बाद पुलिस ने अजय दीवान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसका नतीजा यह हुआ कि चार मार्च को उन्हें कोठी के अंदर घुसने नहीं दिया था। कई घंटों तक वह कोठी के बाहर बैठी रहीं, लेकिन ससुरालियों ने गेट तक नहीं खोला था। उन्होंने उस समय सिविल लाइन थाना पुलिस से लेकर एडीजी राजीव सभरवाल तक फोन किए थे, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली थी। करीब सात घंटों तक साकेत कोठी से एसएसपी ऑफिस तक चक्कर लगाने के बाद उन्हें कोई मदद नहीं मिली तो वह अचानक बेहोश हो गई थी। जानकारी मिलने पर उनके पिता बलराम जौहरी एसएसपी ऑफिस पहुंचे थे। वह बेटी को अपने साथ दिल्ली ले गए थे।
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सिविल लाइन पुलिस तभी से उनके बयान दर्ज करने की कोशिश कर रही थी। 20 दिन बाद नेहा दीवान मेरठ पहुंची और सिविल लाइन पुलिस को बयान दर्ज कराए। उन्होंने अपने बयान में पति अजय दीवान पर नौकरानी के हाथों जहरीली चाय पिलाने समेत अन्य कई आरोप लगाए हैं। सीओ सिविल लाइन अरविंद चौरसिया का कहना है कि नेहा दीवान के बयान दर्ज हो गए हैं। अब अजय दीवान के बयान लेने के लिए उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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नेहा ने कहा, पुलिस नहीं कर रही मदद
नेहा दीवान का कहना है कि उन्होंने 25 फरवरी को पति अजय दीवान के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पति ने उन्हें कोठी से बाहर निकाल दिया था। इसको लेकर उन्होंने पुलिस के तमाम उच्चाधिकारियों से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अजय दीवान से बात करने की कोशिश नहीं की। उनका कहना है कि पुलिस की ढीली कार्रवाई के कारण उनके साथ बुरा बर्ताव हुआ है।
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सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित साकेत निवासी अजय दीवान का अपनी पत्नी नेहा दीवान से काफी दिनों से विवाद चल रहा है। 25 फरवरी को नेहा दीवान ने पति के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। नेहा ने अपनी शिकायत में लिखा था कि अजय दीवान उनके साथ आए दिन मारपीट करते है और बच्चों को भी उनके खिलाफ भड़काते हैं। आरोप लगाया था कि 22 फरवरी को पति ने उनकी चाय में जहरीला पदार्थ मिला दिया था। इससे वह बेसुध हो गई थीं और उनके मुंह से झाग निकलने लगे थे। उनके भाई ने पुलिस की मदद से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था।
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नेहा के मुताबिक मुकदमा दर्ज होने बाद पुलिस ने अजय दीवान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसका नतीजा यह हुआ कि चार मार्च को उन्हें कोठी के अंदर घुसने नहीं दिया था। कई घंटों तक वह कोठी के बाहर बैठी रहीं, लेकिन ससुरालियों ने गेट तक नहीं खोला था। उन्होंने उस समय सिविल लाइन थाना पुलिस से लेकर एडीजी राजीव सभरवाल तक फोन किए थे, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली थी। करीब सात घंटों तक साकेत कोठी से एसएसपी ऑफिस तक चक्कर लगाने के बाद उन्हें कोई मदद नहीं मिली तो वह अचानक बेहोश हो गई थी। जानकारी मिलने पर उनके पिता बलराम जौहरी एसएसपी ऑफिस पहुंचे थे। वह बेटी को अपने साथ दिल्ली ले गए थे।
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सिविल लाइन पुलिस तभी से उनके बयान दर्ज करने की कोशिश कर रही थी। 20 दिन बाद नेहा दीवान मेरठ पहुंची और सिविल लाइन पुलिस को बयान दर्ज कराए। उन्होंने अपने बयान में पति अजय दीवान पर नौकरानी के हाथों जहरीली चाय पिलाने समेत अन्य कई आरोप लगाए हैं। सीओ सिविल लाइन अरविंद चौरसिया का कहना है कि नेहा दीवान के बयान दर्ज हो गए हैं। अब अजय दीवान के बयान लेने के लिए उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नेहा ने कहा, पुलिस नहीं कर रही मदद
नेहा दीवान का कहना है कि उन्होंने 25 फरवरी को पति अजय दीवान के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पति ने उन्हें कोठी से बाहर निकाल दिया था। इसको लेकर उन्होंने पुलिस के तमाम उच्चाधिकारियों से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अजय दीवान से बात करने की कोशिश नहीं की। उनका कहना है कि पुलिस की ढीली कार्रवाई के कारण उनके साथ बुरा बर्ताव हुआ है।