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अमर उजाला के 34 साल: पढ़ाई से डिग्री-मार्कशीट लेने की भी तस्वीर बदली
Sat, 12 Dec 2020 03:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 03:05 AM IST
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- फोटो : पेक्सेल्स
अमर उजाला के 34 साल के सफर में मेरठ में उच्च शिक्षा की तस्वीर बिल्कुल बदल गई है। पहले जहां कैंपस-कॉलेजों में दाखिलों से लेकर मार्कशीट डिग्री लेने तक के लिए छात्र-छात्राएं लाइन में लगते थे, अब सब ऑनलाइन हो गया है। निजी विश्वविद्यालयों में तो व्यवस्था सुधरी ही है, सीसीएसयू में 2020 नई राह लेकर आया। कोरोना के मुश्किल समय में सारे प्रमाणपत्रों के आवेदन ऑनलाइन मिलने लगे हैं। कक्षाओं में ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन भी पढ़ाई हो रही है।
1986 में जब अमर उजाला की शुरुआत हुई थी, जिले में 12 डिग्री कॉलेज थे। इनमें बीए-बीकॉम-बीएससी, एमए-एमकॉम-एमएससी, एलएलबी जैसे गिनती के ही कोर्स चलते थे। कैंपस-कॉलेजों में जहां एडमिशन से लेकर डिग्री-मार्कशीट लेने के लिए कतारें लगती थीं।
अब ऑनलाइन व्यवस्था में यूनिवर्सिटी-कॉलेजों में कब एडमिशन प्रक्रिया शुरू हुई और कब खत्म, इसका पता ही नहीं चलता। कोई कैंपस-कॉलेज ऐसा नहीं रहा, जहां ऑनलाइन पढ़ाई न हुई हो।
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1986 में जब अमर उजाला की शुरुआत हुई थी, जिले में 12 डिग्री कॉलेज थे। इनमें बीए-बीकॉम-बीएससी, एमए-एमकॉम-एमएससी, एलएलबी जैसे गिनती के ही कोर्स चलते थे। कैंपस-कॉलेजों में जहां एडमिशन से लेकर डिग्री-मार्कशीट लेने के लिए कतारें लगती थीं।
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अब ऑनलाइन व्यवस्था में यूनिवर्सिटी-कॉलेजों में कब एडमिशन प्रक्रिया शुरू हुई और कब खत्म, इसका पता ही नहीं चलता। कोई कैंपस-कॉलेज ऐसा नहीं रहा, जहां ऑनलाइन पढ़ाई न हुई हो।
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प्रमाणपत्रों के आवेदन भी ऑनलाइन
सीसीएसयू कैंपस के मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों के एक हजार कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को बड़ा तोहफा मिला। वर्षों से जहां छात्र-छात्राएं डिग्री-मार्कशीट के आवेदन के लिए कतार में लगते थे। इस बार ये सूरत बदल गई।
अब विवि में मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन, ट्रांसक्रिप्ट सबका आवेदन ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन भी हो चुका है। शहर के सबसे पुराने मेरठ कॉलेज और एनएएस कॉलेज ने दाखिले की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। दूसरे कॉलेज भी इस प्रक्रिया को अपना रहे हैं।
कोर्स हो गए दोगुने, मनचाही पढ़ाई करें
सीसीएस यूनिवर्सिटी हो या सरदार पटेल वल्लभाई कृषि विश्वविद्यालय, सुभारती यूनिवर्सिटी, आईआईएमटी यूनिवर्सिटी और शोभित यूनिवर्सिटी, सभी में मिलाकर यूजी और पीजी के कोर्सेज की संख्या 80 तक पहुंच गई है।
पहले यह संख्या 40 के आसपास थी। हर साल यहां से 13 हजार इंजीनियर, 300 डॉक्टर, दो हजार वकील, 10 हजार शिक्षक और 40 हजार दूसरे ग्रेजुएट कोर्सों की डिग्री छात्र-छात्राएं पा रहे हैं।
