{"_id":"57fe8ace4f1c1bc67b28f572","slug":"phd-me-aarakshan","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएचडी में आरक्षण का पेच, कुछ हो सकते हैं बाहर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएचडी में आरक्षण का पेच, कुछ हो सकते हैं बाहर
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Thu, 13 Oct 2016 02:37 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीसीएसयू की पीएचडी शुरू होने में एक नया पेच आरक्षण का सामने आया है। केंद्र में जाटों को आरक्षण मिल गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो आरक्षण को खत्म कर दिया। इस दौरान छात्रों ने यूजीसी नेट और जेआरएफ क्वालीफाई किया है। आरक्षण खत्म होने के बाद आरक्षण के आधार पर कुछ छात्रों ने पीएचडी के लिए भी आवेदन किया है। विवि इन मामलों पर विचार कर रहा है। ऐसे केस को अलग किया जा रहा है।
विवि की पीएचडी प्रक्रिया में आरक्षण का एक नया पेच सामने आया है। केंद्र में जाट आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट खत्म कर चुका है। करीब एक साल तक यह रहा।
इस दरमियान बहुत से जाट छात्र यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) का नेट (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) और जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) क्वालीफाई कर गए। उन्हें सर्टिफिकेट जारी हो गया। जाट आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने आरक्षण को खत्म कर दिया। विवि के सामने समस्या यह खड़ी हुई है कि नेट और जेआरएफ क्वालीफाई करने वाले कैंडीडेट्स ने पीएचडी के लिए आवेदन किया है। विवि उन्हें मना करने की स्थिति में नहीं है। पीएचडी के लिए आवेदन वह आरक्षण खत्म होने के बाद कर रहे हैं। ऐसे केस को विवि अलग कर रहा है। इन पर लीगल राय ली जाएगी। विवि के अधिकारी मामले को लेकर बैठक भी करेंगे। पीएचडी का कोर्स वर्क शुरू होने में अभी और वक्त लगने की उम्मीद है। विवि ने खाली सीटों का ब्योरा अभी जारी नहीं किया है। जेआरएफ कैंडीडेट्स की आरडीसी हो रही है। छह महीने के कोर्स वर्क का इंतजार एंट्रेंस क्वालीफाई करने वाले अभ्यर्थी कर रहे हैं। नवंबर में कोर्स वर्क शुरू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विवि की पीएचडी प्रक्रिया में आरक्षण का एक नया पेच सामने आया है। केंद्र में जाट आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट खत्म कर चुका है। करीब एक साल तक यह रहा।
इस दरमियान बहुत से जाट छात्र यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) का नेट (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) और जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) क्वालीफाई कर गए। उन्हें सर्टिफिकेट जारी हो गया। जाट आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने आरक्षण को खत्म कर दिया। विवि के सामने समस्या यह खड़ी हुई है कि नेट और जेआरएफ क्वालीफाई करने वाले कैंडीडेट्स ने पीएचडी के लिए आवेदन किया है। विवि उन्हें मना करने की स्थिति में नहीं है। पीएचडी के लिए आवेदन वह आरक्षण खत्म होने के बाद कर रहे हैं। ऐसे केस को विवि अलग कर रहा है। इन पर लीगल राय ली जाएगी। विवि के अधिकारी मामले को लेकर बैठक भी करेंगे। पीएचडी का कोर्स वर्क शुरू होने में अभी और वक्त लगने की उम्मीद है। विवि ने खाली सीटों का ब्योरा अभी जारी नहीं किया है। जेआरएफ कैंडीडेट्स की आरडीसी हो रही है। छह महीने के कोर्स वर्क का इंतजार एंट्रेंस क्वालीफाई करने वाले अभ्यर्थी कर रहे हैं। नवंबर में कोर्स वर्क शुरू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन