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माह-ए-रमजान से पहले अदा करें जकात
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माह-ए-रमजान से पहले अदा करें जकात
मेरठ। सैफी संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हसीन अहमद सैफी ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की है कि वह आगामी रमजान में घरों में ही रहकर पांच वक्त की नमाज और नमाज ए तरावीह अदा करें। ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी लॉकडाउन का पालन भी होता रहे और इबादत में भी कोई कमी न हो सके। सड़कों पर बेवजह भीड़ इकट्ठा न करें। इफ्तार व सहरी घरों में ही रहकर करें।
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के चलते लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। सरकार ने 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है। ऐसे वक्त में लोगों के सामने घर चलाना मुश्किल हो गया है। इस वक्त गरीब, मजलूम, यतीमों और बेवाओं (विधवाओं) को दवा, राशन व रुपये की सख्त जरूरत है। इस्लाम में पांच फर्ज में जकात का भी एक फ्राइज है, जो मुसलमान साहिबे निसाब (शरई मालदार) है, यानि जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या इसकी कीमत के बराबर माल या रुपये या साढ़े बावन तोला चांदी या इसकी कीमत का माल हो, वह लोग मुकद्दस माह रमजान का इंतजार न करते हुए अपने कुल माल का 2.5 फीसदी निकाल कर जल्द से जल्द हकदारों तक राशन या रकम पहुंचा दें। ताकि रोजेदारों को रोजे रखने में सहूलियत रहे। जकात निकालने का यह सबसे मुनासिब वक्त है। जकात के अलावा सदका और खैरात भी दिल खोलकर अदा करें।
उन्होंने जोर दिया कि अल्लाह को पोशीदा (छिपी हुई) इबादत पसंद है, इसलिए गरीबों की मदद करते वक्त दिखावा न करें। अपने पड़ोसी व रिश्तेदारों का खास ख्याल रखें। जकात निकालने का सही तरीका उलमा-ए-इकराम से जरूर पूछ लें। मालिक अपने मुलाजिमों को उनकी मजदूरी वक्त पर दे। हो सके तो अलग से मदद कर दे। अपने और मुल्क के सभी लोगों के लिए दुआओं का भी एहतमाम करें। नमाज के बाद हसीन सैफी ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए करीब 50 गरीब परिवार के लिए राशन किट तैयार कर उन तक पहुंचाने का काम किया।
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मेरठ। सैफी संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हसीन अहमद सैफी ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की है कि वह आगामी रमजान में घरों में ही रहकर पांच वक्त की नमाज और नमाज ए तरावीह अदा करें। ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी लॉकडाउन का पालन भी होता रहे और इबादत में भी कोई कमी न हो सके। सड़कों पर बेवजह भीड़ इकट्ठा न करें। इफ्तार व सहरी घरों में ही रहकर करें।
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के चलते लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। सरकार ने 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है। ऐसे वक्त में लोगों के सामने घर चलाना मुश्किल हो गया है। इस वक्त गरीब, मजलूम, यतीमों और बेवाओं (विधवाओं) को दवा, राशन व रुपये की सख्त जरूरत है। इस्लाम में पांच फर्ज में जकात का भी एक फ्राइज है, जो मुसलमान साहिबे निसाब (शरई मालदार) है, यानि जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या इसकी कीमत के बराबर माल या रुपये या साढ़े बावन तोला चांदी या इसकी कीमत का माल हो, वह लोग मुकद्दस माह रमजान का इंतजार न करते हुए अपने कुल माल का 2.5 फीसदी निकाल कर जल्द से जल्द हकदारों तक राशन या रकम पहुंचा दें। ताकि रोजेदारों को रोजे रखने में सहूलियत रहे। जकात निकालने का यह सबसे मुनासिब वक्त है। जकात के अलावा सदका और खैरात भी दिल खोलकर अदा करें।
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उन्होंने जोर दिया कि अल्लाह को पोशीदा (छिपी हुई) इबादत पसंद है, इसलिए गरीबों की मदद करते वक्त दिखावा न करें। अपने पड़ोसी व रिश्तेदारों का खास ख्याल रखें। जकात निकालने का सही तरीका उलमा-ए-इकराम से जरूर पूछ लें। मालिक अपने मुलाजिमों को उनकी मजदूरी वक्त पर दे। हो सके तो अलग से मदद कर दे। अपने और मुल्क के सभी लोगों के लिए दुआओं का भी एहतमाम करें। नमाज के बाद हसीन सैफी ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए करीब 50 गरीब परिवार के लिए राशन किट तैयार कर उन तक पहुंचाने का काम किया।
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