सीसीएसयू कैंपस के मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों के एक हजार कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को बड़ा तोहफा मिला। वर्षों से जहां छात्र-छात्राएं डिग्री-मार्कशीट के आवेदन के लिए कतार में लगते थे। इस बार ये सूरत बदल गई।
अब विवि में मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन, ट्रांसक्रिप्ट सबका आवेदन ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन भी हो चुका है। शहर के सबसे पुराने मेरठ कॉलेज और एनएएस कॉलेज ने दाखिले की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। दूसरे कॉलेज भी इस प्रक्रिया को अपना रहे हैं।
कोर्स हो गए दोगुने, मनचाही पढ़ाई करें
सीसीएस यूनिवर्सिटी हो या सरदार पटेल वल्लभाई कृषि विश्वविद्यालय, सुभारती यूनिवर्सिटी, आईआईएमटी यूनिवर्सिटी और शोभित यूनिवर्सिटी, सभी में मिलाकर यूजी और पीजी के कोर्सेज की संख्या 80 तक पहुंच गई है।
पहले यह संख्या 40 के आसपास थी। हर साल यहां से 13 हजार इंजीनियर, 300 डॉक्टर, दो हजार वकील, 10 हजार शिक्षक और 40 हजार दूसरे ग्रेजुएट कोर्सों की डिग्री छात्र-छात्राएं पा रहे हैं।
इस साल दो हजार से अधिक वेबिनार
34 साल के इस ऐतिहासिक सफर में कैंपस-कॉलेजों में इस साल शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां तमाम विभागों में लाखों रुपये खर्च कर सेमिनार होते थे वहीं, इस बार कठिन समय में पूरी तस्वीर बदल चुकी है। जिले के पांच विश्वविद्यालयों और 100 के करीब कॉलेजों में पिछले आठ महीने में दो हजार से अधिक वेबिनार हो चुके हैं। विवि और कॉलेजों में जहां पत्राचार होता था, अब उसकी जगह सभी जगहों पर पेपरलेस वर्क चल रहा है।
कब-कब खुले विश्वविद्यालय
1965 : सीसीएसयू
1997 : एमआईईटी इंजीनियरिंग कॉलेज
2000 : सुभारती डेंटल कॉलेज
2002 : सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय
2006 : शोभित डीम्ड यूनिवर्सिटी
2008 : नेताजी सुभाष चंद बोस सुभारती यूनिवर्सिटी
2016: आईआईएमटी यूनिवर्सिटी
न्यूमेरिकल्स
मेरठ जिले में पांच विश्विद्यालय, 100 कॉलेज
80 के करीब कोर्सों में 65 हजार से अधिक सीटें
34 साल के इस ऐतिहासिक सफर में कैंपस-कॉलेजों में इस साल शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां तमाम विभागों में लाखों रुपये खर्च कर सेमिनार होते थे वहीं, इस बार कठिन समय में पूरी तस्वीर बदल चुकी है। जिले के पांच विश्वविद्यालयों और 100 के करीब कॉलेजों में पिछले आठ महीने में दो हजार से अधिक वेबिनार हो चुके हैं। विवि और कॉलेजों में जहां पत्राचार होता था, अब उसकी जगह सभी जगहों पर पेपरलेस वर्क चल रहा है।
कब-कब खुले विश्वविद्यालय
1965 : सीसीएसयू
1997 : एमआईईटी इंजीनियरिंग कॉलेज
2000 : सुभारती डेंटल कॉलेज
2002 : सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय
2006 : शोभित डीम्ड यूनिवर्सिटी
2008 : नेताजी सुभाष चंद बोस सुभारती यूनिवर्सिटी
2016: आईआईएमटी यूनिवर्सिटी
न्यूमेरिकल्स
मेरठ जिले में पांच विश्विद्यालय, 100 कॉलेज
80 के करीब कोर्सों में 65 हजार से अधिक सीटें