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अब प्लाज्मा की कमी से दम तोड़ रहे मरीज
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अब प्लाज्मा की कमी में दम तोड़ रहे मरीज
मेरठ। अब प्लाज्मा के अभाव में कोरोना संक्रमितों की सांसों की डोर टूूट रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को समय पर प्लाज्मा नहीं मिल रहा है। अस्पतालों में प्लाज्मा दाताओं का अकाल पड़ गया है। मरीज और तीमारदार प्लाज्मा के लिए भटक रहे हैँ, मगर उन्हें सहायता नहीं मिल रही। तीमारदार सोशल मीडिया के सहारे प्लाज्मा की गुहार कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा है। अब तक 725 लोगों ने प्लाज्मा दान के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन सिर्फ 35 ने ही प्लाज्मा दान किया है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा देने वालों का अभाव है। केवल 13 लोग ऐसे हैं, जिनमें पर्याप्त एंटीबॉडी होने के कारण उनका प्लाज्मा लिया गया। एंटीबॉडी कम होने के कारण बाकी का प्लाज्मा नहीं लिया जा सका।
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ये कर सकते हैं प्लाज्मा का दान
- ऐसे कोरोना मरीज जो पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और ठीक होने के बाद 28 दिन का समय पूरा कर चुके हैं, वे तीन महीने तक प्लाज्मा का दान कर सकते हैं। मेडिकल में लगातार ऐसे मरीजों की सूची बन रही है, लेकिन दानदाता आगे नहीं आ रहे। मेडिकल अस्पताल में कोविड वार्ड प्रभारी डॉ. सुधीर राठी के अनुसार अब तक 725 ने प्लाज्मा दान को पंजीयन कराया कुल 13 ने प्लाज्मा दिया है। अब अस्पताल के पास सिर्फ पांच यूनिट प्लाज्मा है, शेष इस्तेमाल हो चुका है।
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यह है प्लाज्मा थेरेपी
- प्लाज्मा थेरेपी को मेडिकल साइंस में प्लास्माफेरेसिस कहते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जो खून के तरल पदार्थ, प्लाज्मा को रक्त कोशिकाओं से अलग करती है। इसके बाद अगर किसी व्यक्ति के प्लाज्मा में अस्वस्थ टिशू मिलते हैं तो उसका इलाज समय रहते शुरू किया जाता है।
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मेरठ। अब प्लाज्मा के अभाव में कोरोना संक्रमितों की सांसों की डोर टूूट रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को समय पर प्लाज्मा नहीं मिल रहा है। अस्पतालों में प्लाज्मा दाताओं का अकाल पड़ गया है। मरीज और तीमारदार प्लाज्मा के लिए भटक रहे हैँ, मगर उन्हें सहायता नहीं मिल रही। तीमारदार सोशल मीडिया के सहारे प्लाज्मा की गुहार कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा है। अब तक 725 लोगों ने प्लाज्मा दान के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन सिर्फ 35 ने ही प्लाज्मा दान किया है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा देने वालों का अभाव है। केवल 13 लोग ऐसे हैं, जिनमें पर्याप्त एंटीबॉडी होने के कारण उनका प्लाज्मा लिया गया। एंटीबॉडी कम होने के कारण बाकी का प्लाज्मा नहीं लिया जा सका।
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ये कर सकते हैं प्लाज्मा का दान
- ऐसे कोरोना मरीज जो पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और ठीक होने के बाद 28 दिन का समय पूरा कर चुके हैं, वे तीन महीने तक प्लाज्मा का दान कर सकते हैं। मेडिकल में लगातार ऐसे मरीजों की सूची बन रही है, लेकिन दानदाता आगे नहीं आ रहे। मेडिकल अस्पताल में कोविड वार्ड प्रभारी डॉ. सुधीर राठी के अनुसार अब तक 725 ने प्लाज्मा दान को पंजीयन कराया कुल 13 ने प्लाज्मा दिया है। अब अस्पताल के पास सिर्फ पांच यूनिट प्लाज्मा है, शेष इस्तेमाल हो चुका है।
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यह है प्लाज्मा थेरेपी
- प्लाज्मा थेरेपी को मेडिकल साइंस में प्लास्माफेरेसिस कहते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जो खून के तरल पदार्थ, प्लाज्मा को रक्त कोशिकाओं से अलग करती है। इसके बाद अगर किसी व्यक्ति के प्लाज्मा में अस्वस्थ टिशू मिलते हैं तो उसका इलाज समय रहते शुरू किया जाता है।
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